स्वास्थ्य

क्या आप नपुंसक हो गए हैं? तो होम्योपैथिक से मनाएं उपचार

किसी कारणवश सेक्स की इच्छा न होना , कम होना . किसी असमर्थतावश स्त्री – संभोग नहीं कर पाना , चाहे वह मानसिक कारण से हो , शारीरिक कारण से हो नपुंसकता कहलाती है 

मन में सेक्स करने की कितनी भी प्रचंड इच्छा हो पर संभोग करने में असमर्थ है तो भी नपुंसकता कहलाएगी , शिश्न में स्पंज जैसी दो नालिकाएँ होती हैं

जब पुरुष संभोग के बारे में सोचता है , स्त्री से बातचीत करता है , कामुक किताब पढ़ता है , यानि सेक्स की बात दिमाग में आते ही इन नालिकाओं में रक्त – प्रवाह बढ़ जाता है 

इसके परिणाम स्वरूप ही शिश्न में दृढ़ता आती है . भन में कामोत्तेजना होते ही मन द्वारा प्रेरित सायक्लिक जीएमपी नामक एक रासायनिक द्रव्य शिश्न में जाता है

यह द्रव्य शिश्न स्थित रक्तवाहिनियों को थोड़ा विस्फारित करते हैं , फलस्वरूप रक्त उन वाहनियों में भर जाता है . सायक्लिक जीएमपी की कमी के कारण नपुंसक पुरुष के शिश्न के स्नायु का विस्फार नहीं हो पाता 

जिस कारण ऐसे पुरुष के शिश्न का उत्थान नहीं होता या कम होता है . ऐसे व्यक्ति संभोग का आनंद नहीं ले पाते . नपुंसकता के कारण + चिन्ता एवं तनाव , शोक , सदमा , दुःख होने पर  पत्नी का सहयोग न देना . –पति – पत्नी के बीच घृणा का भाव .

+ मैथुन के प्रति पाप की भावना से उत्पन्न भय ,  पत्नी को संतुष्ट न कर पाने का वहम . लिंग का अविकसित होना , लिंग में पूर्ण रूप से उत्थान न होना .

– लिंग में सूजाक , सिफिलिस इत्यादि जैसे गंभीर गुप्त रोग हो जाना . • हस्तमैथुन या अप्राकृतिक मैथुन के कारण लिंग में दोष उत्पन्न होना . २ लिंग का स्वरूप अनुवांशिक कारण से विकृतिपूर्ण होना 

हाजमा का खराब होना , कब्ज , लीवर या पाचन तंत्र का रोग होना . २ कोई कठिन बीमारी जैसे – टाइफाइड , किडनी , प्रोस्टेट , हाइड्रोसिल बढ़ने पर , दिल की बीमारी 

डायबिटीज होने पर या कठिन बीमारी भोगने के बाद . + नशा का सेवन जैसे – शराब , खैनी , ड्रग्स , तम्बाकू , गुटका , अफीम , भांग , गांजा आदि के सेवन से साइकिल की अधिक सवारी 

पेट का अधिक बाहर होने पर , मोटापा , अत्यधिक मानसिक व शारीरिक श्रम करने पर .

नपुंसकता के लक्षण-

मैथुन करने में असमर्थ . + सेक्स करने के प्रति इच्छा का अभाव . लिंग कर थोड़े समय के लिए ही खड़ा रह पाना . २ लिंग उत्थान का पूर्ण अभाव . – लिंग का योनि प्रवेश के पहले या साथ ही शीघ्रपतन हो जाना . 

शारीरिक कमजोरी . चक्कर , सुस्ती , बेचैनी . हमेशा नींद लगना . + अकेले रहने की इच्छा , किसी से बात नहीं करना चाहता . २ किसी भी काम में मन नहीं लगना . याददास्त की कमी , तुरन्त पढ़ा हुआ भूल जाना . हमेशा चिन्तीत रहना .  बार – बार पेशाब होना .  पखाना – पेशाब करने पर वीर्यक्षय हो जाना 

होमियोपैथिक उपचार-

२ लाइकोपोडियम : -रोगी में कामवासना का अभाव न होना परन्तु मैथुन करने में असमर्थ होना . लिंग का शिशिल होना एवं बहुमैथुन का आदी होना

शीघ्रपतन होना .

२ कल्केरिया कार्ब : – संभोग क्रिया के बाद अत्यधिक शारीरिक दर्द महसूस होना , बहुत ज्यादा कमजोरी आ जाना एवं संभोग क्रिया के बीच में ही लिंग में उत्तेजना का ह्रास हो जाना .

छोफाइटिस : – संभोग के समय लिंग में उत्तेजना का अभाव एवं लिंग का बिना स्खलन हुए ही शिथिल हो जाना .

साइलीशिया : – माथे एवं पैरों में पसीना आना , संभोग की लालसा न होना , गुप्त रोगों से ग्रसित होना एवं वीर्य के साथ रक्त आना . 

फास्फोरस : – यदि कोई अत्यधिक कामी प्रवृत्ति का रहा हो तो अत्यधिक सेक्स की वजह से नपुंसकता आने पर बहुत फायदा करती है . मरीज लंबा , पतला तथा कमजोर होता है .

I2 ओनोस्मोडियम : – कामेच्छा एकदम नहीं रहती . स्मरण शक्ति भी घट जाती है . रोगी में अत्यधिक हीन भावना आ जाती है एवं वह स्वयं को नपुंसक समझने लगता है , कभी – कभी लिंग में थोड़ा कड़ापन आता है , परन्तु स्त्री सहवास के समय जल्दी ही वीर्य स्खलन हो जाता है .

