‘बिजली विभाग के कारण शो-पीस बन रही सरकार की सोलर योजना’: Vishwa Hindu Mahasangh Bharat के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने उठाए गंभीर सवाल
Vishwa Hindu Mahasangh Bharat के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने सरकार की महत्वाकांक्षी सोलर रूफटॉप योजना के जमीनी क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने और आम उपभोक्ताओं के बिजली बिल का बोझ कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई सोलर योजनाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन बिजली विभाग की कार्यप्रणाली, लो वोल्टेज, अनियमित विद्युत आपूर्ति, नेट मीटरिंग से जुड़ी परेशानियों और विभागीय प्रक्रियाओं के कारण कई स्थानों पर उपभोक्ताओं को इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
प्रमोद त्यागी ने कहा कि सरकार की मंशा आम नागरिकों को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ने और बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की है, लेकिन योजना के क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण कड़ी बिजली विभाग की कमियों के कारण कई उपभोक्ताओं के घरों पर लगे सोलर प्लांट महज ‘शो-पीस’ बनकर रह गए हैं।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ता अपनी मेहनत की कमाई से लाखों रुपये खर्च करके सोलर रूफटॉप सिस्टम लगवाते हैं। कई लोग बैंक से ऋण लेकर और मासिक किस्तों का बोझ उठाकर सोलर प्लांट स्थापित कराते हैं, लेकिन यदि दिन के समय पर्याप्त और स्थिर ग्रिड वोल्टेज ही उपलब्ध न हो तो ग्रिड-टाई सोलर सिस्टम अपेक्षित तरीके से बिजली उत्पादन नहीं कर पाता।
प्रमोद त्यागी ने मांग की कि केंद्र और राज्य सरकारों को सोलर योजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए केवल सब्सिडी और लक्ष्य तय करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बिजली विभागों और वितरण कंपनियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
‘सरकार की योजना अच्छी, लेकिन बिजली विभाग की व्यवस्था बन रही बड़ी बाधा’
विश्व हिंदू महासंघ भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा कि सरकार द्वारा अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई सोलर रूफटॉप योजनाएं भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी पहल आम नागरिकों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है और सरकार की ओर से सब्सिडी उपलब्ध कराए जाने से बड़ी संख्या में उपभोक्ता अपने घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगवा रहे हैं।
लेकिन प्रमोद त्यागी का कहना है कि योजना की वास्तविक सफलता केवल सोलर पैनल लगवाने से तय नहीं हो सकती।
यदि बिजली विभाग की ग्रिड व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, उपभोक्ताओं को पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिलेगा और नेट मीटरिंग समेत दूसरी प्रक्रियाएं समय पर पूरी नहीं होंगी तो करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद योजना अपने वास्तविक उद्देश्य तक नहीं पहुंच पाएगी।
लो वोल्टेज से बंद हो रहे सोलर इनवर्टर, धूप के बावजूद नहीं बन रहीं यूनिट
प्रमोद त्यागी ने सोलर उपभोक्ताओं के सामने आ रही तकनीकी समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि लो वोल्टेज ग्रिड-टाई सोलर सिस्टम के लिए बड़ी बाधा बन रहा है।
उन्होंने कहा कि आम घरों में लगाए जाने वाले अधिकांश ग्रिड-टाई सोलर सिस्टम बिजली विभाग की ग्रिड के साथ मिलकर काम करते हैं।
यदि ग्रिड से आने वाली बिजली की वोल्टेज निर्धारित सीमा से बहुत कम हो जाए या विद्युत आपूर्ति बार-बार बाधित हो तो सोलर इनवर्टर सुरक्षा कारणों से काम करना बंद कर सकता है।
इसका परिणाम यह होता है कि छत पर तेज धूप होने और सोलर पैनलों के बिजली उत्पादन की क्षमता मौजूद होने के बावजूद उपभोक्ता अपेक्षित यूनिट का लाभ नहीं उठा पाता।
क्या है Inverter Tripping? आम उपभोक्ताओं को समझनी होगी समस्या
ग्रिड-टाई सोलर सिस्टम में इनवर्टर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सोलर पैनलों से उत्पन्न बिजली को घर और ग्रिड के उपयोग के अनुकूल बनाने का काम इनवर्टर करता है।
लेकिन इसके लिए ग्रिड की वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी निर्धारित सुरक्षा मानकों के भीतर होना आवश्यक है।
यदि ग्रिड वोल्टेज अत्यधिक कम या ज्यादा हो जाए तो सोलर इनवर्टर सुरक्षा कारणों से ग्रिड से डिस्कनेक्ट हो सकता है।
इस स्थिति को सामान्य भाषा में इनवर्टर ट्रिपिंग कहा जाता है।
प्रमोद त्यागी का कहना है कि कई क्षेत्रों में लो वोल्टेज की समस्या के कारण उपभोक्ताओं के सोलर सिस्टम बार-बार बंद हो रहे हैं और अपेक्षित बिजली उत्पादन नहीं हो पा रहा है।
छत पर तेज धूप, फिर भी मीटर में नहीं जुड़ रहीं यूनिट!
