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प्रधानमंत्री ने पांच अप्रैल को दीया जलाने की अपील की

प्रधानमंत्री मंत्री नरेंद्र मोदी कोविड-19 संक्रमण से मुकाबले के लिए कमर कसकर तैयार हैं। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार सुबह नौ बजे प्रसारित अपने वीडियो संदेश में पांच अप्रैल को रात्रि नौ बजे नौ मिनट के लिए घर लाइट्स बंद करके एक दीया, मोमबत्ती या मोबाइल फ्लैश लाइट जलाने की अपील की है। प्रधानमंत्री मोदी की टीम इसे कोविड-19 से लड़ने  की संजीवनी के रूप में देख रही है।

कूटनीति के जानकार इस मुहिम को सबका साथ, सबका विकास से जोड़ रहे हैं, तो चिकित्सा विज्ञानी इसे बड़ी दवा मान रहे हैं।दिल्ली में तमाम लोग फोन करके सांस फूलने, घबराहट होने की शिकायत बताकर दवा पूछ रहे हैं। लोगों को भ्रम है कि कहीं वह कोविड-19 के संक्रमित तो नहीं हैं। डा. अश्विन का कहना है कि लॉकडाउन, दुनिया में संक्रमण से हो रही मौतों, अमेरिका जैसे देश की खस्ता हालत और टीवी पर कोविड-19 जुड़ी खबरों के कारण अधिकांश लोग मानसिक दबाव में हैं।

प्रधानमंत्री का यह कदम इन सभी लोगों का मूड चेंज कराएगा। लोगों में एक नई तरह की ऊर्जा का संचार करेगा। डा. सद्गुरु सरन का कहना है कि लोग घर में अंधेरा करके दीया जलाएंगे, तो इसमें कोई नुकसान तो है नहीं। डा. सरन का मानना है कि यह एक मनोवैज्ञानिक उपाय है। इससे सरकार को भी पता चलता है कि जनता आगे उसका कितना साथ देने के लिए तैयार है।कांग्रेस के नेताओं ने प्रधानमंत्री की इस मुहिम को कठघरे में रखना शुरू कर दिया है। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने इसे चिराग तले अंधेरा बताया है।

Rnyqr3S8?Format=Jpg&Amp;Name=Small |नीति आयोग के सूत्रों का कहना है कि देश को कोरोना से जंग के लिए पर्याप्त संसाधन चाहिए। बड़ी संख्या में मास्क, वेंटिलेटर, फेस शील्ड, पीपीई बेस्ड किट आदि की जरूरत है। देश लगातार इन तैयारियों में युद्ध स्तर पर लगा है। ऐसे में भारत ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाऊन की नीति अपनाई है।

लाइफ केयर इंस्टीट्यूट के एमडी डा. जीपी पाठक समेत अन्य का कहना है कि लॉकडाउन की नीति अपनाने की आलोचना नहीं की जा सकती। चिकित्सकों का कहना है कि लॉकडाऊन कैसे, कब किस तरह से लागू करना है, यह तय करना सरकार का काम है, लेकिन कोरोना से हराने में लॉकडाउन बहुत कारगर है।

इसके चलते ही संक्रमण को अभी तक बड़े पैमाने पर फैलने से रोका जा सका है। इस दौरान भारत के पास जो चिकित्सीय संसाधन नहीं है, उसे जुटाने का प्रयास कर रहा है।सचिव स्तर के अधिकारी के अनुसार दुनिया के तमाम देशों में भारत की कोविड-19 से लड़ने के लिए अपनाई गई नीति की सराहना हो रही है। सूत्र का कहना है कि 22 मार्च को जनता के शंख बजाने, ताली बजाने की घरेलू स्तर पर चाहे जो आलोचना हो, लेकिन वैश्विक स्तर पर इसे देश के जनता की प्रधानमंत्री मोदी के साथ एकजुटता माना गया।

सूत्र का कहना है कि दुनिया के देश लॉकडाऊन के लिए सख्त कानून व्यवस्था का सहारा ले रहे हैं, जबकि भारत में प्रधानमंत्री की अपील पर लोग स्वेच्छा से इसे अमल में ला रहे हैं। इसे दुनिया में भारत की साख बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी की छवि में निखार आ रहा है और सबका साथ, सबका विकास की थीम को बल मिल रहा है।

News-Desk

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