Ghaziabad में 7 साल की मासूम से हैवानियत के बाद कत्ल: सिर पर लोहे का पाइप मारकर लिफ्ट शाफ्ट में फेंका शव, आरोपी आधार कार्ड दिखाकर करता रहा गुमराह
News-Desk
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पुलिस का दावा है कि आरोपियों को जानकारी थी कि शाफ्ट के नीचे स्थित बेसमेंट के तीसरे तल पर पानी भरा हुआ है और उन्हें उम्मीद थी कि शव पानी में डूब जाने से वारदात का खुलासा देर से होगा। हालांकि बच्ची की तलाश कर रहे परिजनों, स्थानीय मजदूरों और पुलिस की कार्रवाई के बाद रात में उसका शव बरामद कर लिया गया।
इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने आरोपी विनय और शहाबुद्दीन को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक साक्ष्य, डीएनए नमूने, खून से सने कपड़े, कथित हत्या में प्रयुक्त लोहे के पाइप और घटनास्थल से मिले अन्य सबूतों के आधार पर मजबूत चार्जशीट तैयार करने में जुटी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने के लिए भी अपील की जाएगी और एक सप्ताह के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी की जा रही है।
पुलिस जांच में नया खुलासा, बच्ची के चीखने पर पाइप से वार का आरोप
गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित निर्माणाधीन मॉल में हुई इस भयावह वारदात की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए तथ्य सामने आ रहे हैं।
पुलिस जांच के अनुसार, घटना के दौरान बच्ची के चीखने और विरोध करने पर गेट के पास मौजूद आरोपी विनय ने कथित तौर पर पास में पड़ा लोहे का पाइप उठा लिया और उसके सिर पर जोरदार वार कर दिया।
पुलिस का कहना है कि पाइप के वार से बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर वारदात छिपाने के उद्देश्य से उसे लिफ्ट शाफ्ट से नीचे फेंक दिया।
घटना की परिस्थितियों और आरोपियों की भूमिका की पुष्टि के लिए पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों का सहारा ले रही है। घटनास्थल से मिले नमूनों और बरामद वस्तुओं को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
लिफ्ट शाफ्ट से बेसमेंट में फेंक दिया मासूम का शव
पुलिस जांच में सामने आया है कि बच्ची को जिस स्थान से नीचे फेंका गया, वह निर्माणाधीन इमारत में लिफ्ट लगाने के लिए छोड़ा गया खाली शाफ्ट था।
आरोप है कि लोहे के पाइप से सिर पर वार करने के बाद विनय और शहाबुद्दीन ने अचेत बच्ची को इसी खाली जगह से नीचे फेंक दिया।
इमारत में चार तल जमीन से ऊपर और तीन तल जमीन के नीचे बनाए जा रहे हैं। बच्ची का शव सबसे निचले तल यानी बेसमेंट-3 में बरामद किया गया।
पुलिस के अनुसार आरोपियों को मालूम था कि सबसे निचले बेसमेंट में पानी जमा है। उन्हें कथित तौर पर उम्मीद थी कि शव पानी में डूब जाएगा और घटना का पता जल्दी नहीं चल सकेगा।
लेकिन बच्ची की तलाश में जुटे परिजन और अन्य मजदूर निर्माणाधीन मॉल तक पहुंच गए और कई घंटे की तलाश के बाद उसका शव बरामद किया गया।
आधार कार्ड दिखाकर उम्र को लेकर गुमराह करने का आरोप
मामले में आरोपी विनय को लेकर भी पुलिस जांच में एक नया तथ्य सामने आया है।
डीसीपी धवल जायसवाल के अनुसार, वारदात के बाद विनय अपनी झुग्गी में पहुंचा और कथित तौर पर भागने की तैयारी में आधार कार्ड और कुछ रुपये अपने पास रख लिए।
इसी दौरान बच्ची के परिजनों और स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया।
पुलिस के सामने विनय ने अपना आधार कार्ड प्रस्तुत किया, जिसमें जन्म वर्ष 2008 दर्ज बताया गया। इसके आधार पर शुरुआत में उसे नाबालिग मानते हुए मेडिकल परीक्षण कराया गया।
पुलिस का कहना है कि मेडिकल जांच में वह बालिग पाया गया।
पुलिस के अनुसार विनय सातवीं कक्षा तक पढ़ा है। जांच में सामने आए इस तथ्य के बाद उसकी उम्र से जुड़े दस्तावेजों और मेडिकल रिपोर्ट को भी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा रहा है।
मेडिकल जांच में नशे में होने की पुष्टि नहीं
निर्माणाधीन मॉल में बीयर की खाली केन और गिलास मिलने के बाद आरोपियों के नशे में होने को लेकर भी सवाल उठे थे।
हालांकि पुलिस के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट में दोनों आरोपियों के नशे में होने की पुष्टि नहीं हुई है।
इस मामले में पुलिस घटनास्थल से मिले प्रत्येक साक्ष्य को जांच के दायरे में ले रही है, ताकि वारदात से जुड़े घटनाक्रम की सटीक कड़ी तैयार की जा सके।