सोलर उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वे अक्सर यह समझ नहीं पाते कि पर्याप्त धूप के बावजूद उनका सिस्टम अपेक्षित बिजली उत्पादन क्यों नहीं कर रहा।
ग्रिड-टाई सोलर सिस्टम का संचालन ग्रिड की उपलब्धता और गुणवत्ता से जुड़ा होता है।
यदि बिजली विभाग की ओर से मिलने वाली वोल्टेज निर्धारित ऑपरेटिंग रेंज के अनुकूल नहीं है तो इनवर्टर सुरक्षा मोड में जाकर उत्पादन रोक सकता है।
ऐसे में उपभोक्ता को लगता है कि उसके सोलर पैनल खराब हैं, जबकि कई मामलों में वास्तविक समस्या ग्रिड वोल्टेज और बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता से जुड़ी हो सकती है।
दिन में बिजली गायब तो ग्रिड-टाई सोलर भी हो सकता है बंद
प्रमोद त्यागी ने कहा कि आम नागरिकों को सोलर सिस्टम खरीदते समय ग्रिड-टाई और हाइब्रिड सोलर सिस्टम के बीच अंतर की पूरी जानकारी भी दी जानी चाहिए।
सामान्य ग्रिड-टाई सोलर सिस्टम बिजली विभाग की ग्रिड से जुड़कर काम करता है।
यदि दिन के समय बिजली आपूर्ति बंद हो जाए तो सुरक्षा कारणों से यह सिस्टम भी बिजली उत्पादन को ग्रिड में भेजना बंद कर देता है।
इस स्थिति में कई उपभोक्ता हैरान रह जाते हैं कि छत पर सोलर पैनल लगे होने के बावजूद बिजली कटौती के समय उनके घर में बिजली क्यों नहीं आ रही।
Anti-Islanding Protection क्यों जरूरी, लेकिन उपभोक्ताओं की परेशानी भी समझनी होगी
ग्रिड-टाई सोलर सिस्टम में एंटी-आइसलैंडिंग प्रोटेक्शन एक महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था है।
यदि बिजली विभाग की मुख्य आपूर्ति बंद हो जाए तो सोलर इनवर्टर भी ग्रिड को बिजली भेजना बंद कर देता है।
इसका उद्देश्य उन बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा करना है, जो पावर कट के दौरान विद्युत लाइन की मरम्मत कर रहे हों।
यदि बिजली आपूर्ति बंद होने के बावजूद सोलर सिस्टम ग्रिड में बिजली भेजता रहे तो लाइन पर काम करने वाले कर्मचारियों को करंट लगने का खतरा हो सकता है।
प्रमोद त्यागी ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है, लेकिन सरकार और बिजली विभाग को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और स्थिर ग्रिड सप्लाई मिले।
‘लाखों रुपये लगाने के बाद जीरो यूनिट का उत्पादन उपभोक्ता के साथ अन्याय’
प्रमोद त्यागी ने कहा कि यदि कोई नागरिक लाखों रुपये खर्च करके सोलर सिस्टम लगवाता है और बिजली विभाग की कमजोर ग्रिड व्यवस्था के कारण उसका सिस्टम अपेक्षित उत्पादन नहीं कर पाता तो यह बेहद गंभीर स्थिति है।
उपभोक्ता सोलर प्लांट इस उम्मीद से लगवाता है कि उसका बिजली बिल कम होगा और वह पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगा।
लेकिन यदि लो वोल्टेज और अनियमित विद्युत आपूर्ति के कारण सिस्टम बार-बार ट्रिप होता रहे तो निवेश का वास्तविक लाभ प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों के समाधान के लिए स्पष्ट और प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली बनानी चाहिए।
नेट मीटर की समस्या ने भी बढ़ाई सोलर उपभोक्ताओं की परेशानी
प्रमोद त्यागी ने नेट मीटरिंग प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि सोलर पैनल स्थापित होने के बाद कई उपभोक्ताओं को नेट मीटर लगवाने और आवश्यक विभागीय प्रक्रियाएं पूरी कराने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
