आत्म निर्भर बेटी ही हमारा संकल्प है: कर्नल (डॉ0) नरेश गोयल से खास मुलाकात
कर्नल (डॉ) नरेश गोयल एक पूर्व सैन्य अधिकारी हैं एवं इन्हे लगभग बीस से अधिक वर्षों का शोध एवं शिक्षण का अनुभव है! 1999 में हुए कारगिल युद्ध में सक्रीय भूमिका के कारण सम्मान पूर्वक जनरल अफसर कमांडिंग इन चीफ के पदक से नवाजे गये गोयल, दीवान वी0 एस0 ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस, मेरठ में कार्यकारी निदेशक के रूप में 2014 से कार्यरत हैं और ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट, लीडरशिप मोटिवेशन एंड टीम बिल्डिंग एवं ओर्गनइजेशनल बिहेवियर के विशेषज्ञ माने जाते हैं।
वह उत्तर प्रदेश सरकार के मिशन शक्ति और बेटी पढाओं-बेटी बचाओं अभियान को-एजूकेशन महाविद्यालय में कैसे फलीभूत कर रहें है, जानने की कोशिश की वरिष्ठ सम्पादकीय सहयोगी डा0 अभिषेक अग्रवाल एवं टीम ने-
कर्नल साहब, “मिशन शक्ति” अभियान उत्तर प्रदेश सरकार की एक पहल हैं! इसे आप शैक्षिक स्तर पर किस तरह से उपयोगी समझते हैं?
आजकल उत्तर प्रदेश सरकार एवं डॉ ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्विद्यालय, लखनऊ द्वारा बेटियों एवं महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु “मिशन शक्ति” अभियान चलाया जा रहा है! यह आधी आबादी की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वाबलंबन हेतु चलाया जा रहा एक ईमानदार एवं संवेदनशील अभियान है!
बेटियों की सुरक्षा एवं सम्मान को तभी सुनिश्चित किया जा सकता है जब वे आत्म निर्भर हों और अगर बेटी तकनीकी रूप से संपन्न है तो उसका कोई सानी नहीं है! एक शिक्षित बेटी पूरी पीढ़ी की किस्मत को बदल सकती है! आज बेटियां हर क्षेत्र में अपना परचम फहरा रही हैं चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो या अंतरिक्ष का, सैन्य क्षेत्र हो या इंजिनीयरिंग का बस आज ज़रुरत है तो उनको तराशने की एवं समाज को इस बारे में जागरूक करने की!
मेरठ और आसपास के क्षेत्र में हम रोजाना महिलाओं से छेड़खानी की घटनाएं सुनते और पढ़ते हैं, क्या अशिक्षा या सही शिक्षा न मिलना भी इसका एक मुख्य कारण हैं?
मेरे विचार से बेटियों एवं महिलाओं से छेड़खानी का मुख्य कारण मानसिक विकार है! शिक्षित व्यक्ति भी कभी-कभी ऐसी हरकत कर जाता है जिसके कारण उसे शर्मिंदा होना पड़ता है!
अशिक्षा तो सभी कुरीतियों एवं विकारों की जननी है! अशिक्षित व्यक्ति के लिए सही एवं गलत में भेद कर पाना कठिन होता है! परन्तु शिक्षित व्यक्ति अगर किसी बेटी अथवा महिला के साथ कोई गलत हरकत करता है तो निश्चित रूप से उसकी शिक्षा एवं संस्कारों में कोई कमी अवश्य रह गयी है!
हमारे संस्थान में विद्यार्थियों को इन विकारों से दूर रखने एवं श्रेष्ठ मानव संस्कारों को पोषित करने के लिए “वैल्यू एजुकेशन सेल” की स्थापना काफी साल पहले ही कर दी गयी थी!
आपका संस्थान कैसे इस योजना का भागीदार हैं?
दीवान ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूशन्स, मेरठ की प्रबंध समिति ने सरकार एवं विश्विद्यालय द्वारा चलाये जा रहे इस अभियान से प्रेरणा ले कर इस अभियान में सहयोग करने का निर्णय लिया है एवं बेटियों के लिए दीवान दौलत राम “शक्ति” छात्रवृति योजना की घोषणा की है
जिसके तहत बेटियों को बी0 टेक0 एवं होटल मैनेजमेंट जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में ट्यूशन फीस की लगभग पैतालीस प्रतिशत फीस माफ़ कर छात्रवृति के रूप में प्रदान की जा रही है!
आशा करते हैं कि कोविड-19 जैसी आपदा में यह छात्रवृति योजना बेटियों द्वारा व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त कर अपना भविष्य उज्जवल बनांने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी!
आपका संस्थान व्यावसायिक शिक्षा का एक जाना माना संस्थान है एवं सभी संकायों में आम तौर पर मेरिट के आधार पर प्रवेश लिए जाते है! इस योजना से क्या आपके संस्थान पर वित्तीय रूप बोझ नहीं बढ़ेगा?
आप ठीक कहते है पिछले दो दशकों से अधिक से हम शिक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी संस्था हैं! निश्चित रूप से संस्था पर इस योजना के कारण वित्तीय बोझ बढ़ेगा परन्तु यह हमारी इंस्टीट्यूशनल सोशल रिस्पांसिबिलिटी भी है और यह बात सभी संस्थाओं को समझनी भी पड़ेगी!
