Pakistan का ‘आतंकी सच’ बेनकाब! Hizbul डिप्टी चीफ का बड़ा कबूलनामा- कश्मीर के कब्रिस्तानों में दफन हैं पाकिस्तानी आतंकी
News-Desk
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Pakistani Terrorists in Kashmir को लेकर सामने आए इस बयान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पाकिस्तान दशकों से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और सीमा पार से होने वाली घुसपैठ में अपनी भूमिका से इनकार करता रहा है। अब हिजबुल मुजाहिदीन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के कथित सार्वजनिक बयान ने पाकिस्तान के पुराने दावों और उसकी आधिकारिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शमशीर खान ने दावा किया कि कश्मीर में शायद ही कोई ऐसा कब्रिस्तान होगा, जहां पाकिस्तान से गए आतंकियों की कब्रें मौजूद न हों।
हिजबुल के डिप्टी चीफ का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है और पाकिस्तान पर आतंकी संगठनों को संरक्षण, प्रशिक्षण तथा घुसपैठ में सहायता देने के आरोप लगाता रहा है।
हिजबुल डिप्टी चीफ शमशीर खान के बयान से मची हलचल
हिजबुल मुजाहिदीन के डिप्टी चीफ शमशीर खान के बयान को सामान्य टिप्पणी के बजाय एक महत्वपूर्ण स्वीकारोक्ति के रूप में देखा जा रहा है।
मुजफ्फराबाद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान शमशीर ने पाकिस्तान से कश्मीर गए आतंकियों और वहां मौजूद उनकी कब्रों का उल्लेख किया।
उसने कहा, “कश्मीर का कोई कब्रिस्तान ऐसा नहीं है, जहां पाकिस्तान से आए आतंकियों की कब्र न हो।”
यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि पाकिस्तान की ओर से लंबे समय से यह दावा किया जाता रहा है कि जम्मू-कश्मीर में होने वाली आतंकी गतिविधियों से उसका कोई संबंध नहीं है।
लेकिन हिजबुल मुजाहिदीन के वरिष्ठ कमांडर की ओर से पाकिस्तानी आतंकियों की कश्मीर में मौजूदगी और वहां उनके मारे जाने की बात स्वीकार किए जाने को पाकिस्तान के पुराने दावों के विपरीत देखा जा रहा है।
कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों की कब्रों का दावा क्यों है महत्वपूर्ण?
शमशीर खान के बयान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कश्मीर के कब्रिस्तानों को लेकर किया गया दावा है।
उसने सार्वजनिक रूप से कहा कि पाकिस्तान से कश्मीर पहुंचे आतंकी वहां मारे गए और उनकी कब्रें कश्मीर में मौजूद हैं।
यदि किसी आतंकी संगठन का वरिष्ठ पदाधिकारी स्वयं पाकिस्तान से आतंकियों के कश्मीर जाने की बात स्वीकार करता है, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि वे लोग सीमा पार करके कश्मीर तक कैसे पहुंचे।
भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद फैलाने के लिए किया जाता है।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां लगातार यह कहती रही हैं कि सीमा पार मौजूद आतंकी ठिकानों पर आतंकियों को प्रशिक्षण देने के बाद घुसपैठ के माध्यम से जम्मू-कश्मीर भेजने की कोशिश की जाती है।
दशकों से आतंकवाद से संबंध नकारता रहा पाकिस्तान
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान का आधिकारिक रुख लंबे समय से इनकार का रहा है।
पाकिस्तान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका जम्मू-कश्मीर में होने वाली आतंकी गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं है।
भारत की ओर से पाकिस्तान पर लगाए जाने वाले सीमा पार आतंकवाद, आतंकी प्रशिक्षण और घुसपैठ में मदद के आरोपों को भी इस्लामाबाद नकारता रहा है।
लेकिन समय-समय पर आतंकवादी संगठनों से जुड़े लोगों के बयान और अन्य घटनाक्रम पाकिस्तान के इन दावों पर सवाल खड़े करते रहे हैं।
अब हिजबुल मुजाहिदीन के डिप्टी चीफ शमशीर खान का बयान एक बार फिर पाकिस्तान की भूमिका को लेकर बहस तेज कर सकता है।
‘कश्मीर का कोई कब्रिस्तान ऐसा नहीं…’, बयान ने खोले पुराने जख्म
शमशीर खान की ओर से दिया गया बयान बेहद गंभीर माना जा रहा है।
कश्मीर के कब्रिस्तानों में पाकिस्तान से गए आतंकियों की कब्रें होने का दावा केवल आतंकियों की मौजूदगी स्वीकार करने तक सीमित नहीं है।