कोनियम मैक : – जबरदस्ती परिस्थितिवश अपने सेक्स को रोकने के फलस्वरूप उत्पन्न नपुंसकता . वैसे विधुर या विधवाओं को जबरदस्ती सेक्स से संयम करना पड़ता है . इसलिए कभी जबरदस्ती सेक्स से संयम करना पड़ता है . इसलिए कभी जबरदस्ती ब्रह्मचर्य का पालन नहीं करना चाहिए .

– अर्निका माउण्ट : – चोट लगने से उत्पन्न हुई नपुंसकता में उपयोगी . – सिनापिस : – संभोग के दौरान अगर भय से नपुंसकता हो तो उपयोगी . – मर्क सॉल : – उपदंश से उत्पन्न नपुंसकता . –

कैली ब्रोमेटम : – याददास्त की कमी के साथ नपुंसकता या शीघ्रपतन . →

स्ट्रायचिनम फॉस्फोरिकम : – काल्पनिक नपुंसकता . 

स्टेफिसेनिया : – अत्यधिक इन्द्रिय परिचालन या हस्तमैथुन की वजह से नपुंसकता आने पर सर्वाधिक उपयोगी . रोगी की आँखों के चारों ओर गड्ढे पड़ जाते हैं . शरीर व मन बोझिल बना रहना . मन चिड़चिड़ा किसी काम में मन नहीं लगता . 

कैलेडियम : – संभोग करने की अदम्य इच्छा पर शक्तिविहीन . यदि हस्तमैथुन और स्वप्नदोष होकर नपुंसकता हो तो यह फायदा करती है . नींद आने पर लिंग में कड़ापन आता है , परन्तु जागने पर लिंग सुस्त हो जाता है .

+ एसिड फॉस 0,30 : – इसका रोगी हताश व निराश रहता है . अत्यधिक स्वप्नदोष या अति हस्तमैथुन के कारण नपुंसकता . वीर्य पैखाना या पेशाब करते समय बाहर आ जाता है . –

सैलिक्स नाइग्रा 0 : – पुरूष जननेन्द्रियों पर इसकी प्रधान क्रिया है . सूजाक और शुक्रमेह में अधिक व्यवहार होता है . पेशाब – पैखाना के समय जोर लगाने पर वीर्य क्षय होना . स्वप्नदोष रोकने की सर्वोत्तम औषधि . अगर बीमारी का कारण हस्तमैथुन या अप्राकृतिक मैथुन रहा हो तो और भी उपयोगी . इसमें सेक्स करने की प्रबल इच्छा होती है पर सेक्स – शक्ति का अभाव होता है .

+ डेमियाना 0 नपुंसकता की मुख्य औषधि . यह स्त्री – पुरुष दोनों के लिए उपयोगी है . यह एक बाजीकारक और शुक्रवर्द्धक दवा है . लिंग में कड़ापन नहीं आना , स्नायविक दुर्बलता , शुक्रपतन आदि बीमारियों में आशातीत सफलता मिलती है .

 अश्वगंधा : – स्त्री संभोग करने से आयी कमजोरी , स्नायविक कमजोरी , रमरण शक्ति में कमी . इससे वीर्य गादा होता है . स्त्री पुरुषों के लिए समान रूप से उपयोगी .

नुफर ल्यूटियम 0 : – स्त्री संभोग की इच्छा का पूर्ण अभाव , स्वप्नदोष , जननेन्द्रियाँ ढीली और सिकुड़ी , धातु का पतलापन , मल या मूत्र त्यागने में वेग देने पर शुक्रक्षय ,

२ सेलेनियम : – सेक्स की इच्छा प्रबल ; परन्तु शारीरिक नपुंसक . कामोत्तेजक कल्पनाएँ हमेशा करता है पर शक्ति नहीं होती . सपने में , चलते – फिरते भी वीर्यपात हो जाना . अधिक हस्तमैथुन , स्त्री भोग करने से उत्पन्न हुए नपुंसकता में उपयोगी .

 नाइट्रिक एसिड : – पूर्ण ध्वजभंग के कारण संभोग की इच्छा बिलकुल नहीं रहती . यौनांग इतना टीला और निस्तेज हो जाता है कि स्त्री संभोग नहीं हो पाता . –

ट्रिव्युलस टेरेस्ट्रिस 0 : हस्तमैथुन करने से उत्पन्न ध्वजभंग , संभोग शक्ति की कमी . वृद्धावस्था की नपुंसकता में उपयोगी . इससे स्वप्नदोष और प्रोस्टैटाइटिस की बीमारी भी ठीक होती है .

– योहिम्बयम 0 : – यह नपुंसकता की सफल औषधि है . इसके सेवन से कामोत्तेजना होती है . यह उनलोगों को सेवन नहीं करनी चाहिए जो उदर रोगों से किसी भी रूप में पीड़ित हो .

नक्स वोमिका : – शराब के सेवन के कारण उत्पन्न नपुंसकता की बेहतरीन दवा 

 

 

Tiwari Abhi Min |

Ved |

लेखक:

डा0 वेद प्रकाश विश्वप्रसिद्ध प्राकृतिेक एवं होमियोपैथी चिकित्सक हैं। जन सामान्य की भाषा में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को घर घर पहुँचा रही “रसोई चिकित्सा वर्कशाप” डा0 वेद प्रकाश की एक अनूठी पहल हैं। उनसे नम्बर 8709871868 पर सीधे सम्पर्क किया जा सकता हैं और ग्रीन स्टार फार्मा द्वारा निर्मित दवाईयाँ भी घर बैठे मंगवाई जा सकती हैं।

 

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