फिल्मी चक्कर

महाकाल की आज्ञा से बनी ‘Ujjain’: तेलुगु निर्माता जे. मोहन कांत की नई फिल्म में इतिहास, आस्था और आधुनिक सोच का टकराव

Ujjain Telugu film को लेकर तेलुगु सिनेमा में खासा उत्साह है। ‘RX100’ से चर्चित अभिनेता को लॉन्च करने वाले और संपूर्णेश बाबू जैसे कलाकारों को मौका देने वाले निर्माता-निर्देशक जे. मोहन कांत इन दिनों अपनी नई फिल्म उज्जैन को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उनकी दो फिल्मों गन्स एंड गैंग्स और मिशन 007 की शूटिंग पूरी हुई है और अब उनका अगला फोकस पूरी तरह ‘उज्जैन’ पर है। जे. मोहन कांत ने बताया कि आखिर उज्जैन शहर ही क्यों चुना गया, फिल्म की कहानी क्या है और वे इतिहास, माइथोलॉजी और मॉडर्न सिनेमा को किस तरह जोड़ने जा रहे हैं।


🔶 ‘उज्जैन’ बनाने का विचार कैसे आया?

जे. मोहन कांत बताते हैं कि उनकी पिछली फिल्म ‘मिशन 007’ भारत-पाकिस्तान के विषय पर आधारित थी। इसके बाद उन्होंने फीमेल सेंट्रिक फिल्म ‘गन्स एंड गैंग्स’ बनाई। लेकिन इसके बाद उनके मन में कुछ अलग और गहरा करने का विचार आया।

वे कहते हैं,
“मैं महाकालेश्वर मंदिर का बहुत बड़ा भक्त हूं। मैं अपने बच्चों के साथ दो-तीन बार उज्जैन गया हूं। हर बार वहां जाकर मुझे महसूस हुआ कि दक्षिण भारत, खासकर तेलुगु और तमिल दर्शकों को महाकालेश्वर, काल भैरव मंदिर और गणेश जी के प्राचीन मंदिरों के बारे में बहुत कम जानकारी है।”

यहीं से ‘उज्जैन’ की नींव पड़ी। उनके मुताबिक, यह फिल्म महज कहानी नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक सेतु होगी, जो उत्तर और दक्षिण भारत को आस्था और इतिहास के माध्यम से जोड़ने का प्रयास करेगी।


🔶 महाकाल की प्रेरणा और फिल्म का उद्देश्य

निर्देशक का कहना है कि यह फिल्म उन्होंने किसी ट्रेंड को देखकर नहीं, बल्कि आस्था और जिम्मेदारी की भावना से बनाई है।
“मैं मानता हूं कि यह महाकाल की आज्ञा थी। मैंने सोचा कि क्यों न सिनेमा के माध्यम से महाकालेश्वर मंदिर, काल भैरव और ओंकारेश्वर जैसे स्थानों के इतिहास को लोगों तक पहुंचाया जाए।”

‘उज्जैन’ को तेलुगु, तमिल और मलयालम—तीन भाषाओं में रिलीज करने की योजना है, ताकि दक्षिण भारत के दर्शक भी इन ऐतिहासिक स्थलों से जुड़ सकें।


🔶 फिल्म का कॉन्सेप्ट: मॉडर्न सोच बनाम आस्था

‘उज्जैन’ पूरी तरह मॉडर्न कहानी है, लेकिन इसमें माइथोलॉजी के गहरे तत्व पिरोए गए हैं। कहानी एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो भगवान में विश्वास नहीं करता और हर चीज को तर्क की कसौटी पर परखता है।

जे. मोहन कांत बताते हैं,
“यह किरदार हर बात पर सवाल उठाता है। उसके तर्क कई लोगों को असहज करते हैं। लेकिन परिस्थितियां उसे महाकालेश्वर तक ले जाती हैं। वहां एक प्राचीन शिव मंदिर से जुड़ा पुरातत्व विभाग का मामला सामने आता है और उसी यात्रा में उसके सारे सवालों के जवाब मिलने लगते हैं।”


