Muzaffarnagar News-श्रद्धालुओं ने किया आस्था के साथ गंगा स्नान- आस्था के तट पर श्रद्धालुओं का उमडी भीड़
मुजफ्फरनगर। (Muzaffarnagar News)सुबह कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर पौराणिक शुकतीर्थ में श्रद्धालुओं ने आस्था की गंगा में पुण्य की डुबकी लगाई। महर्षि शुकदेव की तपोभूमि पर ५ नवंबर से ही आस्था का मेला लगा है। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम मं वटवृक्ष की परिक्रमा कर श्रद्धालु मंदिरों में पूजा कर रहे हैं।
मंदिर और शिवालयों में समागम-कार्तिक गंगा स्नान और मेले में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का संगम चल रहा है। मंदिरों, शिवालयों और धर्मशालाओं में श्रद्धालुओं का समागम है। देर रात से गंगा नदी के दोनों किनारों पर श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगा रहे हैं। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम में अक्षय वट वृक्ष की परिक्रमा चल रही है। हनुमद्धाम, गणेशधाम, शिव धाम, प्राचीन गंगा मंदिर आदि में श्रद्धालुओं का मेला है।
स्वामी ओमानंद-भागवतपीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद का कहना है कि कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान सबसे श्रेष्ठ है। कहते हैं कि गंगा से उनके प्राण, जीवन और मृत्यु जुड़ी है। कहते हैं कि गंगा भारत की आत्मा का प्रतीक है। गंगा का जल अमृत है जो जो जन्म से लेकर मृत्यु तक साथ देता है। गंगा का अविरल, निर्मल और नैसर्गिक प्रवाह भारतीय जीवन की मौलिक आवश्यकता है।
धार्मिक नगरी में कार्तिक गंगा स्नान और मेले में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का संगम लगा है। मंदिरों, शिवालयों और धर्मशालाओं में श्रद्धालुओं का समागम बन है। मुख्य स्नान के लिए सोमवार रात ही श्रद्धालु पहुंचने शुरू हो गए थे। शुकदेव आश्रम, हनुमतधाम, गणेशधाम, शिव धाम, दुर्गा धाम, प्राचीन गंगा मंदिर आदि में भी श्रद्धालुओं का मेला लगा है।
शुकतीर्थ के जीर्णोद्धारक वीतराग स्वामी कल्याण देव ने वर्ष १९४५ में पौराणिक धार्मिक नगरी को जनसुलभ बनाने का महायज्ञ प्रारंभ किया था। बाद में उन्होंने शुकतीर्थ में कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले की शुरूआत की। साल में यहां दशहरा, वैशाखी, शरद चतुर्दशी एवं पितृ विसर्जनी अमावस्या के मेले भी लगते हैं। श्री शुकदेव आश्रम समिति ने साल १९५० में मेले का प्रबंध जिला पंचायत परिषद को सौंप दिया था।

