स्वास्थ्य

हर प्रकार की बवासीर (Piles) का घरेलू इलाज: मस्से वाली, खूनी और वादी बवासीर के लिए कारगर नुस्खे

 बवासीर (Piles) एक गंभीर लेकिन सामान्य रोग है जो सही इलाज और नियमित दिनचर्या से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। चाहे वह खूनी बवासीर हो, मस्से वाली हो या वादी (सूजन वाली), आयुर्वेद और घरेलू उपचार मिलकर इसमें अद्भुत राहत दे सकते हैं। प्रस्तुत है एक बेहद असरदार, व्यावहारिक और व्यापक उपायों का संकलन जो वर्षों से आजमाया जा रहा है और रोगियों को राहत पहुँचा रहा है।


फिटकरी और धनिया-सौंफ से तैयार घरेलू काढ़ा: बवासीर की जड़ पर वार

खास तौर पर खूनी और मस्से वाली बवासीर के लिए यह काढ़ा एक सिद्ध और प्रभावी उपाय है।

  • सामग्री: दो चुटकी फिटकरी, एक-चौथाई चम्मच धनिया, एक-चौथाई चम्मच सौंफ, एक गिलास पानी।

  • विधि: इन सभी को पानी में डालकर उबालें और जब पानी आधा रह जाए तब छान लें।

  • सेवन: यह काढ़ा पीने के साथ-साथ इससे गुदा स्थान की सफाई भी करें। यह न केवल आंतरिक सूजन कम करता है बल्कि संक्रमण को भी रोकता है।


फिटकरी और सरसों तेल से बना तेल: मस्से वाली बवासीर के लिए अमृत समान

  • सामग्री: 100ml सरसों का तेल, गुलाबी या सफेद फिटकरी का बारीक चूर्ण।

  • विधि: दोनों को मिलाकर धूप में रखें। यह मिश्रण कुछ ही दिनों में तैयार हो जाएगा।

  • उपयोग: दिन में कई बार इस तेल को मस्सों पर लगाएं। यह मस्सों को सुखाने और दर्द कम करने में सहायक है।


आयुर्वेदिक दवाएं जो करती हैं गहराई से उपचार

  • अरशोघनी वटी, कंकायन वटी, और अर्शकुठार रस – ये तीनों गोलियां दिन में तीन बार सादे पानी या छाछ के साथ लें।

  • ये दवाएं आंतरिक सूजन को कम करती हैं, रक्तस्राव को रोकती हैं और बवासीर के मूल कारण पर कार्य करती हैं।

  • नोट: किसी भी दवा का सेवन करने से पहले अपने योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।


कासिसादी तेल का प्रयोग: मस्सों पर सीधा असर

अगर बवासीर में मस्से हैं, तो कासिसादी तेल को दिन में कई बार मस्सों पर लगाएं। यह तेल न केवल मस्सों को धीरे-धीरे खत्म करता है बल्कि गुदा क्षेत्र की खुजली और जलन को भी शांत करता है।


60 दिन का नियमित प्रयोग और दिनचर्या बदलाव: पूर्ण राहत का रास्ता

किसी भी उपचार का असर तभी देखने को मिलता है जब उसे नियमपूर्वक किया जाए। बवासीर में 60 दिन तक इन उपायों को नियमित रूप से अपनाएं। जीवनशैली में बदलाव भी उतना ही जरूरी है।


संतुलित भोजन और परहेज: बवासीर में सुधार की कुंजी

क्या खाएं (पथ्य):

  • मक्खन, मलाई, दूध, मिश्री जैसे पौष्टिक पदार्थों का सेवन करें।

  • सुबह की सैर और हल्का-फुल्का शारीरिक कार्य फायदेमंद है।

  • पुराने चावल, मूंग दाल, कुलथी, चना, कच्चा पपीता, पका हुआ बेल, केले का फूल, लहसुन, आंवला, इलायची और किशमिश को अपने भोजन में शामिल करें।

  • दिनभर अधिक पानी पिएं जिससे मल नरम रहे और शौच के समय दबाव न पड़े।

क्या न खाएं (अपथ्य):

  • लाल मिर्च, खटाई, तली हुई चीजें, मसालेदार भोजन पूरी तरह से बंद करें।

  • उड़द की दाल, सरसों, तिल, शराब, मछली, मांस जैसे गरिष्ठ और पचने में कठिन खाद्य पदार्थों से बचें।

  • बेलगिरी, पोइ का साग, और घिया जैसी चीजें भी इस रोग में हानिकारक हैं।


आहार के साथ जीवनशैली भी बदले: तनावमुक्त रहें और पाचन सुधारे

  • शौच के समय बहुत देर तक बैठना और जोर लगाना सबसे बड़ा कारण बन सकता है बवासीर का। इसलिए आदतें सुधारें।

    • कब्ज को बिल्कुल न बढ़ने दें। इसके लिए फाइबर युक्त आहार लें और हाइड्रेशन बनाए रखें।
    • योग और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करें। विशेषकर पवनमुक्तासन, वज्रासन और शलभासन लाभदायक माने जाते हैं।


    बवासीर जैसे रोग का इलाज कठिन नहीं, यदि सही समय पर उपाय किया जाए और जीवनशैली में आवश्यक बदलाव किए जाएं। ऊपर बताए गए घरेलू, आयुर्वेदिक और आहार संबंधी उपाय अपनाकर आप न केवल दर्द से छुटकारा पा सकते हैं, बल्कि इस रोग की पुनरावृत्ति को भी रोक सकते हैं। ध्यान रखें, हर शरीर की प्रकृति अलग होती है, इसलिए किसी भी दवा या उपाय को चिकित्सकीय परामर्श के साथ ही अपनाएं। नियमितता और संयम से बवासीर का समूल नाश संभव है।

Dr. Jyoti Gupta

डॉ. ज्योति ओम प्रकाश गुप्ता एक प्रसिद्ध चिकित्सक और हेल्थ सेक्शन की वरिष्ठ संपादक हैं, जो प्राकृतिक, घरेलू और होम्योपैथिक चिकित्सा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए समर्पित हैं। श्री राजीव दीक्षित जी से प्रेरित होकर, डॉ. ज्योति का उद्देश्य सहज, सरल और सुलभ चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देना है ताकि लोग आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ पारंपरिक उपचार विधियों का भी लाभ उठा सकें। आप किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के नि:शुल्क परामर्श के लिए उनसे 9399341299 पर संपर्क कर सकते हैं या [email protected] पर ईमेल कर सकते हैं।

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