🔶 मुगल काल और मंदिरों का इतिहास भी होगा शामिल

फिल्म में यह भी दिखाया जाएगा कि कैसे दिल्ली से आए मुगल सुल्तानों ने उज्जैन के मंदिरों को तोड़ने की कोशिश की थी।
निर्देशक के अनुसार,
“इतिहास गवाह है कि शिवलिंग और मूर्तियों को तोड़ा गया, फेंका गया, लेकिन आस्था को खत्म नहीं किया जा सका। कई राजाओं ने बाद में मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया। जो महाकालेश्वर मंदिर आज हम देखते हैं, वह पहले से भी ज्यादा भव्य था।”

यह ऐतिहासिक परतें फिल्म को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि ज्ञान और चेतना का माध्यम बनाएंगी।


🔶 रिसर्च और ऐतिहासिक आधार

‘उज्जैन’ के लिए व्यापक रिसर्च की गई है। रिसर्च का फोकस मंदिरों के विध्वंस, पुनर्निर्माण और आसपास के धार्मिक स्थलों के इतिहास पर रहा है।
निर्देशक कहते हैं कि आसपास के कई मंदिरों और उनके ऐतिहासिक संदर्भों को भी कहानी में पिरोया गया है, ताकि दर्शकों को एक समग्र दृष्टि मिल सके।


🔶 कास्टिंग: नए कलाकारों को मौका

फिल्म का टाइटल ‘उज्जैन’ आधिकारिक तौर पर रजिस्टर हो चुका है। टाइटल रोल का नाम फिल्म में काल भैरव होगा।
जे. मोहन कांत स्पष्ट करते हैं कि इस फिल्म में कोई बड़ा स्टार नहीं होगा।
“हम नए कलाकारों को मौका देना चाहते हैं। चार कलाकार और टेक्नीशियन हैदराबाद से आएंगे, बाकी कास्ट भोपाल में स्क्रीन टेस्ट के जरिए चुनी जाएगी।”

मुख्य किरदारों में पुरातत्व विभाग के दो अधिकारी, दो पुलिस इंस्पेक्टर, एक कॉन्स्टेबल और महाकाल नाम का एक अहम किरदार शामिल होगा।


🔶 शूटिंग लोकेशन और मध्य प्रदेश से जुड़ाव

निर्देशक इंदौर पहुंचकर वहां से उज्जैन जाएंगे, जहां महाकालेश्वर मंदिर और उसके आसपास शूटिंग होगी।
वे बताते हैं कि उनकी पिछली तीनों फिल्मों में 90% कलाकार मध्य प्रदेश के स्थानीय टैलेंट रहे हैं। ‘मिशन 007’ और ‘गन्स एंड गैंग्स’ में भी यही मॉडल अपनाया गया था।


🔶 इतिहास से खास लगाव

जे. मोहन कांत को इतिहास से गहरा प्रेम है।
“बचपन में इतिहास में ही मेरे सबसे ज्यादा मार्क्स आते थे। अगर कोई ऐतिहासिक बात बताता है, तो वह मुझे लंबे समय तक याद रहती है। शायद यही वजह है कि अब मैं इतिहास और सिनेमा को जोड़ पा रहा हूं।”


🔶 ट्रेंड नहीं, अपनी सोच पर फिल्में

साउथ सिनेमा में माइथोलॉजी और फ्यूचर या मॉडर्न एरा के कॉम्बिनेशन पर वे कहते हैं,
“मैं किसी ट्रेंड को फॉलो नहीं करता। जो मेरे मन में आता है, वही बनाता हूं। पहले देशभक्ति, फिर महिला केंद्रित कहानी और अब इतिहास व पौराणिकता से जुड़ी ‘उज्जैन’।”

उन्होंने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने फिल्म को सहयोग देने और रिलीज के बाद सब्सिडी देने का प्रस्ताव भी दिया है।


‘उज्जैन’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और आधुनिक सोच के बीच संवाद की कोशिश है। जे. मोहन कांत की यह परियोजना दक्षिण भारतीय दर्शकों को महाकालेश्वर और उज्जैन के गौरवशाली अतीत से जोड़ने का साहसिक प्रयास मानी जा रही है, जो सिनेमा को मनोरंजन से आगे एक सांस्कृतिक अनुभव में बदल सकती है।

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