चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने ढूंढी लैंडर विक्रम की लोकेशन
इसरो के वैज्ञानिकों को चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की लोकेशन मिल गई है। लैंडर विक्रम चांद की सतह पर अपनी निर्धारित लोकेशन से पांच सौ मीटर की दूरी पर दिखाई दिया है। चांद के चक्कर काट रहे ऑर्बिटर ने लैंडर की थर्मल तस्वीर भेजी है। यह जानकारी खुद इसरो अध्यक्ष के सिवन ने देशवासियों को दी है। फिलहाल लैंडर से संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है लेकिन उससे संपर्क करने की कोशिशें लगातार जारी हैं। इसरो अध्यक्ष ने कहा कि जल्द ही लैंडर से संपर्क कर लिया जाएगा।शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग के समय इसरो का लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया था। 13 मिनट 48 सेकेंड तक सारी प्रक्रिया इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार चल रही थी। अचानक से आखिरी के डेढ़ मिनट में इसरो के कंट्रोल रूम से इसका संपर्क टूट गया। जिसके बाद वैज्ञानिकों के चेहरे पर मायूसी छा गई थी। वह काफी देर तक लैंडर से संपर्क साधने की कोशिश करते रहे लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ था।
विक्रम लैंडर से संपर्क टूटने से दुखी देशवासियों को इसरो ने नई सूचना से खुश कर दिया है। उसका कहना है कि चंद्रयान-2 के सटीक प्रक्षेपण और मिशन प्रबंधन की वजह से चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा ऑर्बिटर सात वर्ष तक काम करता रहेगा। पहले की गई गणना में इसकी उम्र एक वर्ष आंकी जा रही थी। साथ ही इसरो ने मिशन को 90 से 95 प्रतिशत तक सफल बताया है।
Indian Space Research Organisation (ISRO) Chief, K Sivan to ANI:We've found the location of #VikramLander on lunar surface&orbiter has clicked a thermal image of Lander. But there is no communication yet. We are trying to have contact. It will be communicated soon. #Chandrayaan2 pic.twitter.com/1MbIL0VQCo
— ANI (@ANI) September 8, 2019
कुछ देर बाद के सिवन ने बयान जारी करते हुए बताया था कि चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर पहले विक्रम लैंडर से हमारा संपर्क टूट गया। वैज्ञानिक फिलहाल आंकड़ों का अध्ययन करने में लगे हुए हैं। सॉफ्ट लैंडिंग के महत्वपूर्ण पलों का गवाह बनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसरो के बंगलूरू स्थित मुख्यालय पहुंचे थे। उनके साथ भारत के चंद्र मिशन के इतिहास का गवाह बनने के लिए देशभर से चुने हुए बच्चे भी मौजूद थे।

हालांकि जब वैज्ञानिकों का लैंडर से संपर्क तब वैज्ञानिकों को हिम्मत देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि आपने जो किया, वह कम बड़ी उपलब्धि नहीं है। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि आप छोटी-छोटी गलतियों से सीखते हैं। आपने देश की और मानव जाति की बड़ी सेवा की है। हम आशान्वित हैं और अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम पर कड़ी मेहनत करना जारी रखेंगे।

इसरो के पूर्व वैज्ञानिक डी ससीकुमार ने शनिवार को कहा था कि चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर से संपर्क क्रैश लैंडिंग के कारण नहीं टूटा होगा। उन्होंने कहा था, ‘मुझे लगता है, ये क्रैश लैंडिंग नहीं थी क्योंकि लैंडर और ऑर्बिटर के बीच का संपर्क चैनल अब भी चालू है।’ ससीकुमार ने आगे बताया था कि जो संपर्क डाटा खो गया है उसका फिलहाल विश्लेषण किया जा रहा है। चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं। पहला ऑर्बिटर, दूसरा लैंडर विक्रम और तीसरा रोवर प्रज्ञान। लैंडर-रोवर को दो सिंतबर को ऑर्बिटर से अलग किया गया था। ऑर्बिटर इस समय चांद से करीब 100 किलोमीटर ऊंची कक्षा में चक्कर लगा रहा है।
इसरो प्रमुख के सिवन ने शनिवार को चंद्रयान-2 मिशन को 95 फीसदी सफल बताया था। डीडी न्यूज से बातचीत में सिवन ने कहा था कि विक्रम लैंडर से संपर्क करने की कोशिश जारी है। उन्होंने कहा था कि विक्रम लैंडर से दोबारा संपर्क बनाने के लिए प्रयास जारी हैं। हम अगले 14 दिन तक इसके लिए कोशिश करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि आखिरी चरण ठीक से पूरा नहीं किया जा सका, उसी चरण में हमने विक्रम से संपर्क खो दिया। चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर 7.5 साल तक काम कर सकता है।
भारत की अंतरिक्ष एजेंसी का जज्बा भी कायम है। अब वह चांद पर बड़े मिशन की तैयारी कर रहा है। इसरो का अगला मून मिशन पहले से बेहतर और बड़ा होगा। माना जा रहा है कि यह मिशन चांद के ध्रुवीय क्षेत्र से सैंपल ला सकता है।
चांद के ध्रुवीय क्षेत्र में शोध के इस मिशन को इसरो जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जाक्सा) के साथ साझेदारी में करेगा। इसरो ने एक बयान में कहा, ‘इसरो और जाक्सा के वैज्ञानिक चांद के ध्रुवीय क्षेत्र में शोध करने के लिए एक संयुक्त सैटेलाइट मिशन पर काम करने की संभावना पर विचार कर रहे हैं।’ चंद्रयान-2 की घोषणा 2008 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान हुई थी। उस समय इसे रूस के साथ अंजाम देने की योजना थी।
अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस को चंद्रयान-2 के लिए लैंडर उपलब्ध कराना था। हालांकि यह योजना किसी वजह से आगे वहीं बढ़ पाई जिसके बाद 2012 में इसरो ने अकेले इसे पूरा करने का निर्णय लिया। इस साल जुलाई में जाक्सा ने क्षुद्रग्रह पर अपने हायाबुसा मिशन-2 को सफलतापूर्वक उतारा था। इस मुश्किल मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर जापान ने अपनी तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाया है। जाक्सा का यह मिशन क्षुद्रग्रह पर शोध करने से संबंधित था।
इसरो और जाक्सा के संयुक्त मिशन को 2024 में लागू किया जाएगा। इससे पहले 2022 में भारत का प्रस्तावित गगनयान मिशन है जिसके तहत मानव को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। पहली बार भारत और जापान के संयुक्त मून मिशन को लेकर 2017 में सार्वजनिक तौर पर बात की गई थी। यह बातचीत मल्टी स्पेस एजेंसियों की बंगलूरू में हुई बैठक के दौरान हुई थी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब 2018 में जापान गए तो यह अंतरसरकारी बातचीत का भी हिस्सा था।
