Health Update: हाई बीपी बन रहा युवाओं की Kidney का सबसे बड़ा दुश्मन, 80% गुर्दा रोगी उच्च रक्तचाप से पीड़ित
Health Update: देशभर में तेजी से बदलती जीवनशैली, तनाव, खराब खानपान और अनियमित दिनचर्या अब युवाओं की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। पहले जहां उच्च रक्तचाप और Kidney की बीमारियां बढ़ती उम्र के लोगों में अधिक देखी जाती थीं, वहीं अब कम उम्र के युवाओं में भी यह खतरा तेजी से बढ़ रहा है। राजधानी लखनऊ स्थित पीजीआई के गुर्दा रोग विभाग की हालिया जांच ने एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है।
जांच में पता चला है कि गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे करीब 80 फीसदी मरीज उच्च रक्तचाप यानी हाई बीपी से पीड़ित हैं। बीते डेढ़ महीने के दौरान पीजीआई की ओपीडी में पहुंचे लगभग छह हजार मरीजों में से 4800 लोगों में हाई ब्लड प्रेशर पाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़ा केवल एक अस्पताल का नहीं, बल्कि तेजी से बदलते स्वास्थ्य संकट का संकेत है।
साइलेंट किलर बन चुका है हाई ब्लड प्रेशर
डॉक्टरों ने उच्च रक्तचाप को “साइलेंट किलर” बताया है। इसकी सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआत में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। अधिकांश लोग वर्षों तक यह समझ ही नहीं पाते कि उनका ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ा हुआ है। जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो चुके होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार हाई बीपी धीरे-धीरे शरीर की धमनियों को नुकसान पहुंचाता है। दिल, दिमाग और किडनी तक रक्त पहुंचाने वाली नसों पर इसका गहरा असर पड़ता है। लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप किडनी की महीन रक्त वाहिकाओं को कमजोर कर देता है, जिससे गुर्दों की फिल्टर करने की क्षमता कम होने लगती है।
तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी युवाओं को बना रही बीमार
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली ने युवाओं को मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर प्रभावित किया है। लगातार काम का दबाव, करियर की चिंता, मोबाइल और स्क्रीन का अत्यधिक इस्तेमाल, नींद की कमी और फास्ट फूड का बढ़ता चलन शरीर के अंदर धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक आज 25 से 40 वर्ष की आयु के युवाओं में हाई बीपी और किडनी संबंधी समस्याएं तेजी से सामने आ रही हैं। तनाव के कारण शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे रक्तचाप बढ़ता है। यदि लंबे समय तक तनाव बना रहे तो इसका सीधा असर किडनी और हृदय पर पड़ता है।
कैसे खराब होती है Kidney ? समझिए पूरा संबंध
Kidney शरीर का बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को साफ करने, अतिरिक्त पानी और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करती है। जब ब्लड प्रेशर लगातार हाई रहता है, तो किडनी की रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ने लगता है।
धीरे-धीरे किडनी के फिल्टर कमजोर होने लगते हैं और शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं। स्थिति गंभीर होने पर मरीज को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट तक की जरूरत पड़ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार हाई बीपी और किडनी रोग एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। हाई बीपी किडनी को खराब करता है और खराब किडनी दोबारा ब्लड प्रेशर को और बढ़ा देती है। यही वजह है कि इसे बेहद खतरनाक चक्र माना जाता है।
युवाओं में बढ़ रही गलत आदतें बढ़ा रही खतरा
डॉक्टरों का कहना है कि आज के युवा कई ऐसी आदतों को अपनाए हुए हैं जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा रही हैं। इनमें शामिल हैं:
- अत्यधिक नमक और जंक फूड का सेवन
- देर रात तक जागना
- शारीरिक गतिविधियों की कमी
- लगातार तनाव में रहना
- धूम्रपान और शराब की आदत
- पर्याप्त पानी न पीना
- बिना डॉक्टर सलाह के दवाइयों का सेवन
इन आदतों का असर सीधे ब्लड प्रेशर और किडनी की कार्यक्षमता पर पड़ता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
हालांकि शुरुआती चरण में हाई बीपी के लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
- लगातार सिरदर्द
- चक्कर आना
- थकान और कमजोरी
- सांस फूलना
- पैरों में सूजन
- पेशाब में बदलाव
- सीने में भारीपन
- धुंधला दिखाई देना
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इनमें से कोई भी लक्षण लगातार महसूस हो तो तुरंत ब्लड प्रेशर और किडनी की जांच करानी चाहिए।
पीजीआई विशेषज्ञों की सलाह: नियमित जांच बेहद जरूरी
लखनऊ पीजीआई के विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर चेक कराएं। खासकर जिन लोगों के परिवार में हाई बीपी, डायबिटीज या किडनी रोग का इतिहास है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती अवस्था में यदि हाई बीपी को नियंत्रित कर लिया जाए तो किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है। इसके लिए समय पर दवा, संतुलित आहार और तनाव नियंत्रण बेहद जरूरी है।
कैसे रखें किडनी और दिल को स्वस्थ?
विशेषज्ञों ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी है। इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं:
- रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें
- नमक और तली-भुनी चीजों का सेवन कम करें
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
- धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं
- तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें
- पर्याप्त नींद लें
- नियमित हेल्थ चेकअप कराएं
डॉक्टरों का मानना है कि छोटी-छोटी सावधानियां भविष्य में बड़ी बीमारियों से बचा सकती हैं।
भारत में तेजी से बढ़ रही लाइफस्टाइल बीमारियां
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में लाइफस्टाइल डिजीज तेजी से बढ़ रही हैं। डायबिटीज, हाई बीपी, मोटापा और किडनी रोग अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गए हैं। शहरीकरण और तनावपूर्ण जीवनशैली के कारण युवा वर्ग भी इन बीमारियों की चपेट में आ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते लोगों में जागरूकता नहीं बढ़ाई गई, तो आने वाले वर्षों में किडनी रोग और हाई बीपी देश के लिए बड़ा स्वास्थ्य संकट बन सकते हैं।