गत वर्ष भी हमारी संस्था ने दीवान दौलतराम छात्रवृति योजना के तहत लगभग एक करोड़ की छात्रवृति प्रतिभावान छात्र छात्राओं को प्रदान की है! यह हमारी परम्परा है!
चाहे प्रतिभा सम्मान की बात हो या पर्यावरण जागरूकता की या फिर महिला सशक्तिकरण की हम किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है! समाज के हर तबके के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़े हैं!
संस्थान ने छात्राओं के लिए क्या नई पहल की हैं, जो “मिशन शक्ति” और “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” के लिए मिसाल बनकर उनकी मदद करे?
आपको जान कर ख़ुशी होगी कि हमारा संस्थान एक ऐसा संस्थान हैं जहां “वीमेन ग्रीवांस सेल” की स्थापना कई साल पहले ही छात्राओं एवं महिला कर्मचारियों की सुरक्षा एवं उनके अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए की जा चुकी हैं!
हालांकि संस्थान की स्थापना को चौबीस वर्ष से ज़्यादा हो चुके हैं परन्तु आज तक ऐसी कोई घटना नहीं हुई जिसके कारण बेटियों को संस्थान में असुरक्षा महसूस हुई हो!
हमारे संस्थान से पास-आउट हुई छात्राएं ना केवल आज ज्यूडशरी में अपना एवं संस्थान का नाम रोशन कर रही हैं बल्कि विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों में अच्छे पदों पर भी काम कर रही हैं! हम इन बेटियों के कारण आज गर्व का अनुभव करते हैं! यह एक सुखद अनुभूति है! आत्म निर्भर बेटी ही हमारा संकल्प है!
आप इस अभियान को कहां तक सफल मानते हैं?
मेरा यह मानना है कि अगर ईमानदारी से आप कोई कार्य शुरू करते है एवं आपका ध्येय जग हितकारी है तो भगवान् भी आपकी मदद करता है! निश्चित ही हम अपनी बात लोगों तक पहुंचाने में सफल होंगे! मीडिया साथ देने आगे आया है! अगर थोड़ा भी परिवर्तन आया तो हम अपने को धन्य समझेंगे!
क्या सही शिक्षा और काउंसलिंग के साथ-साथ आत्म रक्षा भी पाठ्यकार्यक्रम का अंग नही होना चाहिए?
विदेशों में आत्म रक्षा शिक्षा का एक अनिवार्य अंग है! हमारे देश में भी यह पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए! हांलाकि, हम हर वर्ष महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं एवं बेटियों के सशक्तिकरण के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन करते है
जिसमे किसी सक्षम महिला को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है! जिससे कि हमारी बेटियां भी उनसे प्रेरणा ले कर उनका अनुसरण कर सकें एवं समाज में गर्व के साथ सर ऊँचा कर चल सकें!
इन कार्यक्रमों में आत्म रक्षा हेतु विशेष प्रशिक्षकों द्वारा कार्यशाला का आयोजन किया जाता है जिसमे हमारी महिला शिक्षक एवं छात्राएं बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती हैं! इन कार्यक्रमों में पुलिस हेल्पलाइन नंबर जैसे 112 एवं 1090आदि की भी जानकारी दी जाती है!
आज की भावी युवा पीढ़ी के लिए आपका क्या संदेश हैं?
मैं एक पूर्व सैनिक हूँ! तीस से अधिक वर्षों तक माँ भारती की सेवा करने का सौभाग्य मुझे मिला है! हमारे लिए अनुशासन ही सर्वोपरि है! भारतीय सैनिक के लिए नैतिक मूल्यों के उच्च मापदंड ही उसकी संपत्ति हैं,जिसके कारण आज उसको हर जगह सम्मान मिलता है! मेरा सभी पाठकों को और ख़ास तौर पर युवा पाठकों को यह ही सन्देश है कि हम अपना जीवन उन विकारों से मुक्त रखें जो हमारे समाज को रसातल की ओर ले जाता है!
हम सही शिक्षा लें, गुरुजनों का आदर करें एवं बेटियों को उनका उचित स्थान दें! बेटियां को अशिक्षा की बैसाखी नहीं शिक्षा की ताकत दें! उनको व्यवसायिक शिक्षा के लिए प्रेरित करें!

डॉ0 नरेश गोयल की शिक्षा-दीक्षा आगरा, लखनऊ, कलकत्ता एवं मेरठ में हुई है!आपने स्नातक की डिग्री दिल्ली विश्विद्यालय से प्राप्त की है! विधि में स्नातक करते हुए ही चयन भारतीय सेना में अधिकारी के पद पर हो गया एवं प्रशिक्षण के उपरान्त तैनाती सेना की इन्फेंट्री (पैदल सेना) में सन 1970 में हुई! सेना में अपने तीस वर्ष के करियर में देश एवं विदेश में विभिन्न आतंकरोधी अभियानों का नेतृत्व किया एवं नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश एवं जम्मू एवं कश्मीर में युद्ध जैसे हालातों में चार बार तैनाती के दौरान अपनी सेवाएं दीं! आपने 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में भाग लिया एवं श्रीलंका में शांति सैनिक के रूप में दो साल से अधिक कार्य किया!


Nice effort. Girls should be empowered to make the nation strong.