हे कृष्ण कन्हैया, हे गोपाल: गौ माता के सम्मान और रक्षण का आह्वान
डॉ. ओमप्रकाश गुप्ता द्वारा रचित यह प्रेरणादायक कविता, “हे गोपाल“, एक गहरी आध्यात्मिक पुकार है, जिसमें समाज और राष्ट्र से जुड़ी अनेक समस्याओं का समाधान भगवान कृष्ण से अवतार लेकर आने की प्रार्थना के रूप में व्यक्त किया गया है। यह कविता (हे गोपाल: A Divine Call for Gau Mata Protection and Respect) विशेष रूप से गौ माता की वर्तमान स्थिति और उसके सम्मान की पुनःस्थापना के लिए एक मार्मिक आह्वान करती है। प्रस्तुत कविता में करुणा, पीड़ा और जागरूकता का समावेश है, जो इसे न केवल भावनात्मक रूप से बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत प्रासंगिक बनाता है।
हे कृष्ण कन्हैया, हे गोपाल..
हे कृष्ण कन्हैया, हे गोपाल…
मानव रूप धरो धरती पर…
न करो देर हे पालनहार…
मनुज रूप धर, लो अवतार।
कटती गायें तुम्हें रही पुकार।।
तुम ही हो जग तारनहार।
हे कृष्ण कन्हैया, हे गोपाल।।
हे कृष्ण कन्हैया, हे गोपाल…
मानव जाति कराह रही है…
बढ़ा अधर्म और अत्याचार…
मानव रूप धरो धरती पर…
न करो देर हे पालनहार।।
हे कृष्ण कन्हैया, हे गोपाल…
हे कृष्ण कन्हैया, हे गोपाल…
पन्नी, कचरा, गंदगी खा रही…
फिरे रोड पर हो लाचार…
गोपालक ने मरने छोड़ी…
बेंची कसाई कछु हजार…
सरकारें तो मांस बेंच रही…
कमा रही डालर, भरे भंडार…
कमा रही डालर, भरे भंडार…
गौ हत्या को बंद करो अब…
खत्म करो ये अत्याचार…
राष्ट्रमाता पद पाये प्रतिष्ठा…
हो गौमाता की जय जयकार…
मानव रूप धरो धरती पर…
न करो देर हे पालनहार…
हे कृष्ण कन्हैया, हे गोपाल..
हे कृष्ण कन्हैया, हे गोपाल…
यह कविता गौ माता के सम्मान और सुरक्षा के लिए एक सशक्त आवाज़ उठाती है। डॉ. ओमप्रकाश गुप्ता ने समाज में व्याप्त अधर्म, अत्याचार और गौ हत्या के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए भगवान कृष्ण से अवतार लेने की प्रार्थना की है। इस कविता के माध्यम से कवि ने गौ माता को राष्ट्रमाता के पद पर प्रतिष्ठित करने की मांग की है और समस्त मानव जाति से गौ हत्या पर रोक लगाने का आह्वान किया है।
देशभर में गौ रक्षा को एक आंदोलन के रूप में बढ़ावा देने और गौ माता को पुनः उसका खोया सम्मान दिलाने की आवश्यकता है। गौ माता की रक्षा और उनकी प्रतिष्ठा के लिए यह कविता एक प्रेरक सन्देश बनकर सामने आती है, जो हर नागरिक के दिल में सामाजिक जिम्मेदारी और धार्मिक भावना को पुनः जाग्रत करती है।