नेट मीटर ग्रिड से ली गई और ग्रिड को दी गई बिजली का हिसाब रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यदि सोलर सिस्टम स्थापित होने के बावजूद नेट मीटरिंग प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होती तो उपभोक्ता अपने निवेश का पूरा लाभ नहीं उठा पाता।
‘फाइलों में न उलझे सोलर क्रांति, समयबद्ध हो पूरी प्रक्रिया’
विश्व हिंदू महासंघ भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा कि सोलर योजना को कागजी प्रक्रियाओं में उलझने से बचाना होगा।
उन्होंने मांग की कि आवेदन से लेकर तकनीकी स्वीकृति, निरीक्षण और नेट मीटरिंग तक की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाया जाए।
उपभोक्ता को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि उसके आवेदन की वर्तमान स्थिति क्या है और प्रक्रिया पूरी होने में कितना समय लगेगा।
यदि किसी स्तर पर अनावश्यक देरी होती है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
सोलर लगाने के बाद उपभोक्ता पर पड़ रही ‘दोहरी मार’
प्रमोद त्यागी ने कहा कि कई उपभोक्ता बैंक से ऋण लेकर सोलर प्लांट स्थापित कराते हैं।
ऐसे उपभोक्ताओं को उम्मीद होती है कि बिजली बिल में होने वाली बचत से वे ऋण की मासिक किस्त का बोझ संतुलित कर सकेंगे।
लेकिन यदि सोलर सिस्टम लो वोल्टेज, नेट मीटरिंग में देरी या दूसरी तकनीकी समस्याओं के कारण अपेक्षित उत्पादन नहीं करता तो उपभोक्ता को दोहरी आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है।
एक तरफ उसे सोलर प्लांट की ईएमआई चुकानी होती है और दूसरी ओर पहले की तरह बिजली बिल का भुगतान भी करना पड़ सकता है।
‘उपभोक्ता की पूंजी फंस रही, विभाग को तय करनी होगी जवाबदेही’
प्रमोद त्यागी ने कहा कि सोलर प्लांट लगवाना आम परिवार के लिए छोटा निवेश नहीं है।
कई उपभोक्ता वर्षों की बचत और बैंक ऋण के माध्यम से इस व्यवस्था को अपनाते हैं।
ऐसे में यदि बिजली विभाग की तकनीकी और प्रशासनिक कमियों के कारण उपभोक्ता को अपेक्षित लाभ नहीं मिलता तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि सरकार को प्रत्येक जिले में सोलर उपभोक्ताओं की शिकायतों के लिए अलग हेल्प डेस्क या प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने पर विचार करना चाहिए।
ट्रांसफार्मर अपग्रेडेशन की मांग, कमजोर ग्रिड को मजबूत करे विभाग
लो वोल्टेज की समस्या के समाधान को लेकर प्रमोद त्यागी ने कहा कि बिजली विभाग को प्रभावित क्षेत्रों का तकनीकी सर्वे कराना चाहिए।
जिन क्षेत्रों में अधिक लोड, पुराने ट्रांसफार्मर या कमजोर वितरण व्यवस्था के कारण वोल्टेज की समस्या आ रही है, वहां ट्रांसफार्मर और वितरण प्रणाली को आवश्यकतानुसार अपग्रेड किया जाना चाहिए।
सोलर रूफटॉप सिस्टम की संख्या बढ़ने के साथ बिजली वितरण व्यवस्था को भी नई परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है।
केवल उपभोक्ताओं के घरों पर सोलर पैनल लगा देना पर्याप्त नहीं होगा।
ग्रिड को भी सौर ऊर्जा के बढ़ते एकीकरण के लिए तकनीकी रूप से सक्षम बनाना होगा।
फेज की समस्या भी बन सकती है लो वोल्टेज की वजह
कई क्षेत्रों में अलग-अलग फेज पर विद्युत लोड असंतुलित होने के कारण भी वोल्टेज की समस्या सामने आ सकती है।
ऐसे मामलों में बिजली विभाग द्वारा तकनीकी जांच और लोड बैलेंसिंग आवश्यक हो सकती है।
