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Petrol-डीजल के दाम में बड़ा उछाल: दिल्ली-NCR के लाखों वाहन चालकों पर बढ़ा बोझ, रोजाना सफर अब और महंगा

देशभर में महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों को अब ईंधन कीमतों ने एक और बड़ा झटका दे दिया है। शुक्रवार से Petrol, Diesel और सीएनजी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का सीधा असर खासतौर पर दिल्ली-NCR में रोजाना आने-जाने वाले लाखों वाहन चालकों पर पड़ने वाला है। नई दरों के मुताबिक पेट्रोल की कीमत ₹94.77 से बढ़कर ₹97.77 प्रति लीटर और डीजल ₹87.67 से बढ़कर ₹90.67 प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं सीएनजी की कीमत भी बढ़कर करीब ₹79.09 प्रति किलो हो गई है।

इस बढ़ोतरी के बाद रोजाना निजी वाहनों से लंबी दूरी तय करने वाले लोगों का मासिक बजट पूरी तरह प्रभावित होने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रैफिक और बढ़ती ईंधन कीमतों का संयुक्त असर अब मध्यमवर्गीय परिवारों पर साफ दिखाई देगा।


दिल्ली-NCR के लाखों लोगों पर सीधा असर

दिल्ली से सटे नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम जैसे शहरों से हर दिन लाखों लोग नौकरी, कारोबार और अन्य कार्यों के लिए राजधानी पहुंचते हैं। इनमें से बड़ी संख्या निजी कार, बाइक और सीएनजी वाहनों का इस्तेमाल करती है।

विशेषज्ञों के अनुसार रोजाना 30 से 50 किलोमीटर एक तरफ की यात्रा करने वाले लोगों को अब हर महीने सैकड़ों रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं। खासतौर पर वे कर्मचारी जो पीक ऑवर में ट्रैफिक के बीच घंटों सड़क पर रहते हैं, उनके लिए यह बढ़ोतरी ज्यादा भारी साबित होगी।


ट्रैफिक में घटता माइलेज बना सबसे बड़ी परेशानी

ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में वाहन बेहतर माइलेज देते हैं, लेकिन ऑफिस टाइम के भारी ट्रैफिक में माइलेज तेजी से गिर जाता है। बार-बार ब्रेक लगाने, धीमी गति से चलने, लंबे समय तक इंजन ऑन रहने और लगातार एसी इस्तेमाल होने की वजह से ईंधन की खपत बढ़ जाती है।

एक सामान्य पेट्रोल कार जो सामान्य परिस्थितियों में लगभग 15 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है, वही दिल्ली-NCR के भारी ट्रैफिक में 11 से 12 किलोमीटर प्रति लीटर तक ही सीमित रह जाती है। इसी तरह डीजल और सीएनजी वाहनों की एवरेज भी 15 से 20 फीसदी तक कम हो जाती है।

यही कारण है कि कीमतों में मामूली दिखने वाली बढ़ोतरी भी महीने के अंत तक बड़ी आर्थिक मार में बदल जाती है।


ग्रेटर नोएडा से कनॉट प्लेस आने-जाने वालों पर सबसे ज्यादा असर

अगर ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के कनॉट प्लेस तक की दूरी को आधार माना जाए, तो यह लगभग 42 किलोमीटर एक तरफ पड़ती है। यानी रोजाना आने-जाने में करीब 84 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है।

पहले जहां एक पेट्रोल कार को इस दूरी के लिए करीब 5.5 से 6 लीटर पेट्रोल की जरूरत पड़ती थी, वहीं अब ट्रैफिक और बढ़ी कीमतों की वजह से यह खपत लगभग 7 लीटर तक पहुंच सकती है।

नई कीमतों के हिसाब से एक वाहन चालक को रोज करीब ₹22 से ₹25 अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। महीने के 26 कार्यदिवसों के हिसाब से यह अतिरिक्त खर्च लगभग ₹600 से ₹700 तक पहुंच सकता है।


सीएनजी और डीजल वाहन चालकों की भी बढ़ी चिंता

सिर्फ पेट्रोल वाहन ही नहीं, बल्कि सीएनजी और डीजल वाहन मालिकों की चिंता भी बढ़ गई है। सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद रोजाना लंबी दूरी तय करने वालों का खर्च लगातार बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि सीएनजी वाहन चालकों को रोजाना ₹8 से ₹10 तक अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है, जबकि डीजल वाहन उपयोग करने वालों की जेब पर लगभग ₹15 प्रतिदिन का अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है।

कई लोगों का कहना है कि पहले ही टोल टैक्स, पार्किंग और वाहन रखरखाव का खर्च काफी बढ़ चुका है, अब ईंधन कीमतों ने घरेलू बजट को और बिगाड़ दिया है।


महंगाई का असर अब हर घर तक पहुंचने की आशंका

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से रोजमर्रा के सामान, फल-सब्जियां, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ता है।

अगर ईंधन दरें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में बाजार में महंगाई और बढ़ सकती है। खासतौर पर शहरी इलाकों में रहने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों पर इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है।


कारपूल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरफ बढ़ सकता है रुझान

बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच अब कई लोग निजी वाहनों के बजाय मेट्रो, बस और कारपूल जैसे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। दिल्ली-NCR में पहले से ही ट्रैफिक जाम बड़ी समस्या बना हुआ है, ऐसे में ईंधन महंगा होने से लोग खर्च कम करने के नए तरीके तलाश सकते हैं।

ऑटो सेक्टर से जुड़े जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग भी तेजी से बढ़ सकती है, क्योंकि लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतें लोगों को वैकल्पिक ईंधन की तरफ धकेल रही हैं।


सोशल Media पर भी दिखा लोगों का गुस्सा

ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की नाराजगी देखने को मिली। कई यूजर्स ने बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता जताई, जबकि कुछ लोगों ने रोजमर्रा के खर्च बढ़ने की बात कही।

कुछ यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि अब ऑफिस जाने से पहले भी “बजट मीटिंग” करनी पड़ेगी। वहीं कई लोगों ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और मजबूत बनाने की मांग की।


Petrol, Diesel और सीएनजी की बढ़ती कीमतों ने दिल्ली-NCR के लाखों लोगों की जेब पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले कर्मचारियों, व्यापारियों और निजी वाहन चालकों के लिए यह बढ़ोतरी आने वाले महीनों में बड़ा आर्थिक दबाव बन सकती है। ट्रैफिक, घटते माइलेज और लगातार बढ़ते फ्यूल खर्च के बीच अब आम आदमी के सामने अपने मासिक बजट को संभालना पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

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