यह बयान उन वर्षों की ओर भी इशारा करता है, जब जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर आतंकवाद और घुसपैठ की घटनाएं सामने आती रही हैं।
पिछले कई दशकों में भारतीय सुरक्षाबलों ने विभिन्न आतंकवाद विरोधी अभियानों में बड़ी संख्या में आतंकियों को मार गिराया है।
इनमें कई आतंकियों के पाकिस्तानी नागरिक होने के आरोप भी सामने आते रहे हैं।
हिजबुल मुजाहिदीन के वरिष्ठ कमांडर का कबूलनामा बना चर्चा का विषय
हिजबुल मुजाहिदीन लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय प्रमुख आतंकी संगठनों में गिना जाता रहा है।
ऐसे संगठन के डिप्टी चीफ स्तर के पदाधिकारी द्वारा पाकिस्तान से कश्मीर गए आतंकियों का उल्लेख किया जाना अपने आप में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
आमतौर पर पाकिस्तान और वहां सक्रिय आतंकी संगठनों की ओर से सीमा पार आतंकवाद के आरोपों को खारिज करने का प्रयास किया जाता रहा है।
लेकिन इस बार बयान सीधे संगठन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की ओर से सामने आया है।
यही कारण है कि इसे पाकिस्तान से कश्मीर में आतंकियों की मौजूदगी को लेकर एक खुली स्वीकारोक्ति के रूप में देखा जा रहा है।
मुजफ्फराबाद के कार्यक्रम में दिया गया विवादित बयान
यह बयान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया।
कार्यक्रम में बोलते हुए शमशीर खान ने कश्मीर और वहां मारे गए आतंकियों का उल्लेख किया।
उसने दावा किया कि पाकिस्तान से बड़ी संख्या में लोग कश्मीर गए और वहां मारे गए।
इसके बाद उसने कश्मीर के कब्रिस्तानों को लेकर टिप्पणी की।
इस बयान के सामने आने के बाद आतंकवाद और पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
भारत लंबे समय से उठाता रहा है सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा
भारत कई दशकों से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है।
भारतीय पक्ष का कहना रहा है कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों को प्रशिक्षण, हथियार और अन्य सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
इसके बाद प्रशिक्षित आतंकियों को नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कराने की कोशिश होती है।
भारतीय सुरक्षाबलों ने समय-समय पर घुसपैठ की ऐसी कई कोशिशों को नाकाम किया है।
भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी लगातार यह मुद्दा उठाता रहा है।
क्या पाकिस्तान के पुराने दावों पर भारी पड़ेगा हिजबुल कमांडर का बयान?
शमशीर खान के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल पाकिस्तान के आधिकारिक रुख को लेकर उठ रहा है।
यदि पाकिस्तान से आतंकी कश्मीर गए, वहां सक्रिय रहे और सुरक्षाबलों के अभियानों में मारे गए, तो पाकिस्तान के लंबे समय से किए जा रहे इनकार पर सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है।
हिजबुल के डिप्टी चीफ के बयान ने इसी विरोधाभास को उजागर किया है।
एक ओर पाकिस्तान आतंकवाद से किसी प्रकार का संबंध न होने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी संगठन का वरिष्ठ कमांडर सार्वजनिक रूप से पाकिस्तानी आतंकियों की कश्मीर में मौजूद कब्रों का जिक्र कर रहा है।
आतंकी प्रशिक्षण और घुसपैठ को लेकर भारत के आरोप
भारत का आरोप रहा है कि पाकिस्तान में आतंकियों के लिए प्रशिक्षण शिविर संचालित होते रहे हैं।
इन शिविरों में आतंकियों को हथियार चलाने, विस्फोटक तैयार करने और घुसपैठ से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाने के आरोप लगते रहे हैं।
इसके बाद आतंकियों को जम्मू-कश्मीर में भेजने की कोशिश की जाती है।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कई बार ऐसी घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम किए जाने की जानकारी सामने आती रही है।
अब शमशीर खान का बयान इन पुराने आरोपों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कश्मीर के कब्रिस्तान और पाकिस्तानी आतंकी, बयान से उठे कई सवाल
हिजबुल मुजाहिदीन के डिप्टी चीफ ने जिस तरह कश्मीर के कब्रिस्तानों का जिक्र किया, उससे कई गंभीर सवाल पैदा हुए हैं।
पाकिस्तान से कितने आतंकी जम्मू-कश्मीर पहुंचे?