प्रमोद त्यागी ने कहा कि उपभोक्ताओं को स्वयं विद्युत व्यवस्था में हस्तक्षेप करने के बजाय बिजली विभाग के अधिकृत अधिकारियों के माध्यम से शिकायत का समाधान कराना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि सोलर उपभोक्ताओं की लो वोल्टेज संबंधी शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए।
इनवर्टर की सेटिंग से छेड़छाड़ करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूरी
सोलर सिस्टम में लो वोल्टेज की समस्या आने पर कई उपभोक्ता इनवर्टर की सेटिंग बदलवाने का प्रयास करते हैं।
कुछ आधुनिक इनवर्टर में निर्धारित तकनीकी और नियामकीय सीमाओं के भीतर सेटिंग कॉन्फिगर करने की सुविधा हो सकती है।
लेकिन विशेषज्ञों की सलाह के बिना इनवर्टर की सुरक्षा सीमा बदलना उचित नहीं माना जाता।
ऐसा करने से उपकरण की सुरक्षा, वारंटी और ग्रिड अनुपालन प्रभावित हो सकता है।
इसलिए किसी भी तकनीकी बदलाव के लिए अधिकृत सोलर इंस्टॉलर, इंजीनियर और संबंधित बिजली वितरण कंपनी के नियमों का पालन किया जाना चाहिए।
बार-बार बिजली कटौती वाले क्षेत्रों में हाइब्रिड सिस्टम बन सकता है विकल्प
प्रमोद त्यागी ने कहा कि जिन क्षेत्रों में बिजली कटौती और लो वोल्टेज की समस्या लगातार बनी रहती है, वहां उपभोक्ताओं को सोलर सिस्टम के विभिन्न विकल्पों की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए।
हाइब्रिड सोलर सिस्टम में बैटरी स्टोरेज की सुविधा होने से ग्रिड सप्लाई बाधित होने के दौरान कुछ आवश्यक विद्युत भार को बैकअप दिया जा सकता है।
हालांकि हाइब्रिड सिस्टम की लागत, तकनीकी आवश्यकताएं और रखरखाव सामान्य ग्रिड-टाई सिस्टम से अलग हो सकते हैं।
इसलिए उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकता, बजट और स्थानीय बिजली आपूर्ति की स्थिति को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।
‘राजस्व घटने के डर से योजना को धीमा करने की मानसिकता स्वीकार नहीं’
प्रमोद त्यागी ने आशंका व्यक्त की कि बिजली वितरण कंपनियों को सोलर उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने से अपने पारंपरिक बिजली राजस्व पर असर पड़ने की चिंता हो सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसी किसी सोच के कारण सोलर आवेदनों या प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी होती है तो यह सरकार की अक्षय ऊर्जा नीति के विपरीत होगा।
हालांकि विभागीय स्तर पर जानबूझकर प्रक्रियाएं धीमी किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
प्रमोद त्यागी ने मांग की कि सरकार सोलर आवेदनों, तकनीकी स्वीकृतियों और नेट मीटरिंग के औसत निस्तारण समय का सार्वजनिक डेटा जारी करे, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
भ्रष्टाचार और दलाली की शिकायतों पर हो सख्त कार्रवाई
प्रमोद त्यागी ने कहा कि यदि किसी भी क्षेत्र में सोलर प्रक्रिया को तेज कराने के नाम पर अवैध धन की मांग या दलाली की शिकायत सामने आती है तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सोलर योजना का उद्देश्य आम नागरिकों को आर्थिक राहत और स्वच्छ ऊर्जा का विकल्प उपलब्ध कराना है।
यदि उपभोक्ता को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ें या प्रक्रिया पूरी कराने के लिए अनुचित दबाव का सामना करना पड़े तो योजना की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
