उत्तर प्रदेश

Gayatri Prasad Prajapati पर दुष्कर्म का केस कराने वाली महिला को फर्जीवाड़े मामले में बेल

उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री Gayatri Prasad Prajapati  के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज कराने वाली चित्रकूट की महिला को फर्जीवाड़े मामले में मंगलवार को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से जमानत मिल गई।

स्थानीय गोमती नगर विस्तार थाने में जालसाजी व फर्जीवाड़े के वर्ष 2020 में दर्ज कराए गए मामले में आरोपी महिला की पहली जमानत अर्जी पिछले साल कोर्ट ने खारिज कर दी थी। इसके बाद आरोपी ने यह दूसरी जमानत अर्जी दाखिल की थी। इस फर्जीवाड़े के आरोपों वाले मामले में प्रजापति भी सह अभियुक्त हैं।

न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने यह आदेश आरोपी महिला की दूसरी जमानत अर्जी पर दिया। आरोपी महिला की अधिवक्ता सुनीति सचान का कहना था कि मामले में अभी तक आरोप ही निर्धारित नहीं हुए हैं और महिला 10 सितंबर 2022 से जेल में है। 

मामले में अभियोजन को 22 गवाहों का परीक्षण करना है। इसका ट्रायल पूरा होने में काफी समय लगेगा। मामले में आरोपी महिला के बेगुनाह होने की भी दलील दी। उधर, सरकारी वकील ने जमानत अर्जी का विरोध किया। इस पर कोर्ट ने आरोपी महिला की दूसरी जमानत अर्जी को शर्तों के साथ मंजूर किया।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री Gayatri Prasad Prajapati   के खिलाफ दुष्कर्म का मामला एक और मोड़ ले चुका है। चित्रकूट की महिला जिसने इस मामले में उन्हें दर्ज कराने के लिए कोर्ट गई थी, उसे हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से जमानत मिल गई है। इस मामले में जमानत की मांग करने वाली महिला पर फर्जीवाड़े का आरोप लगाया गया था। यह मामला स्थानीय गोमती नगर विस्तार थाने में जालसाजी और फर्जीवाड़े के वर्ष 2020 में दर्ज कराए गए थे।

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति के ऊपर ही नहीं, बल्कि हमारे समाज की मोरालिटी और इंसानियत के सवालों पर भी सवाल उठाता है। यह एक सामाजिक मुद्दा है जिसे हमें सख्ती से संज्ञान में लेना चाहिए। दुष्कर्म जैसे अपराधों के बढ़ते मामले समाज की स्थिति को दिखाते हैं जो हमें यह याद दिलाते हैं कि हमें अपने समाज में सुधार की जरुरत है।

इस मामले में न्यायमूर्ति की यह फैसला भी समाज के लिए महत्वपूर्ण संकेत है कि कोर्ट ने फर्जीवाड़े के आरोपों में उलझी महिला को जमानत देने का निर्णय लिया है। यह हमें यह दिखाता है कि न्यायपालिका सकारात्मक कदम उठा रही है जिससे लोगों में भरोसा बना रहेगा।

इस संदर्भ में, हमें समाज में उचित मोरल वैल्यूज और न्याय की प्रेरणा को बढ़ावा देने की जरुरत है। अपराध के खिलाफ लड़ाई में समाज को साथ लेकर चलना होगा। यह मामला हमें सिखाता है कि हमें समाज की मोराल फाउंडेशन को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयास करने की जरुरत है ताकि हमारी समाज में इंसानियत और न्याय का प्राथमिकता मिल सके।

News-Desk

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