उन्हें किस तरह सीमा पार कराई गई?
उन्हें प्रशिक्षण और हथियार कहां से मिले?
कश्मीर पहुंचने में उनकी किसने मदद की?
और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान की जानकारी के बिना इतने बड़े स्तर पर आतंकियों की आवाजाही संभव थी?
शमशीर खान के बयान के बाद ऐसे सवाल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
सीमा पार आतंकवाद भारत के लिए दशकों पुरानी चुनौती
जम्मू-कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद भारत के लिए लंबे समय से गंभीर सुरक्षा चुनौती रहा है।
आतंकी हमलों में सुरक्षाबलों के जवानों के साथ बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई है।
कश्मीर घाटी ने पिछले कई दशकों में आतंकवाद का लंबा और दर्दनाक दौर देखा है।
सुरक्षाबलों की ओर से लगातार आतंकवाद विरोधी अभियान चलाए गए हैं।
घुसपैठ रोकने के लिए नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है।
आतंकियों की मौजूदगी से हमेशा इनकार करता रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने ऊपर लगने वाले आतंकवाद संबंधी आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है।
इस्लामाबाद की ओर से यह दावा किया जाता रहा है कि पाकिस्तान स्वयं आतंकवाद का शिकार है।
लेकिन भारत का आरोप है कि पाकिस्तान ने लंबे समय तक अपनी जमीन पर भारत विरोधी आतंकी संगठनों को पनपने दिया।
अब हिजबुल के वरिष्ठ कमांडर के बयान ने पाकिस्तान के पुराने रुख को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला दिया है।
आतंकी संगठन के मंच से आया बयान बढ़ा सकता है पाकिस्तान की मुश्किल
शमशीर खान का बयान किसी राजनीतिक नेता या स्वतंत्र टिप्पणीकार की ओर से नहीं आया है।
यह बयान हिजबुल मुजाहिदीन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की ओर से दिया गया है।
यही कारण है कि इस टिप्पणी का महत्व बढ़ जाता है।
किसी आतंकी संगठन के अंदर महत्वपूर्ण पद पर मौजूद व्यक्ति का पाकिस्तान से कश्मीर गए आतंकियों का उल्लेख करना भारत के लंबे समय से लगाए जा रहे आरोपों को लेकर नई बहस पैदा कर सकता है।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी संगठनों की मौजूदगी पर सवाल
भारत लंबे समय से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी संगठनों और उनके बुनियादी ढांचे की मौजूदगी को लेकर चिंता जताता रहा है।
मुजफ्फराबाद से सामने आया शमशीर खान का बयान भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
सवाल यह है कि एक आतंकी संगठन का वरिष्ठ पदाधिकारी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान इस प्रकार का बयान कैसे दे रहा है।
यह घटनाक्रम पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी प्रतिबद्धताओं को लेकर भी सवाल खड़े कर सकता है।
कश्मीर में आतंकवाद ने हजारों परिवारों को दिए गहरे जख्म
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद केवल राजनीतिक या सुरक्षा से जुड़ा विषय नहीं है।
इसके कारण हजारों परिवारों को अपनों को खोना पड़ा है।
आतंकी हमलों में आम नागरिकों, पुलिसकर्मियों और सुरक्षाबलों के जवानों की जान गई है।
कई परिवार दशकों से आतंकवाद की पीड़ा झेलते रहे हैं।
ऐसे में पाकिस्तानी आतंकियों की कश्मीर में मौजूदगी से जुड़ा किसी वरिष्ठ आतंकी कमांडर का बयान बेहद संवेदनशील और गंभीर माना जा रहा है।
आतंकवाद पर पाकिस्तान के दोहरे रवैये को लेकर फिर बहस
शमशीर खान के बयान के बाद पाकिस्तान के कथित दोहरे रवैये को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो सकती है।
पाकिस्तान एक ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का दावा करता है।
दूसरी ओर भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान की जमीन पर भारत विरोधी आतंकी संगठन सक्रिय हैं।
अब हिजबुल मुजाहिदीन के डिप्टी चीफ की ओर से पाकिस्तान से कश्मीर गए आतंकियों की मौजूदगी स्वीकार किए जाने के बाद यह विरोधाभास और गहरा दिखाई देता है।
कश्मीर में मारे गए आतंकियों की कब्रों का जिक्र क्यों है बड़ी बात?