उन्होंने सरकार से सोलर योजना से संबंधित शिकायतों के लिए पारदर्शी ऑनलाइन ट्रैकिंग और समयबद्ध निस्तारण की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।
‘सरकारी सब्सिडी का वास्तविक लाभ उपभोक्ता तक पहुंचना जरूरी’
सरकार सोलर रूफटॉप सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर आर्थिक सहायता और सब्सिडी उपलब्ध करा रही है।
प्रमोद त्यागी ने कहा कि सार्वजनिक धन से दी जाने वाली सब्सिडी का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उपभोक्ता का सोलर सिस्टम प्रभावी ढंग से काम करे।
केवल सोलर सिस्टम स्थापित हो जाना योजना की सफलता का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
यह भी देखा जाना चाहिए कि सिस्टम कितनी बिजली उत्पन्न कर रहा है, उपभोक्ता को बिजली बिल में कितनी राहत मिल रही है और तकनीकी समस्याओं का कितने समय में समाधान किया जा रहा है।
सरकार के सोलर लक्ष्य पर भी पड़ सकता है कमजोर व्यवस्था का असर
भारत ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं।
घरों की छतों पर लगाए जाने वाले सोलर सिस्टम इन लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
लेकिन यदि उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज, बिजली कटौती, नेट मीटरिंग और विभागीय प्रक्रियाओं जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा तो नए उपभोक्ता भी सोलर सिस्टम अपनाने से हिचक सकते हैं।
प्रमोद त्यागी ने कहा कि किसी भी सरकारी योजना की सबसे प्रभावी प्रचार व्यवस्था संतुष्ट उपभोक्ता होता है।
यदि मौजूदा सोलर उपभोक्ता परेशान रहेगा तो इसका नकारात्मक संदेश दूसरे लोगों तक भी जाएगा।
‘15 दिन में पूरी हो आवेदन से नेट मीटर तक की प्रक्रिया’
विश्व हिंदू महासंघ भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने मांग की कि सोलर योजना के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि आवेदन से लेकर तकनीकी व्यवहार्यता, आवश्यक स्वीकृति, निरीक्षण और नेट मीटर लगाने तक की प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय सीमा निर्धारित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आदर्श रूप से पूरी प्रक्रिया अधिकतम 15 दिन के भीतर पूरी करने की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
यदि किसी अधिकारी या विभाग के स्तर पर बिना उचित कारण देरी होती है तो जवाबदेही तय करने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
नेट मीटर की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग
प्रमोद त्यागी ने कहा कि नेट मीटर की कमी या उपलब्धता में देरी के कारण उपभोक्ताओं का सोलर सिस्टम लंबे समय तक अपेक्षित उपयोग में नहीं आ पाता।
उन्होंने मांग की कि बिजली वितरण कंपनियां नेट मीटर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें।
यदि नियम अनुमति देते हों तो प्रमाणित और अनुमोदित विक्रेताओं से मीटर उपलब्ध कराने की पारदर्शी व्यवस्था पर भी विचार किया जा सकता है।
इससे उपभोक्ताओं को अनावश्यक प्रतीक्षा से राहत मिल सकती है।
हर महीने हो DISCOM के सोलर प्रदर्शन की समीक्षा
प्रमोद त्यागी ने केंद्र और राज्य सरकारों से बिजली वितरण कंपनियों के सोलर इंटीग्रेशन प्रदर्शन की नियमित समीक्षा करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कितने सोलर सिस्टम लगाए गए।
