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UNSC Reform: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो अधिकार के साथ स्थायी सदस्यता पर भारत का स्पष्ट रुख, G4 प्रस्ताव को भी मिला समर्थन

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद UNSC में सुधार को लेकर भारत ने एक बार फिर अपना मजबूत और स्पष्ट रुख सामने रखा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि P. Harish ने इंटरगवर्नमेंटल नेगोशिएशन्स (IGN) की बैठक में कहा कि सुरक्षा परिषद में वास्तविक और प्रभावी सुधार तभी संभव है जब स्थायी सदस्यता का विस्तार वीटो अधिकार के साथ किया जाए। 🌍

भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के ढांचे में बदलाव को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज है और कई देशों के बीच मतभेद भी बने हुए हैं।


भारत ने कहा—वीटो अधिकार के बिना स्थायी सदस्यता अधूरी

भारत ने स्पष्ट किया कि यदि स्थायी सदस्यता का विस्तार वीटो अधिकार के बिना किया जाता है तो यह सुधार अधूरा माना जाएगा। भारत का मानना है कि सुरक्षा परिषद की संरचना को संतुलित बनाने के लिए नए स्थायी सदस्यों को समान अधिकार मिलना जरूरी है।

भारत ने यह भी कहा कि वीटो अधिकार के साथ या बिना नई श्रेणी बनाना चर्चा को और जटिल बना सकता है और इससे सुधार प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है।


G4 समूह के प्रस्ताव को भारत का समर्थन

संयुक्त राष्ट्र सुधार प्रक्रिया में भारत ने G4 समूह के प्रस्ताव का समर्थन भी किया है। इस समूह में भारत के साथ Brazil, Germany और Japan शामिल हैं।

G4 प्रस्ताव के अनुसार नए स्थायी सदस्य देशों को शुरुआती 15 वर्षों तक वीटो अधिकार का उपयोग करने से रोका जा सकता है। इसके बाद इस व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। इस प्रस्ताव को वैश्विक सहमति बनाने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम माना जा रहा है।

ब्राजील के उप स्थायी प्रतिनिधि Norberto Moretti ने इस प्रस्ताव को बातचीत को आगे बढ़ाने वाला लचीला विकल्प बताया।


वीटो अधिकार को लेकर वैश्विक स्तर पर जारी है मतभेद

सुरक्षा परिषद में सुधार के मुद्दे पर कई देशों के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। कुछ देश स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ देश इसके खिलाफ अपनी चिंता जता रहे हैं।

Italy और Pakistan जैसे देशों ने स्थायी सदस्यता के विस्तार का विरोध करते हुए कहा है कि इससे परिषद की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और निर्णय प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।

हालांकि भारत का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था वैश्विक शक्ति संतुलन को सही तरीके से प्रतिबिंबित नहीं करती।


1965 के बाद नहीं हुआ स्थायी श्रेणी में कोई बड़ा बदलाव

भारत ने अपने वक्तव्य में यह भी याद दिलाया कि 1965 में हुए सुधार के दौरान केवल गैर-स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई थी, जबकि स्थायी सदस्यता की संरचना में कोई बदलाव नहीं किया गया।

इससे स्थायी सदस्यों का प्रभाव और मजबूत हुआ और परिषद में प्रतिनिधित्व का संतुलन प्रभावित हुआ। भारत का कहना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए अब व्यापक सुधार आवश्यक हो गए हैं।


अफ्रीकी देशों ने भी वीटो अधिकार की मांग का समर्थन किया

अफ्रीकी देशों के समूह ने भी नए स्थायी सदस्यों को वीटो अधिकार देने की मांग का समर्थन किया है। उनका कहना है कि उपनिवेशवाद के दौर में अफ्रीका को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया था और अब वैश्विक संस्थाओं में संतुलित प्रतिनिधित्व जरूरी है।

इस समर्थन को संयुक्त राष्ट्र सुधार प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।


संतुलित रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा भारत

भारत का मौजूदा रुख एक संतुलित कूटनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर भारत स्थायी सदस्यता के साथ वीटो अधिकार की मांग पर कायम है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक सहमति बनाने के लिए G4 प्रस्ताव जैसे व्यावहारिक विकल्पों का समर्थन भी कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति भारत को वैश्विक मंच पर जिम्मेदार और सहयोगात्मक नेतृत्व की भूमिका में स्थापित करती है।


सुरक्षा परिषद सुधार क्यों है भारत के लिए अहम

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता लंबे समय से भारत की विदेश नीति की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रही है। दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था और तेजी से उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में भारत परिषद में स्थायी प्रतिनिधित्व का दावा करता रहा है।

भारत का मानना है कि बदलते वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा परिषद की संरचना में सुधार आवश्यक है, ताकि यह संस्था अधिक प्रतिनिधिक और प्रभावी बन सके।


वैश्विक सहमति बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही प्रक्रिया

इंटरगवर्नमेंटल नेगोशिएशन्स की बैठकों के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार पर सहमति बनाने की प्रक्रिया जारी है। इसमें विभिन्न देशों के विचारों और प्रस्तावों को शामिल करते हुए व्यापक समाधान तलाशने की कोशिश की जा रही है।

भारत की सक्रिय भागीदारी इस प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और आने वाले समय में इस मुद्दे पर और ठोस प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है।


संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर भारत का स्पष्ट और संतुलित रुख वैश्विक कूटनीति में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। स्थायी सदस्यता के साथ वीटो अधिकार की मांग और G4 प्रस्ताव के समर्थन ने संकेत दिया है कि भारत न केवल अपने अधिकारों के लिए मुखर है बल्कि व्यापक वैश्विक सहमति बनाने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

 

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