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गन्ने की बंपर पैदावार ने विभाग का गणित बिगाड़ा-उत्पादन के मुकाबले पर्चियां कम

मुजफ्फरनगर। गन्ने की बंपर पैदावार ने गन्ना विभाग के सभी गणित बिगाड़ दिए हैं। 40 प्रतिशत किसान अतिरिक्त सट्टे की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उत्पादन के मुकाबले पर्चियां कम हैं। गन्ना विभाग ने डिमांड के बाद 88150 किसानों का 62.87 लाख क्विंटल गन्ने का अतिरिक्त सट्टा लगा दिया है। इसके बाद भी किसानों की मांग पूरी नहीं हो पा रही है।

उत्पादन की स्थिति को देखते हुए इस बार चीनी मिलों में गन्ना पेराई मई माह तक होने की संभावना है।गन्ने की अनुमानित पैदावार को लेकर प्रतिवर्ष गन्ना सट्टा लगाया जाता है। चीनी मिलों को गन्ना और किसान को पर्चियां तय की जाती है।

इस बार विभाग ने अनुमानित उत्पादन के हिसाब से जो गन्ना सट्टा तय किया, इसमें विभाग के आंकड़े फेल हो गए हैं। अनुमान से कहीं ज्यादा गन्ने की पैदावार हो रही हैं। लगभग एक लाख किसानों ने अतिरिक्त पर्चियों की मांग की है।

इसे देखते हुए विभाग ने 88150 किसानों को अतिरिक्त पर्ची देते हुए 62 लाख 87 हजार क्विंटल गन्ने का अतिरिक्त सट्टा लगाया है। इस प्रक्रिया के बाद भी हजारों की संख्या में किसान ऐसे हैं, जो कि पर्चियां कम बताते हुए अतिरिक्त सट्टे की मांग कर रहे हैं। गन्ने की पैदावार को देखते हुए इस बार चीनी मिलो में पेराई मई माह तक हो सकती है।
                   चीनी मिल अतिरिक्त सट्टा किसान
खतौली 10.19 लाख 21731
तितावी 12.31 लाख 19725
भैंसाना 17.17 लाख 13441
मंसूरपुर 7.07 लाख 7429
टिकौला 4.97 लाख 16244
खाईखेड़ी 8.78 लाख 7059
रोहाना 2.38 लाख 2521
योग 62.87 लाख क्विंटल 88150

गत वर्ष के मुकाबले अधिक भुगतान-चीनी मिलों ने इस वर्ष भुगतान की गति बीते साल से अच्छी रखी है। बीते साल 15 फरवरी तक केवल 798 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था, इस वर्ष इस सत्र का अब तक 1015 करोड़ रुपये का भुगतान हो गया है।

चीनी मिलों ने अब तक 521 लाख 33 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई की है।किसानों को सीधे लाभ हुआ-जिला गन्ना अधिकारी डॉ आरडी द्विवेदी का कहना है कि जो अतिरिक्त सट्टा बढ़ाया गया है, इसका किसानों को सीधे लाभ हुआ है।

किसानों के कैलेंडर में अपने आप पर्ची बढ़ गई है। गन्ना विभाग के साफ्टेवयर के माध्यम से पूरी प्रक्रिया हुई है। इस बार मध्यम और छोटे किसानों को अधिक लाभ हुआ है। इस व्यवस्था के बाद जिन किसानों के पास अतिरिक्त गन्ना है, शासन को उनकी रिपोर्ट भेजकर एग्रीमेंट की व्यवस्था कराई जाएगी। उत्पादन को देखते हुए इस बार चीनी मिले मई तक चल सकती हैं।

News-Desk

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