Babasaheb Ambedkar पर अमित शाह की टिप्पणी से संसद में मचा हंगामा, कांग्रेस और विपक्षी दलों का तीव्र विरोध
भारत की राजनीति में कभी-कभी ऐसी बयानबाजी होती है, जो पूरे देश को झकझोर कर रख देती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर/Babasaheb Ambedkar पर की गई टिप्पणी ने संसद के दोनों सदनों में राजनीतिक भूचाल ला दिया है। यह बयान शाह ने राज्यसभा में संविधान पर हो रही चर्चा के दौरान दिया था, जो न केवल विपक्षी दलों के लिए बल्कि देश के संवेदनशील वर्ग के लिए भी एक बड़ा मुद्दा बन गया।
1. अमित शाह की विवादास्पद टिप्पणी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में संविधान पर हो रही बहस के दौरान कहा था, “कांग्रेस जितनी बार बाबा साहेब अंबेडकर का नाम लेती है, अगर उतनी बार वह भगवान का नाम लेते, तो उन्हें स्वर्ग में जगह मिल जाती।” शाह के इस बयान पर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल भड़क उठे और इसे अंबेडकर के प्रति अपमानजनक करार दिया। विपक्ष ने इस बयान के खिलाफ तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संसद में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
कांग्रेस ने शाह के इस बयान को ना केवल सांप्रदायिक दृष्टिकोण से गलत माना, बल्कि इसे बाबा साहेब के योगदान और उनकी इज्जत का अपमान भी बताया। यह बयान जिस समय आया, उस समय संसद में संविधान के महत्व पर चर्चा हो रही थी, और शाह का यह बयान एक प्रकार से उस चर्चा का मजाक उड़ाने जैसा महसूस हुआ।
2. कांग्रेस और विपक्षी दलों का विरोध
संसद में हंगामा मचने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बयान दिया कि शाह को इस टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए। खरगे ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चाहिए कि वह शाह को आधी रात तक बर्खास्त करें, ताकि यह संदेश जाए कि उनका बाबा साहेब अंबेडकर के प्रति सम्मान सच्चा है। खरगे का यह बयान विपक्षी नेताओं द्वारा भाजपा पर किए गए हमलों का हिस्सा था, जिसमें कहा गया था कि भाजपा के नेताओं के रवैये से अंबेडकर की छवि को नुकसान हो रहा है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, “अगर प्रधानमंत्री सचमुच बाबा साहेब अंबेडकर के प्रति सम्मान रखते हैं, तो उन्हें गृह मंत्री को तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए।”
3. लोकसभा और राज्यसभा में हंगामा
अमित शाह के बयान के बाद संसद के दोनों सदनों में विरोध प्रदर्शन थमा नहीं। बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने भारी हंगामा किया। सांसदों ने जोरदार नारेबाजी की और आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री ने जानबूझकर अंबेडकर के नाम का अपमान किया है। हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। जब सदन फिर से शुरू हुआ, तो विपक्ष का विरोध फिर से जारी रहा, जिसके कारण लोकसभा की कार्यवाही को अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
वहीं, राज्यसभा में भी स्थिति कम गंभीर नहीं थी। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि शाह का बयान तथ्यों से परे है और उन्होंने जानबूझकर बाबा साहेब अंबेडकर के योगदान को नकारने की कोशिश की है। इसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही को भी दो बार स्थगित करना पड़ा।
4. गृहमंत्री की सफाई
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। शाह ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने किसी तरह से अंबेडकर का अपमान नहीं किया है। उनका बयान केवल कांग्रेस के नेताओं पर था, जो अंबेडकर के नाम का राजनीतिक लाभ उठाते हैं, जबकि शाह ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी बाबा साहेब के योगदान की सराहना करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
5. किरेन रिजीजू का पलटवार
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने भी कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से अंबेडकर के योगदान को नकारने की कोशिश करती आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सिर्फ एक छोटे से हिस्से के बयान को उठाकर इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की है। रिजीजू ने कहा कि कांग्रेस ने अंबेडकर को हमेशा अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया और अब उनका नाम लेकर विपक्षी दल सिर्फ राजनीति कर रहे हैं।
6. देश भर में आक्रोश
अमित शाह की टिप्पणी ने न केवल संसद में बल्कि देश भर में आक्रोश पैदा कर दिया। कई सामाजिक संगठनों और बाबा साहेब के अनुयायियों ने भी शाह के बयान के खिलाफ सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किए। उन्होंने मांग की कि अमित शाह को माफी मांगनी चाहिए और यदि वह ऐसा नहीं करते, तो देशभर में उनका विरोध बढ़ेगा। बाबा साहेब अंबेडकर के अनुयायी उनका अपमान सहन नहीं करेंगे और उनके सम्मान की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
7. राजनीतिक संग्राम का असर
इस विवाद ने राजनीतिक संग्राम को और तेज कर दिया है। कांग्रेस ने जहां इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर हमला किया है, वहीं भाजपा ने इस मामले को कांग्रेस की साजिश करार दिया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम का प्रभाव आने वाले विधानसभा चुनावों पर पड़ सकता है, क्योंकि यह मुद्दा केवल राजनीतिक दलों के बीच का नहीं, बल्कि पूरे देश के एक संवेदनशील मुद्दे से जुड़ा हुआ है।
8. भविष्य में क्या होगा?
संसद में इस तरह के विवादों का असर सिर्फ राजनैतिक लड़ाई पर नहीं पड़ता, बल्कि यह देश के समाज में भी विभाजन का कारण बन सकता है। ऐसे में यह देखना होगा कि केंद्र सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर किस तरह से प्रतिक्रिया देते हैं और क्या आने वाले दिनों में इस विवाद का हल निकलता है। क्या भाजपा अपने मंत्री को बर्खास्त करती है या विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा रहता है, यह देखने के लिए पूरा देश इंतजार कर रहा है।

