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Kurukshetra- इंटरकास्ट शादी के बाद विदेश जाने का सपना टूटा: 4 साल तक पत्नी के बुलावे का इंतजार करता रहा युवक, 34 लाख का कर्ज, कारोबार बिका; अब न्याय की लड़ाई

Kurukshetra हरियाणा के कुरुक्षेत्र निवासी एक युवक ने आरोप लगाया है कि इंटरकास्ट विवाह के बाद विदेश में पत्नी के साथ नई जिंदगी बसाने का उसका सपना अधूरा रह गया। युवक का दावा है कि विवाह के एक महीने बाद उसकी पत्नी ऑस्ट्रेलिया चली गई थी और जल्द स्पॉन्सर भेजकर उसे अपने पास बुलाने का आश्वासन दिया था। हालांकि, चार वर्ष बीत जाने के बाद भी उसे ऑस्ट्रेलिया नहीं बुलाया गया। इस दौरान उसने कथित रूप से वीजा और अन्य प्रक्रियाओं पर लाखों रुपये खर्च किए, कारोबार बेचना पड़ा और भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।

मामले में युवक ने अब ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों और स्थानीय पुलिस से न्याय की मांग करने का निर्णय लिया है। वहीं, इस पूरे मामले में पत्नी या उसके परिवार की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


इंटरकास्ट विवाह के बाद शुरू हुआ विदेश जाने का इंतजार

कुरुक्षेत्र निवासी संजीव कुमार के अनुसार उन्होंने परिवार की सहमति से इंटरकास्ट विवाह किया था। विवाह के कुछ समय बाद उनकी पत्नी ऑस्ट्रेलिया चली गई।

संजीव का कहना है कि जाते समय पत्नी ने उन्हें जल्द ही स्पॉन्सर भेजकर ऑस्ट्रेलिया बुलाने का भरोसा दिया था। इसी भरोसे के आधार पर उन्होंने भविष्य की योजनाएं बनाईं और विदेश जाने की तैयारियां भी शुरू कर दीं।


चार साल तक नहीं मिला स्पॉन्सर, बढ़ती गई परेशानी

संजीव का आरोप है कि समय बीतने के साथ उनकी पत्नी लगातार उन्हें आश्वासन देती रही, लेकिन ऑस्ट्रेलिया बुलाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।

उनका कहना है कि इस दौरान वीजा, दस्तावेजी औपचारिकताओं और अन्य प्रक्रियाओं पर करीब 8 से 10 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च हुए, लेकिन इसके बावजूद उन्हें ऑस्ट्रेलिया जाने का अवसर नहीं मिला।

उन्होंने दावा किया कि लंबे इंतजार के बाद भी जब स्थिति नहीं बदली तो उन्होंने पत्नी और उसके परिवार से स्पष्ट जवाब मांगा।


‘ससुर ने कहा- बेटी अब हमारी बात नहीं मानती’

संजीव के अनुसार जब उन्होंने अपनी पत्नी और ससुराल पक्ष से संपर्क किया तो शुरुआत में विभिन्न कारण बताए गए।

बाद में उनके ससुर ने कथित तौर पर कहा कि उनकी बेटी अब उनकी बात नहीं मानती। संजीव का आरोप है कि इसके कुछ समय बाद उनकी पत्नी ने उनका, उनके परिवार के सदस्यों के मोबाइल नंबर तथा सोशल मीडिया खातों को भी ब्लॉक कर दिया।

इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच अभी प्रस्तावित है।


व्यवसाय बेचना पड़ा, बढ़ता गया कर्ज

संजीव का कहना है कि पत्नी को विदेश भेजने और स्वयं ऑस्ट्रेलिया जाने की तैयारी में उन्होंने बड़ी राशि खर्च की।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में उन पर लगभग 34 लाख रुपये का आर्थिक बोझ आ गया। बढ़ते कर्ज के कारण उन्हें अपनी बेकरी का व्यवसाय भी बेचना पड़ा।

संजीव के अनुसार वर्तमान में वे हर महीने लगभग डेढ़ लाख रुपये की किस्त और ब्याज का भुगतान करने को मजबूर हैं।


आर्थिक तनाव के बीच पिता का निधन

संजीव ने बताया कि लगातार बढ़ते आर्थिक संकट का असर पूरे परिवार पर पड़ा।

उनके अनुसार 6 मई 2025 को उनके पिता जसवंत सिंह का निधन हो गया। वहीं उनकी माता भी लंबे समय से अस्वस्थ हैं।

संजीव का कहना है कि परिवार लगातार आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना कर रहा है।


मैरिज रजिस्ट्रेशन रद्द कराने का भी आरोप

संजीव ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी ने बाद में विवाह पंजीकरण भी निरस्त करा दिया और उनके साथ रहने या उन्हें ऑस्ट्रेलिया बुलाने से इनकार कर दिया।

इस संबंध में संबंधित दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रिया की जांच संबंधित प्राधिकरणों द्वारा की जा सकती है। फिलहाल इन दावों पर आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।


ऑस्ट्रेलियाई एंबेसी और कोर्ट का लिया सहारा

संजीव ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले की शिकायत ऑस्ट्रेलियाई एंबेसी को भेजी है।

इसके अलावा उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में संबंधित न्यायिक प्रक्रिया शुरू करने के उद्देश्य से अदालत में याचिका दायर करने की भी जानकारी दी। उनका कहना है कि वे कानूनी माध्यम से अपने पक्ष को प्रस्तुत करना चाहते हैं।


अब स्थानीय पुलिस से भी करेंगे शिकायत

संजीव ने बताया कि वे जल्द ही कुरुक्षेत्र के पुलिस अधीक्षक (SP) से मिलकर पूरे मामले की लिखित शिकायत देंगे।

उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या धोखाधड़ी सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए तथा उनके द्वारा खर्च की गई राशि की भरपाई कराई जाए।


वैवाहिक विवादों में कानूनी प्रक्रिया का महत्व

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय या एनआरआई विवाह से जुड़े मामलों में यदि किसी पक्ष द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाते हैं तो उनकी जांच संबंधित दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन, संचार रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जाती है।

ऐसे मामलों में किसी भी पक्ष को दोषी मानने से पहले सक्षम प्राधिकरण द्वारा जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक होता है।

 

कुरुक्षेत्र निवासी युवक द्वारा लगाए गए आरोप फिलहाल जांच और कानूनी प्रक्रिया के अधीन हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई एंबेसी, संबंधित न्यायालय और स्थानीय पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, इस मामले में दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। अंतिम स्थिति संबंधित जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी।

 

News-Desk

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