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13 ज़िलों का मेडिकल कचरा और एक गांव की बर्बादी! Muzaffarnagar मखियाली में उठी किसानों की गूंज, राकेश टिकैत का बड़ा बयान

Muzaffarnagar (उत्तर प्रदेश)।भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने एक बार फिर किसानों की आवाज़ को मज़बूती से बुलंद किया है। चांदपुर मखियाली गांव में चल रहे मेडिकल वेस्टेज फैक्ट्री के विरोध में किसानों द्वारा किए जा रहे धरने पर पहुंचकर उन्होंने पूरी ताकत से किसानों का समर्थन किया और प्रशासन पर सीधे निशाना साधा।

“मेडिकल वेस्ट फैक्ट्री बनती रही तो बीमारियों का अड्डा बनेगा गांव!”
चौधरी टिकैत ने मौके पर कहा कि, “जब से हम यहां पहुंचे हैं, तब से इन फैक्ट्रियों का धुआं रुकने का नाम नहीं ले रहा। ये सिर्फ एक फैक्ट्री की बात नहीं है, पूरे इलाके में जितनी भी प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियां हैं, उन सभी की जांच की जानी चाहिए।” उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर प्रशासन ने जल्द कोई सख्त कदम नहीं उठाया तो पूरा गांव बीमारियों की चपेट में आ जाएगा।


💥 13 ज़िलों से आ रहा खतरनाक मेडिकल कचरा!

इस फैक्ट्री में सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के 13 जिलों से चिकित्सीय कचरा — जैसे कि प्लास्टिक, रुई, एक्सपायर्ड दवाइयां, इंजेक्शन, सर्जिकल वस्तुएं और शारीरिक अपशिष्ट — जमा होकर लाया जा रहा है। ये कचरा न केवल वायु को जहरीला बना रहा है बल्कि गांव की जमीन, पानी और भूगर्भीय स्रोत को भी बुरी तरह प्रदूषित कर रहा है।

एक बार पूर्व में जब प्रदूषण विभाग के अधिकारी निरीक्षण करने खेतों के उस पार गए थे, तो लौटते वक्त उनके कपड़ों का रंग काला हो गया था। यह अपने आप में बताने के लिए काफी है कि फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं कितना खतरनाक और जहरीला है।


🔥 ‘प्रदूषण का धुंआ, प्रशासन की चुप्पी और किसानों का गुस्सा!’

चौधरी टिकैत ने सवाल किया कि जब सरकारें “स्वच्छ भारत” और “ग्रीन इंडिया” की बात करती हैं तो गांवों में इस तरह की जहरीली फैक्ट्रियों की अनुमति कैसे दी जाती है? उन्होंने कहा, “हम गांवों में तो ऑर्गेनिक खेती की बात करते हैं, और ये फैक्ट्रियां हमारे स्वास्थ्य और मिट्टी दोनों को मारने में लगी हैं।”

उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन पूरी ताकत से इस आंदोलन के साथ खड़ी है, और अब केवल एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में चल रही प्रदूषण फैलाने वाली सभी इकाइयों की जांच की मांग की जा रही है।


👥 कौन-कौन रहा मौजूद? किसान एकजुट, मंच पर दिखी ताकत

इस मौके पर राकेश टिकैत के साथ भारी संख्या में BKU के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे। इनमें प्रमुख रूप से:

  • चौधरी नवीन राठी (जिला अध्यक्ष)

  • चौधरी धार्ज लटियाल (प्रदेश महासचिव)

  • चौधरी श्याम पाल (प्रदेश सचिव)

  • अशोक घटायन (मुरादाबाद मंडल प्रभारी)

  • चौधरी शक्ति सिंह, सुमित चौधरी, देव अहलावत, गुलशन चौधरी, गुलबहार राव, हैप्पी बालियांन, परमजीत चौधरी, नवीन चौधरी, परविंदर चौधरी, संजय चौधरी, संजय त्यागी, अनुज राठी, बॉबी राठी, आयुष चौधरी, अबरार अहमद आदि शामिल रहे।

सभी ने एक स्वर में प्रशासन से मांग की कि इस मेडिकल वेस्ट फैक्ट्री की कार्यवाही तुरंत रोकी जाए और इसकी जांच एक स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।


⚠️ मेडिकल वेस्ट फैक्ट्री: मौत की फैक्ट्री बनती जा रही है मखियाली गांव!

गांववालों का कहना है कि जब से यह फैक्ट्री लगी है, तब से लोगों में सांस की बीमारियां, त्वचा की एलर्जी, पानी का स्वाद और रंग बदलना, और फसलों में खराबी जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं। छोटे बच्चों की तबीयत आए दिन बिगड़ती रहती है और गर्भवती महिलाओं में जटिलताएं सामने आ रही हैं।

गांव के बुजुर्ग रामपाल सिंह ने बताया कि, “पहले यहां की हवा शुद्ध थी, खेत लहलहाते थे। अब न हवा रही, न पानी। रात में इस फैक्ट्री से जो धुआं निकलता है, उससे आंखों में जलन होने लगती है।”


📢 अब नहीं रुकेगा आंदोलन – गांव से दिल्ली तक जाएगी आवाज़!

राकेश टिकैत ने साफ कहा कि अगर प्रशासन ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया, तो जल्द ही दिल्ली के जंतर मंतर से लेकर लखनऊ तक यह आंदोलन ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि, “हम शांतिपूर्ण हैं, लेकिन कमजोर नहीं। अब गांव के बच्चों का भविष्य दांव पर नहीं लगाने देंगे।”


✅ प्रशासन से किसानों की मांगें क्या हैं?

  1. मेडिकल वेस्ट फैक्ट्री को तुरंत बंद किया जाए।

  2. स्वतंत्र एजेंसी से पर्यावरण जांच कराई जाए।

  3. गांव के पानी और मिट्टी की लैब रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

  4. बीमार पड़े ग्रामीणों को मुफ्त इलाज और मुआवज़ा दिया जाए।

  5. क्षेत्र में भविष्य में कोई भी प्रदूषणकारी फैक्ट्री न लगाई जाए।


📍 भविष्य का रास्ता: क्या किसानों की जीत होगी?

यह आंदोलन अब केवल मखियाली गांव का नहीं रहा, बल्कि यह पूरे मुज़फ्फरनगर ज़िले और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों की लड़ाई बन चुका है। सवाल सिर्फ एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे समाज के स्वास्थ्य, पर्यावरण और अधिकारों का है।

भारतीय किसान यूनियन की तरफ से स्पष्ट संदेश है — अब पीछे नहीं हटेंगे!


⚠️ **अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ये ‘मेडिकल वेस्ट फैक्ट्री’ सिर्फ गांव ही नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरा बन जाएगी। राकेश टिकैत के नेतृत्व में शुरू हुआ यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।**

 

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