पुलिस का प्रयास है कि फॉरेंसिक और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत के समक्ष मजबूत मामला पेश किया जाए।
खून से सने कपड़े, पाइप, चप्पल और बाल फॉरेंसिक लैब भेजे
गाजियाबाद पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में घटनास्थल और आरोपियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं।
पुलिस ने बच्ची और दोनों आरोपियों के खून से सने कपड़े, घटनास्थल से बरामद लोहे का पाइप, बच्ची की चप्पल, टूटे हुए बाल और अन्य नमूने फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे हैं।
दोनों आरोपियों के डीएनए सैंपल भी लिए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि डीएनए रिपोर्ट और अन्य फॉरेंसिक जांच इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित कर जांच के लिए भेजा गया है, ताकि अदालत में उनकी उपयोगिता सुनिश्चित की जा सके।
तीसरी मंजिल के कमरे की दीवारों पर मिले खून के छींटे
निर्माणाधीन मॉल के तीसरे तल पर स्थित जिस कमरे में बच्ची के साथ कथित वारदात हुई, वहां पुलिस को कई स्थानों पर खून के छींटे मिले हैं।
पुलिस जांच में इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आशंका जताई गई है कि बच्ची ने आरोपियों का विरोध किया होगा और इसी दौरान उसके साथ मारपीट की गई।
कमरे से कुछ दूरी पर लिफ्ट के लिए छोड़ी गई खाली जगह मौजूद थी, जहां लोहे के सरिये भी निकले हुए बताए गए हैं।
पुलिस का आरोप है कि बच्ची के सिर पर पाइप से वार करने के बाद उसे इसी स्थान से नीचे फेंका गया और उसका शव बेसमेंट के तीसरे तल पर मिला।
एक सप्ताह में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी
गाजियाबाद पुलिस इस मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ा रही है।
डीसीपी धवल जायसवाल के अनुसार, पुलिस ने घटना से जुड़े लगभग सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटा लिए हैं।
इनमें सीसीटीवी फुटेज, दुकानदारों और स्थानीय लोगों के बयान, खून से सने कपड़े, कथित हत्या में प्रयुक्त लोहे का पाइप, बच्ची की चप्पल और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्य शामिल हैं।
पुलिस एक सप्ताह के भीतर मामले में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जोड़कर आरोपियों के खिलाफ मजबूत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराने की तैयारी
सात वर्षीय बच्ची के साथ हुई इस घटना को देखते हुए पुलिस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने के लिए अपील करने की तैयारी में है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट, डीएनए जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों को चार्जशीट का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा सकता है।
मामले में आरोपों की अंतिम न्यायिक पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगी।
सुरक्षाकर्मी ने बनाया वीडियो, सोशल मीडिया पर हुआ वायरल
वारदात के बाद आरोपी कथित तौर पर अपनी-अपनी झुग्गियों में लौट गए थे।
इसी दौरान बच्ची की तलाश कर रहे परिजनों और स्थानीय लोगों को उन पर संदेह हुआ और दोनों को पकड़ लिया गया।
बताया गया है कि कई लोगों ने आरोपियों को घटना से पहले बच्ची को चिप्स और कोल्ड ड्रिंक दिलाकर अपने साथ ले जाते देखा था।
हंगामे की जानकारी मिलने पर एक सुरक्षाकर्मी भी मौके पर पहुंचा।
सुरक्षाकर्मी ने वहां का एक वीडियो बनाया, जिसमें दोनों आरोपी लोगों से घिरे दिखाई दे रहे हैं।
बताया गया है कि यह वीडियो कंपनी के एक ग्रुप और परिचितों के बीच साझा किया गया, जिसके बाद तेजी से वायरल हो गया।
शाम साढ़े सात बजे अचानक लापता हुई थी सात वर्षीय बच्ची
कार्यवाहक एसीपी नंदग्राम प्रियाश्री पाल के अनुसार, बिहार के नालंदा जिले का एक परिवार गाजियाबाद में झुग्गी में रहकर मजदूरी करता है।
इन दिनों परिवार झुग्गी से कुछ दूरी पर राजनगर एक्सटेंशन स्थित निर्माणाधीन मॉल में काम कर रहा था।
बताया गया है कि शुक्रवार शाम करीब साढ़े सात बजे परिवार की सात वर्षीय बेटी अचानक लापता हो गई।
परिजनों ने आसपास उसकी तलाश शुरू की, लेकिन करीब दो घंटे तक खोजने के बावजूद बच्ची का कोई पता नहीं चला।
इसके बाद मामले की जानकारी नंदग्राम थाने को दी गई।
रात साढ़े 12 बजे बेसमेंट-3 में मिला खून से लथपथ शव
बच्ची की तलाश में उसके परिजन और अन्य मजदूर निर्माणाधीन मॉल पहुंचे।
