उत्तर प्रदेश

पश्चिमी उत्तर प्रदेश को चाहिए ‘उत्तम प्रदेश’! Saharanpur में गरजी आवाज़ें, विकास और न्याय की मांग पर गरमाई सियासत

जनपद Saharanpur के ग्राम जडौदा जट में रविवार को पश्चिमांचल निर्माण पार्टी और उत्तम प्रदेश निर्माण संगठन के संयुक्त तत्वावधान में एक जोरदार जनजागरण कार्यशाला और ‘वृक्ष लगाओ पर्यावरण बचाओ’ विषय पर गोष्ठी का आयोजन हुआ। यह आयोजन पार्टी के कोषाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार के आवास पर संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश के कई हिस्सों से आए पार्टी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों ने भाग लिया।

👤 आयोजन की अध्यक्षता और संचालन

बैठक की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सतेन्द्र सिंह ने की, जबकि संचालन की बागडोर राष्ट्रीय प्रवक्ता संजीव मलिक मासूम ने संभाली। कार्यक्रम में उत्तम प्रदेश निर्माण संगठन के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन शर्मा, पश्चिम प्रदेश मुक्तिमोर्चा के अध्यक्ष भगतसिंह वर्मा, पार्टी उपसचिव शिवकुमार प्रधान, इमरान राव, डॉ. आर. के. सिंह, डा. जे. डी. सिंह, डा. ओमकुमार, राजू, जावेद, देवेन्द्र राणा, श्याम, कुलदीप शर्मा, राधेश्याम, डा. जसबीर सिंह, मदन, पुण्डीर जैसे दर्जनों प्रमुख नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।


🌆 क्यों जरूरी है ‘पश्चिम प्रदेश’?

‘एक प्रदेश, दो हिस्से – एक समृद्ध, एक उपेक्षित’

डॉ. विपिन शर्मा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की कुल आबादी करीब 25 करोड़ है, जिसमें से लगभग 8 करोड़ लोग पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रहते हैं। लेकिन यह आबादी लगातार अविकास, अपराध, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, और शैक्षणिक संस्थानों के अभाव से जूझ रही है।

उन्होंने कहा, “पश्चिम उत्तर प्रदेश 72% रेवेन्यू जनरेट करता है लेकिन उसे विकास के नाम पर केवल 18% फंड मिलता है। ये खुला अन्याय है।”


🔐 कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल

‘सबसे महंगा न्याय, सबसे उपेक्षित क्षेत्र’

भगतसिंह वर्मा ने कहा कि इतने बड़े राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखना बेहद कठिन हो गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच तक नहीं है, जिससे यहां के लोगों को सबसे महंगा और लंबा न्यायिक संघर्ष करना पड़ता है। न्याय पाने के लिए लखनऊ या इलाहाबाद जाना पड़ता है, जो गरीब तबके के लिए एक दु:स्वप्न बन चुका है।


💊 स्वास्थ्य सेवाओं में असंतुलन – AIIMS पश्चिम में कब आएगा?

‘दो AIIMS पूरब में, पश्चिम की जनता बेबस’

Saharanpur  कार्यक्रम में यह मुद्दा भी जोरशोर से उठा कि उत्तर प्रदेश में दो AIIMS तो हैं लेकिन दोनों पूर्वी हिस्से में हैं। पश्चिमी यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। सरकारी अस्पतालों में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं, और गरीब मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों की महंगी फीस चुकानी पड़ती है। कई बार परिवारों को इलाज के लिए जमीन-जायदाद तक बेचनी पड़ती है।


🎓 शिक्षा और रोजगार: युवाओं के भविष्य पर बड़ा संकट

‘IIT, IIM नहीं, नौकरी 6000 की – क्या यही विकास?’

संजीव मलिक मासूम ने कहा कि आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश में न IIT है, न IIM। कोई बड़ा तकनीकी या प्रबंधन संस्थान यहां नहीं है। सारे भर्ती कार्यालय पूरब में हैं। जिससे यहां के युवाओं को नौकरी के अवसरों से वंचित होना पड़ रहा है। पढ़े-लिखे युवा मात्र 6000 रुपये की नौकरी करने को मजबूर हैं।


🌿 पर्यावरण और वृक्षारोपण पर भी गंभीर चिंता

‘पेड़ लगाओ, जल बचाओ – तभी बचेगा भविष्य’

डॉ. सतेन्द्र सिंह ने बैठक में कहा कि अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और जल का अत्यधिक दोहन पर्यावरण को असंतुलित कर रहा है। उन्होंने कहा, “हर व्यक्ति को साल में कम से कम दो पौधे लगाने चाहिए और उनकी देखभाल भी करनी चाहिए।” इस संदेश के प्रतीक स्वरूप सभी मेहमानों को पारिजात के पौधे उपहार स्वरूप दिए गए


📣 पश्चिम प्रदेश का मुद्दा बन रहा जनांदोलन

‘अब समय है, आवाज़ उठाने का – हमारा हक़ चाहिए!’

कार्यक्रम में एक बात साफ हो गई कि अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता और नेतृत्व अपना हक़ मांगने के लिए पूरी तरह से संगठित हो चुका है। यह आंदोलन धीरे-धीरे गांव-गांव, शहर-शहर फैल रहा है और जनता में इसका व्यापक समर्थन देखने को मिल रहा है।


🎯 क्या कहती है आँकड़ों की सच्चाई?

  • यूपी की कुल आबादी: 25 करोड़

  • पश्चिमी यूपी की आबादी: 8 करोड़

  • राज्य रेवेन्यू में हिस्सेदारी: 72%

  • विकास बजट में हिस्सा: 18%

  • AIIMS पश्चिम यूपी में: 0

  • हाईकोर्ट बेंच: नहीं

  • IIT/IIM: नहीं

  • सरकारी नौकरी भर्ती केंद्र: नहीं


🌈 आने वाला समय कैसा होगा?

पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोग अब अपने विकास, अधिकार और न्याय की मांग के लिए एकजुट हो रहे हैं। यह आंदोलन अब सिर्फ एक राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि एक सामाजिक जरूरत बन चुका है। अगर सरकारें अब भी नहीं जागीं, तो यह आवाज़ और बुलंद होती जाएगी।


पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों के अधिकारों, विकास और न्याय के लिए उठी यह आवाज़ अब रुकने वाली नहीं। “उत्तम प्रदेश” की मांग अब एक जन-आंदोलन बन चुका है, जो आने वाले समय में प्रदेश की सियासत को नई दिशा देगा।

 

डॉ. सत्येन्द्र सिंह

पश्चिमांचल निर्माण पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सत्येन्द्र सिंह, एक उदार दृष्टिकोण और समर्पित नेता हैं जो उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र की जनता के लिए एक अलग राज्य, 'पश्चिमांचल', की स्थापना के पक्ष में प्रतिबद्ध हैं। उनका मुख्य उद्देश्य है पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को पुर्नरुत्थान और सकारात्मक भागीदारी के साथ समृद्धि प्रदान करना। सिंह एक डॉक्टर, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो अपने सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज के विकास में योगदान कर रहे हैं।

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