संपादकीय विशेष

Muzaffarnagar: रावण व उसका कुनबा तैयार, दो स्थानों पर लगेगा दशहरा मेला

मुजफ्फरनगरMuzaffarnagar   दशहरा १५ अक्टूबर को है। शहर में सिर्फ दो स्थानों केवलपुरी के रामलीला मैदान व पटेलनगर नई मंडी के रामलीला मैदान में दशहरा मेला लगेगा। रावण व उसके कुनबे के पुतले तैयार किए जा रहे हैं। इन मैदानों पर ही पुतले दहन किए जाएंगे।

शहर में टाउनहाल, गांधी कालोनी, पटेलनगर, नई मंडी थाने के पास, केवलपुरी, दक्षिणी कृष्णापुरी, शाकुंतलम कालोनी में रामलीलाओं का मंचन होता आया है। कोरोना महामारी के चलते पिछले साल सिर्फ पटेलनगर नई मंडी में रामलीला मंचन हो सका था। इस बार दो रामलीलाओं में भगवान श्रीराम की लीलाओं का मंचन हो रहा है। इनमें से पटेलनगर नई मंडी में बड़े स्तर पर रामलीला चल रही है, जबकि टाउनहाल की रामलीला में मंचन प्रतीकात्मक एवं सूक्ष्म हो रहा है।

पटेलनगर नई मंडी व केवलपुरी की रामलीला मैदान में दहशरा मेले का आयोजन होगा। रावण व उसके कुनबे के पुतलों का दहन किया जाएगा। पुतले निर्माण व उनके दहन की बनाने की तैयारी जोरों पर चल रही है। रावण, कुंभकरण व मेघनाद के पुतले तैयार किए जा रहे हैं। रावण व उसके कुनबे के पुतले बनाने वाला एक परिवार वह भी मुस्लिम है।

पहले तो उनकी रोजी-रोटी सिर्फ इसी कार्य से चलती थी, लेकिन अब उन्होंने साइड में दूसरे कार्य शुरू कर लिए हैं। शहर के निकटवर्ती वहलना गांव निवासी फिरोज अली का परिवार रावण के पुतले बनाकर अपने पुरखों की परंपरा को निभा रहा है। फिरोज अली के बेटे हुसैन मियां का कहना है कि उनकी मोती महल में दुकान है।

वहीं पर रहकर उन्हें रावण के पुतले बनाने के आर्डर मिलते थे। २१ साल पहले पापा की मौत के बाद उनकी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए हम तीन भाई अली मियां, हसन मियां व हुसैन मियां रावण के पुतले बनाने का काम कर रहे हैं। कोरोना महामारी के चलते दो साल से यह काम लगभग बंद है। पिछले साल तो कोई भी आर्डर उन्हें नहीं मिला।

इस साल तीन आर्डर रोहाना, पटेलनगर व रामपुरी की रामलीला के उन्हें मिले हैं। महंगाई के चलते पुतले बनाने के काम में उन्हें कुछ नहीं बच रहा है। सिर्फ वह पुरखों की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। जो पुतले वह बनाते हैं, उनकी कम से कम लागत २१ हजार से शुरू होती है।

पहले उन्हें बाहरी जिलों व प्रांतों से भी पुतले बनाने के आर्डर मिलते थे, कोरोना के चलते अब नहीं मिल रहे हैं। गली-मोहल्लों में बच्चे भी चंदा एकत्र कर रावण के पुतले दहन करते हैं। छोटे-छोटे बच्चे आपस में पैसे एकत्र कर सामान खरीद कर घर पर ही रावण के पुतले बना लेते हैं। इसके बाद उन्हें दहन करते हैं। बाजार में रावण के पुतले नहीं बिक रहे हैं।

Dr. S.K. Agarwal

डॉ. एस.के. अग्रवाल न्यूज नेटवर्क के मैनेजिंग एडिटर हैं। वह मीडिया योजना, समाचार प्रचार और समन्वय सहित समग्र प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। उन्हें मीडिया, पत्रकारिता और इवेंट-मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में लगभग 3.5 दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव है। वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों, चैनलों और पत्रिकाओं से जुड़े हुए हैं। संपर्क ई.मेल- [email protected]

Dr. S.K. Agarwal has 407 posts and counting. See all posts by Dr. S.K. Agarwal

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

fifteen − six =