कई घंटे की खोजबीन के बाद रात करीब साढ़े 12 बजे बेसमेंट के तीसरे तल पर सीढ़ियों के पास बच्ची का खून से लथपथ शव बरामद हुआ।
बच्ची का शव मिलने के बाद मौके पर हड़कंप मच गया।
परिजनों ने चार युवकों पर अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगाया।
सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे घटनास्थल को जांच के दायरे में लिया।
इसके बाद आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की गई।
सीसीटीवी फुटेज में बच्ची को साथ ले जाते दिखाई दिए दो युवक
पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आई।
फुटेज में झुग्गी में रहने वाले दो युवक बच्ची को अपने साथ ले जाते दिखाई दिए।
बताया गया कि बच्ची के हाथ में चिप्स का पैकेट था, जबकि युवकों के हाथों में शराब और कोल्ड ड्रिंक दिखाई दी।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दो आरोपियों की पहचान की।
इनमें एक आरोपी बिहार के अररिया का रहने वाला शहाबुद्दीन बताया गया है, जबकि दूसरे आरोपी की पहचान विनय के रूप में हुई।
पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।
चिप्स और कोल्ड ड्रिंक का लालच देकर ले जाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों पर बच्ची को चिप्स और कोल्ड ड्रिंक का लालच देकर निर्माणाधीन मॉल के अंदर ले जाने का आरोप है।
इसके बाद तीसरी मंजिल पर बच्ची के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
पुलिस का आरोप है कि बच्ची के चीखने और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई तथा बाद में लोहे के पाइप से सिर पर वार किया गया।
वारदात का खुलासा होने के डर से आरोपियों ने कथित तौर पर बच्ची को लिफ्ट शाफ्ट से नीचे फेंक दिया।
पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम को सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के माध्यम से जोड़ने में जुटी है।
वारदात के बाद अपनी झुग्गियों में लौट गए थे आरोपी
पुलिस के अनुसार, वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी घटनास्थल से निकलकर अपनी झुग्गियों में लौट गए।
बच्ची के गायब होने के बाद परिवार के लोग लगातार उसकी तलाश कर रहे थे।
इस दौरान आरोपियों पर संदेह हुआ और स्थानीय लोगों तथा परिजनों ने उन्हें पकड़ लिया।
इसके बाद पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों की भूमिका सामने आने का दावा किया गया।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
निर्माणाधीन मॉल में सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल
सात वर्षीय बच्ची के साथ हुई इस भयावह घटना के बाद निर्माणाधीन मॉल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
परिसर में काम करने वाले मजदूरों ने आरोप लगाया है कि रात में काम बंद होने के बाद असामाजिक तत्व मॉल परिसर में प्रवेश करते हैं।
मजदूरों का कहना है कि निर्माणाधीन परिसर के कई हिस्सों में बीयर की खाली केन और गिलास पड़े मिले हैं।
आरोप है कि रात के समय परिसर में लोग शराब पीते हैं और यह सब कथित तौर पर सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद होता है।
इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और पुष्टि आवश्यक है, लेकिन घटना के बाद निर्माणाधीन परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जरूर सामने आई है।
शिकायत करने से डरते थे मजदूर, नौकरी जाने का था खौफ
निर्माणाधीन मॉल में काम करने वाले कुछ मजदूरों ने आरोप लगाया कि वे परिसर में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत करने से डरते थे।
उनका कहना है कि शिकायत करने पर उन्हें ठेकेदार द्वारा काम से हटाए जाने का डर रहता था।
मजदूरों के अनुसार इसी मजबूरी के कारण कई लोग संदिग्ध गतिविधियां देखने के बावजूद चुप रहने को मजबूर थे।
यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह निर्माण स्थलों पर श्रमिक सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला बन सकता है।
सवाल यह भी है कि इतने बड़े निर्माणाधीन परिसर में अनधिकृत लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए क्या व्यवस्था थी और रात के समय सुरक्षा निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी।
चार तल ऊपर, तीन बेसमेंट नीचे; सबसे निचले हिस्से में मिला शव