सरकार को यह भी समीक्षा करनी चाहिए कि कितने सिस्टम सफलतापूर्वक ग्रिड से जुड़े, कितने उपभोक्ताओं की नेट मीटरिंग लंबित है, कितनी लो वोल्टेज शिकायतें मिलीं और कितने मामलों का समय पर समाधान किया गया।
इस तरह के आंकड़ों की नियमित समीक्षा से अधिकारियों और बिजली वितरण कंपनियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।
‘सोलर क्रांति को बिजली विभाग की फाइलों में दम न तोड़ने दे सरकार’
प्रमोद त्यागी ने कहा कि भारत में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं।
देश में अधिकांश समय पर्याप्त धूप उपलब्ध होती है और बड़ी संख्या में घरों की छतों का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जा सकता है।
लेकिन इस क्षमता का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब बिजली वितरण प्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था भी उतनी ही मजबूत हो।
उन्होंने कहा कि सोलर क्रांति केवल घोषणाओं, सब्सिडी और आंकड़ों से सफल नहीं होगी।
उपभोक्ता को जमीनी स्तर पर बेहतर अनुभव देना होगा।
‘छत पर पैनल, जेब से EMI और फिर भी बिजली बिल- यह कैसी व्यवस्था?’
प्रमोद त्यागी ने सोलर उपभोक्ताओं की आर्थिक परेशानी का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि यदि किसी व्यक्ति ने ऋण लेकर सोलर प्लांट लगवाया, वह हर महीने ईएमआई चुका रहा है और इसके बावजूद बिजली विभाग की कमजोर व्यवस्था के कारण उसका बिजली बिल अपेक्षित रूप से कम नहीं हो रहा तो ऐसी योजना का लाभ आम आदमी तक कैसे पहुंचेगा?
उन्होंने कहा कि सरकार को सोलर उपभोक्ताओं की वास्तविक समस्याओं पर जमीनी स्तर पर सर्वे कराना चाहिए।
लो वोल्टेज, बार-बार ट्रिपिंग, नेट मीटरिंग में देरी और शिकायत निवारण से जुड़े आंकड़ों के आधार पर सुधार की ठोस योजना बनाई जानी चाहिए।
सरकार की मंशा पर नहीं, क्रियान्वयन की कमजोर कड़ी पर सवाल
प्रमोद त्यागी ने स्पष्ट किया कि उनका सवाल सरकार की अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने की मंशा पर नहीं, बल्कि योजना के जमीनी क्रियान्वयन में सामने आ रही समस्याओं पर है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देना भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
लेकिन किसी भी बड़ी योजना की सफलता उसके अंतिम उपभोक्ता के अनुभव से तय होती है।
यदि नागरिक लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी विभागीय और तकनीकी समस्याओं से परेशान है तो व्यवस्था में सुधार आवश्यक है।
बिजली विभाग जवाबदेह नहीं हुआ तो कैसे सफल होगी सोलर योजना?
विश्व हिंदू महासंघ भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा कि बिजली विभाग और वितरण कंपनियां सोलर रूफटॉप योजना की सफलता की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
ग्रिड की गुणवत्ता, पर्याप्त वोल्टेज, तकनीकी स्वीकृति, निरीक्षण, नेट मीटरिंग और शिकायत निवारण जैसी लगभग सभी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में बिजली विभाग की भूमिका होती है।
ऐसे में यदि इसी स्तर पर समस्याएं बनी रहेंगी तो उपभोक्ता को योजना का पूरा लाभ नहीं मिल सकेगा।
उन्होंने सरकार से बिजली विभागों की जवाबदेही तय करने और सोलर उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए ठोस व्यवस्था बनाने की मांग की।

