उत्तर प्रदेश

Kanpur में शिलान्यास पर सियासी संग्राम: सपा विधायक अमिताभ बाजपेई का घर बना छावनी, बोले- ‘लोकतंत्र की काली रात’

उत्तर प्रदेश के Kanpur में एक प्राथमिक विद्यालय के शिलान्यास को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर राजनीतिक टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है। परमट स्थित प्राथमिक विद्यालय में प्रस्तावित शिलान्यास कार्यक्रम को लेकर समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच बढ़ते तनाव के बाद गुरुवार देर रात पुलिस प्रशासन ने सपा विधायक Amitabh Bajpai के आवास से लेकर कार्यक्रम स्थल तक भारी घेराबंदी कर दी।

काकादेव, ग्वालटोली समेत कई थानों की पुलिस फोर्स को इलाके में तैनात किया गया, जिसके बाद पूरा क्षेत्र मानो छावनी में तब्दील हो गया। देर रात विधायक अमिताभ बाजपेई ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर पुलिस कार्रवाई को “लोकतंत्र की काली रात” बताया और समर्थकों से सुबह मिलने की बात कही।


रात 12 बजे सोशल मीडिया लाइव में फूटा विधायक का गुस्सा

सपा विधायक Amitabh Bajpai ने रात करीब 12:15 बजे सोशल मीडिया पर लाइव आकर प्रशासनिक कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर की। करीब 50 मिनट तक चले लाइव वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर को पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया है और परमट स्थित विद्यालय परिसर के आसपास भी भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र में विकास कार्य कराने से रोका जा रहा है। विधायक ने दावा किया कि विद्यालय के निर्माण कार्य के लिए विधायक निधि से स्वीकृत काम पूरी तरह नियमों के तहत कराया जा रहा है।


विद्यालय शिलान्यास को लेकर दो दिन से जारी है तनाव

पूरा विवाद परमट स्थित प्राथमिक विद्यालय के निर्माण और शिलान्यास को लेकर शुरू हुआ। जानकारी के मुताबिक विद्यालय में विधायक निधि और सांसद निधि से कुल करीब 50 लाख रुपये के विकास कार्य प्रस्तावित हैं।

विधायक निधि से तीन कमरों के निर्माण के लिए 25 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जबकि सांसद निधि से स्मार्ट क्लास और बाउंड्रीवाल के लिए लगभग 25.12 लाख रुपये का बजट तय हुआ है।

बताया जा रहा है कि 14 मई को विद्यालय परिसर में साफ-सफाई और तैयारियों के दौरान सपा और भाजपा समर्थक आमने-सामने आ गए थे। इस दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस और तनाव की स्थिति बन गई थी।


भाजपा पार्षद और सपा विधायक के बीच विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग

विद्यालय के शिलान्यास को लेकर शुरू हुआ विवाद जल्द ही राजनीतिक बयानबाजी में बदल गया। इससे पहले भी भाजपा पार्षद और सपा विधायक के बीच तीखी नोकझोंक की खबरें सामने आई थीं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि स्थानीय स्तर पर दोनों दल इस मुद्दे को प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रहे हैं। एक ओर सपा विधायक इसे विकास कार्यों में बाधा बताकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं, तो दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप लगाए हैं।


भाजपा नेता सुरेश अवस्थी बोले- ‘काम का विरोध नहीं, भ्रष्टाचार का है’

वरिष्ठ भाजपा नेता Suresh Awasthi ने बयान देते हुए कहा कि उन्हें विद्यालय निर्माण कार्य से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि विधायक शिलान्यास करें, लेकिन सवाल निर्माण प्रक्रिया और कथित भ्रष्टाचार को लेकर उठ रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय के पुराने भवन से निकले करीब 50 लाख रुपये के मलबे को केवल तीन लाख रुपये में अपने लोगों को बेच दिया गया। हालांकि इन आरोपों पर सपा की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


सांसद ने फिलहाल टाला अपना कार्यक्रम

विवाद बढ़ने के बाद सांसद Ramesh Awasthi ने अपना प्रस्तावित शिलान्यास कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिया। सूत्रों के अनुसार सांसद ने प्रशासन से पहले पूरे विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने को कहा है।

प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका को देखते हुए एहतियातन भारी पुलिस बल तैनात किया गया।


रात तक असमंजस में रहा प्रशासन, फिर शुरू हुई घेराबंदी

सूत्रों के मुताबिक गुरुवार सुबह से ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी असमंजस की स्थिति में थे। पूरे दिन यह तय नहीं हो पा रहा था कि शिलान्यास कार्यक्रम को अनुमति दी जाए या नहीं।

हालांकि देर रात अचानक पुलिस की सक्रियता बढ़ गई और विधायक आवास के बाहर बैरिकेडिंग शुरू कर दी गई। कई इलाकों में पुलिस गश्त भी तेज कर दी गई।

विधायक अमिताभ बाजपेई ने आरोप लगाया कि एसीपी कर्नलगंज की ओर से उन्हें कार्यक्रम रद्द करने का नोटिस दिया गया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।


कार्यदायी संस्था ने मांगी जगह चिह्नित करने की अनुमति

इसी बीच कार्यदायी संस्था यूपीएसआईसी ने बेसिक शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर विद्यालय परिसर में निर्माण कार्य के लिए जगह चिह्नित करने का अनुरोध किया है।

Surjeet Singh ने बताया कि कार्यदायी संस्था की ओर से निर्माण स्थल को स्पष्ट रूप से चिह्नित करने के लिए पत्र प्राप्त हुआ है। प्रशासन अब इस प्रक्रिया को लेकर भी विचार कर रहा है।


राजनीतिक माहौल में बढ़ी बयानबाजी, सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

कानपुर का यह विवाद अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है। सपा समर्थक पुलिस कार्रवाई को विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि भाजपा समर्थक इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरी कार्रवाई बता रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय स्तर का यह विवाद आने वाले समय में बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप ले सकता है, क्योंकि दोनों दल इसे अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा से जोड़ चुके हैं।


कानपुर की राजनीति में फिर बढ़ी गर्मी

कानपुर में पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज रही हैं। विकास कार्यों, सार्वजनिक परियोजनाओं और स्थानीय मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी माहौल के करीब आते ही इस तरह के स्थानीय विवादों का राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है। यही वजह है कि एक स्कूल के शिलान्यास का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है।


कानपुर के परमट विद्यालय शिलान्यास विवाद ने यह साफ कर दिया है कि स्थानीय विकास कार्य भी अब राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बनते जा रहे हैं। सपा विधायक अमिताभ बाजपेई के आवास पर पुलिस घेराबंदी और देर रात की राजनीतिक बयानबाजी ने मामले को और गर्मा दिया है। फिलहाल प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश में जुटा है, लेकिन आने वाले दिनों में यह विवाद कानपुर की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।

 

News-Desk

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