जिस निर्माणाधीन मॉल में घटना हुई, वहां चार तल भूमि से ऊपर और तीन तल भूमि के नीचे बनाए जा रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, बच्ची को लिफ्ट के खाली शाफ्ट से नीचे फेंका गया और उसका शव सबसे निचले बेसमेंट में मिला।
इस तरह बच्ची का शव लगभग छह मंजिल नीचे जाकर गिरा।
मामले की जांच के दौरान पुलिस घटनास्थल की संरचना, लिफ्ट शाफ्ट और शव मिलने वाले स्थान का भी बारीकी से परीक्षण कर रही है।
फॉरेंसिक टीम द्वारा घटनास्थल से नमूने जुटाए गए हैं, जिन्हें वैज्ञानिक जांच के लिए भेजा गया है।
डीएनए रिपोर्ट बन सकती है जांच की महत्वपूर्ण कड़ी
पुलिस द्वारा दोनों आरोपियों के डीएनए सैंपल लिए जाने के बाद अब फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
ऐसे मामलों में डीएनए और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य जांच की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं।
पुलिस ने घटनास्थल से मिले बाल, खून के नमूने, कपड़े और अन्य वस्तुओं को भी फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है।
जांच एजेंसियां इन साक्ष्यों के माध्यम से आरोपियों और घटनास्थल के बीच वैज्ञानिक संबंध स्थापित करने का प्रयास करेंगी।
सात साल की बच्ची की मौत से इलाके में आक्रोश
सात वर्षीय बच्ची के साथ हुई इस घटना के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
एक मासूम बच्ची को कथित तौर पर लालच देकर अपने साथ ले जाने, उसके साथ गंभीर अपराध करने और फिर उसकी हत्या के आरोपों ने लोगों को झकझोर दिया है।
स्थानीय लोग मामले में आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और जल्द न्याय की मांग कर रहे हैं।
पुलिस ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेजी से पूरी करने और चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी शुरू कर दी है।
फॉरेंसिक साक्ष्य से लेकर सीसीटीवी तक, मजबूत केस बनाने में जुटी पुलिस
गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि इस मामले में लगभग सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र कर लिए गए हैं।
सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्ष और परिस्थितिजन्य गवाहों के बयान, घटनास्थल से बरामद लोहे का पाइप, खून से सने कपड़े, बच्ची की चप्पल, टूटे बाल और डीएनए नमूने जांच का हिस्सा हैं।
पुलिस इन सभी साक्ष्यों को वैज्ञानिक रिपोर्ट के साथ जोड़कर चार्जशीट तैयार कर रही है।
अधिकारियों का प्रयास है कि मामले की जांच में किसी महत्वपूर्ण पहलू की अनदेखी न हो और अदालत के समक्ष उपलब्ध साक्ष्यों को व्यवस्थित तरीके से पेश किया जा सके।
मासूमों की सुरक्षा से लेकर निर्माण स्थलों की निगरानी तक खड़े हुए बड़े सवाल
गाजियाबाद की इस घटना ने केवल एक आपराधिक वारदात को ही सामने नहीं रखा, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, निर्माण स्थलों की निगरानी, श्रमिक बस्तियों में सुरक्षा व्यवस्था और निजी परिसरों की जवाबदेही को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निर्माणाधीन इमारतों में कई ऐसे हिस्से होते हैं, जहां आम लोगों का प्रवेश बेहद खतरनाक हो सकता है।
ऐसे परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और अनधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था होना आवश्यक है।
घटना के बाद अब यह जांच का विषय है कि निर्माणाधीन मॉल में सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी थी और यदि मजदूरों द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं तो संदिग्ध गतिविधियों को पहले क्यों नहीं रोका गया।
फास्ट ट्रैक सुनवाई और जल्द चार्जशीट की तैयारी से न्याय की उम्मीद
पुलिस द्वारा एक सप्ताह में चार्जशीट दाखिल करने और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की अपील की तैयारी को पीड़ित परिवार के लिए जल्द न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हालांकि अंतिम निर्णय अदालत द्वारा साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।
मामले में आरोपियों पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं और पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच को अंतिम रूप देने में जुटी है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट और डीएनए जांच के परिणाम भी मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

