ग्राम बुडीना कलां में हरेला धूमधाम से मनाया गया: पर्यावरण के प्रति जागरूक किया
मुजफ्फरनगर। ग्राम बुडीना कलां में उत्तराखंड के पारंपरिक लोक पर हरेला जोकि प्रकृति का संतुलन बनाए रखने और पर्यावरण के अंतरसंबंधों का अनूठा पर्व है वृक्षारोपण कर बड़ी धूमधाम से मनाया गया।
इस अवसर पर लोगों को जागरूक करते हुए हैं ग्राम बुडीना कलाँ निवासी राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत डॉ कपिल शर्मा ने बताया कि हवा, पानी, मिट्टी, जंगल और जानवर यह पांच जीवन के मूलभूत आधार है और कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य व पर्यावरण चार ऐसे क्षेत्र हैं जिनके आधार पर किसी भी देश की आर्थिक व सामाजिक स्थिति का आकलन किया जा सकता है
लेकिन दुर्भाग्य से हवा,पानी, मिट्टी बुरी तरीके से दूषित हो चुकी है जंगलों का कटान तेजी से हो रहा है और जीव-जंतुओं की अनेको प्रजातियां विलुप्त हो चुकी है जिससे कि मनुष्य के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। उत्तराखंड का लोक पर्व हरेला हमारे पूर्वजों की पर्यावरण के प्रति दूरगामी सोच का परिणाम है
जोकि पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला पर्व है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ब्रज प्रांत के प्रांत प्रचारक पर्यावरण प्रेमी डॉक्टर हरीश रौतेला जी की मुहिम के कारण आज हरेला उत्तराखंड समेत पूरे भारतवर्ष के साथ-साथ विश्व के अनेक देशों जैसे अमेरिका, इंग्लैंड,ऑस्ट्रिया, जर्मनी, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया,न्यूजीलैंड, दुबई जैसे देशों में भी प्रवासी भारतीय द्वारा धूमधाम से मनाया जाता है।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिकीकरण नगरीकरण व बढ़ती जनसंख्या के कारण जिस प्रकार पृथ्वी के तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है और परिणामस्वरुप ग्लेशियर बहुत तेजी से पिघल रहे हैं यह चिंता का विषय है।
अनेकों पर्यावरण संबंधित समस्याएं जैसे ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन,ओजोन परत छिद्र,अम्ल वर्षा आदि मनुष्य द्वारा जनित समस्या है जिनको वृक्षारोपण कर काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। वृक्ष देश की समृद्धि और उन्नति का प्रतीक है पेड़ ऑक्सीजन देने के साथ-साथ वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड कभी अवशोषण करते हैं
जो कि मुख्य अतिथि कैसे हैं और वैश्विक तापन और जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार हैं। वघ्क्ष वायुमंडल से विभिन्न प्रकार के प्रदूषक जैसे धूल मिट्टी के कण, जहरीली गैसे आदि का भी अवशोषण करते हैं।
फलदार वृक्ष ग्रामीण इलाकों में आए का अच्छा स्रोत हैं और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करते हैं।उन्होंने लोगो को बताया कि हरेला जैसे त्यौहार न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है बल्कि आर्थिक व समृद्धि का भी आधार बनते हैं, हरेले पर ज्यादा से ज्यादा फलदार वृक्ष लगाकर हम अपनी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर सकते हैं और जीव-जंतुओं को जीने का अधिकार दे सकते हैं। हमे पर्यावरण के सभी घटकों सूक्ष्मजीवों से लेकर बड़े जीव जन्तुओ पेड़ पौधों सभी को संरक्षित करना होगा और सतत विकास की परिकल्पना को चरितार्थ कर प्रत्यके जीवजंतु के साथ सामंजस्य बैठाकर विकास के पथ पर आगे बढ़ना होगा।
ये पृथ्वी हमारी माता है और इसपर निवास करने वाले सभी जीव जन्तुओ का भी इस पर उतना ही अधिकार है जितना कि मनुष्यो का ऐसे विचार हमेशा दिमाग में रखकर यथासंभव पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक प्रयास करते रहना चाहिए।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान अजय मलिक ने लोगों से आह्वान किया कि गाँव को साफ स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए सब अपना सहयोग दे व अपनी आने वाली पीढ़ियों को एक साफ, स्वच्छ, सुंदर व प्रदूषणमुक्त वातावरण में जीने का अधिकार दे।
सभ्यता फाउंडेशन के अध्यक्ष पुष्पेंदर आर्य ने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि शुभ अवसरों पर एक दूसरे को पेड़ उपहार में दे व पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में अपना योगदान दे।
मुख्य रूप से पंडित अशोक शर्मा पंडित सुभाष शर्मा सोमपाल मलिक पंडित राम रामकिशन शर्मा शिवम शर्मा नितिन पंडित गौरव शर्मा हार्दिक शर्मा सत्यपाल शर्मा कपिल चौधरी पुष्पेंदर आर्य संजीव शर्मा बंटी पंडित जी आदि लोग मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