आतंकवाद से जुड़े मामलों में अक्सर आतंकी संगठनों की ओर से अपने सदस्यों की पहचान और गतिविधियों को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती।
ऐसे में किसी वरिष्ठ आतंकी कमांडर का सार्वजनिक रूप से यह कहना कि पाकिस्तान से गए आतंकी कश्मीर में मारे गए और वहां दफन हैं, महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह बयान सीमा पार आतंकवाद के नेटवर्क, आतंकियों की आवाजाही और पाकिस्तान की भूमिका से जुड़े पुराने सवालों को फिर सामने लाता है।
भारत के आरोप और हिजबुल कमांडर का बयान आमने-सामने
भारत लंबे समय से जिस बात को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कहता रहा है, शमशीर खान का बयान उसी मुद्दे को एक अलग संदर्भ में सामने लाता है।
भारत का आरोप है कि पाकिस्तान आतंकियों को प्रशिक्षण और सहायता देता है।
पाकिस्तान इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
अब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन के वरिष्ठ पदाधिकारी ने स्वयं पाकिस्तान से कश्मीर पहुंचे आतंकियों का जिक्र किया है।
इस बयान को इसी कारण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुरक्षा और कूटनीतिक स्तर पर भी अहम हो सकता है बयान
सीमा पार आतंकवाद केवल सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा नहीं है।
यह भारत और पाकिस्तान के संबंधों में लंबे समय से तनाव का एक प्रमुख कारण भी रहा है।
भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है।
ऐसे में आतंकी संगठन के वरिष्ठ कमांडर का यह बयान कूटनीतिक चर्चाओं में भी महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है।
हालांकि इस बयान के व्यापक प्रभाव और आधिकारिक प्रतिक्रियाओं को लेकर आगे की स्थिति पर नजर रहेगी।
हिजबुल डिप्टी चीफ के बयान ने फिर खड़ा किया बड़ा सवाल
शमशीर खान के कथित कबूलनामे के बाद एक बार फिर मूल सवाल पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सामने आ गया है।
यदि पाकिस्तान से आए आतंकी कश्मीर में मौजूद थे और वहां मारे गए, तो उन्हें वहां तक पहुंचाने वाला नेटवर्क कौन था?
उनके प्रशिक्षण, हथियार और अन्य संसाधनों की व्यवस्था कैसे हुई?
क्या इतने लंबे समय तक चलने वाली गतिविधियों की जानकारी पाकिस्तान की व्यवस्था को नहीं थी?
इन सवालों का जवाब पाकिस्तान के लिए आसान नहीं हो सकता।
आतंकवाद पर ‘इनकार’ की नीति के बीच सामने आया खुला बयान
पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद से संबंधों के आरोपों पर इनकार की नीति अपनाता रहा है।
लेकिन शमशीर खान का बयान इस नीति के ठीक विपरीत दिखाई देता है।
हिजबुल मुजाहिदीन के डिप्टी चीफ ने सार्वजनिक कार्यक्रम में पाकिस्तानी आतंकियों के कश्मीर जाने और वहां दफन होने का जिक्र किया।
इस बयान ने आतंकवाद और सीमा पार घुसपैठ को लेकर वर्षों से जारी विवाद में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

