कोर्ट खुलने पर चार बेकसूरों की होगी रिहाई-बुजुर्ग बीमार के परिवार को नहीं बख्शा
मुजफ्फरनगर। शहर में उपद्रव के बाद पुलिस ने कई बेगुनाहों को जेल भेज दिया है। निर्दोषों की फेहरिस्त में बीमार बुजुर्ग को मेरठ दिखाने के लिए ले जा रहे परिवार के सदस्यों को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
उधर, शहर में हुए उपद्रव के बाद पुलिस की कार्रवाई की चपेट में आए चार बेकसूरों को अभी कुछ दिन और जेल में गुजारने होंगे। जांच में पुलिस इन चारों को निर्दोष मानते हुए न्यायालय में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर चुकी है, लेकिन 31 दिसंबर तक कोर्ट की छुट्टी होने के कारण रिहाई नहीं हो पा रही। जेल में बंद इन बेकसूरों में जिला सेवायोजन कार्यालय का लिपिक फारूक और अपने घर के बुजुर्ग को मेरठ के हॉस्पिटल में ले जा रहे एक ही परिवार के तीन सदस्य शामिल हैं।
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए उपद्रव के बाद कई बेकसूरों को भी जेल भेज दिया गया है। चार मामले ऐसे सामने आए हैं, जिनमें पुलिस ने खुद अपनी गलती स्वीकार कर ली है। इनमें जिला सेवायोजन कार्यालय के लिपिक फारूक को उस हालत में सिविल लाइन पुलिस ने जेल भेज दिया, जब वह पूरे दिन अपने कार्यालय में ड्यूटी पर रहे। उनकी बेगुनाही के तमाम सबूत सामने आने के बाद डीएम सेल्वा कुमारी जे ने उसकी रिहाई के आदेश दिए। 20 दिसंबर की रात में उन्हें घर से पकड़ा गया और 21 दिसंबर को जेल भेज दिया गया।
24 दिसंबर को उनकी रिहाई की रिपोर्ट न्यायालय में पेश कर दी गई। इसी तरह अपने परिवार के बुजुर्ग यूनुस को मेरठ के हॉस्पिटल में ले जा रहे शहर के उद्यमी खालिद, उनके बेटे सुहेल और परिवार के अतीक को कोतवाली पुलिस ने 21 दिसंबर को पकड़कर जेल भेज दिया था। इनका पूरा मामला सामने आने के बाद पुलिस बैकफुट पर आई और 24 दिसंबर को ही इनकी रिहाई के लिए भी रिपोर्ट न्यायालय में भेजी। कोर्ट की 31 दिसंबर तक छुट्टी होने के कारण बेकसूर होते हुए भी इनमें किसी की भी रिहाई नहीं हो पाई है। एक जनवरी को कोर्ट खुलने के बाद ही इनकी रिहाई की उम्मीद है।
हमने 24 दिसंबर को रिहाई की रिपोर्ट भेज दी-एसआईटी के जांच अधिकारी देवकीनंदन निवासी 24 दिसंबर को फारूक का मामला उनके सामने आया। उन्होंने उनकी रिहाई की कार्रवाई पूरी कर इसी दिन न्यायालय में पेश कर दी। शहर कोतवाली के खालिद, उनके बेटे सुहेल और अतीक के मामले की जांच उनके साथी राजेंद्र प्रसाद यादव ने की, उन्होंने भी रिपोर्ट न्यायालय में पेश कर दी है। कोर्ट खुलने पर ही रिहाई होगी।
पुलिस ने निर्दोषों को भेजा जेलः दीपक कुमार-कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री दीपक कुमार का कहना है कि पुलिस ने कई निर्दोष लोगों को जेल भेज दिया है। चार मामलों में तो पुलिस खुद ही अपनी गलती स्वीकार कर चुकी है। ऐसे में निर्दोष लोगों की गिरफ्तारी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन होगा।
