Muzaffarnagar में नकली यूरिया फैक्ट्री का भंडाफोड़: पुलिस ने 5 शातिर अभियुक्तों को दबोचा
मुजफ्फरनगर।(Muzaffarnagar) मुजफ्फरनगर पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने एक बड़े नकली यूरिया रैकेट का पर्दाफाश करते हुए पांच शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया। मुजफ्फरनगर थाना कोतवाली नगर में नकली यूरिया बनाने वाले इस गिरोह के बारे में पता चलते ही पुलिस ने कार्रवाई को तेज किया और भारी मात्रा में नकली यूरिया, उपकरण, और एक मालवाहक वाहन सहित कई वस्त्रों को कब्जे में लिया। पुलिस की तत्परता से नकली उत्पादों का यह अवैध कारोबार अब बेनकाब हो चुका है।
नकली यूरिया फैक्ट्री का गोरखधंधा
जानकारी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण प्रजापत और सहायक पुलिस अधीक्षक ब्योम विंदल के निर्देशन में पुलिस ने नकली यूरिया की इस फैक्ट्री पर शिकंजा कसा। इस गिरोह की योजना थी कि वे बाजार में टाटा मोटर्स और आयशर मोटर्स जैसे ब्रांडों की आड़ में नकली यूरिया बेचकर आर्थिक लाभ कमा सकें। पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी के बाद जांच में पाया गया कि आरोपियों ने नकली यूरिया तैयार करने के लिए विभिन्न उपकरण और सामग्री इकट्ठा की थी। इस गिरोह में शामिल अभियुक्तगण फरीद, सन्नवर, विश्वास, सचिन, और पारस हैं, जो लंबे समय से इस धंधे को चला रहे थे।
मुखबिर की सूचना से खुलासा, मौके पर दबिश
यह मामला तब प्रकाश में आया जब बुढ़ाना मोड़ पर पुलिस चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध वाहन की तलाशी में नकली यूरिया के कई बोरियां बरामद हुईं। मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक मालवाहक वाहन के माध्यम से नकली यूरिया का परिवहन किया जा रहा है। इस सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि पांचवे अभियुक्त को खांजापुर स्थित एक गोदाम से पकड़ा गया। गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से भारी मात्रा में नकली यूरिया, यूरिया बनाने के उपकरण और कई अन्य संदिग्ध वस्त्रें भी बरामद हुईं।
अभियुक्तों के बयान में चौंकाने वाले खुलासे
पकड़े गए अभियुक्त पारस ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह खांजापुर के जंगलों में एक फर्म ‘हर्षित एंटरप्राइजेज’ के नाम से चलाता है, जहां वे नकली यूरिया तैयार करते थे। उन्होंने बताया कि नकली यूरिया की पैकिंग के लिए वे दिल्ली के एक व्यक्ति से बार कोड, बाल्टी, और अन्य सामग्री मंगवाते थे। टाटा मोटर्स और आयशर मोटर्स के नाम और बारकोड लगाकर ये नकली यूरिया की बाल्टियां हूबहू असली जैसी दिखती थीं।
इस नकली यूरिया को बाजार में बेचने के लिए उन्होंने कुछ खास स्थान तय कर रखे थे, जिसमें बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, और बरेली जैसे शहर शामिल थे। अभियुक्तों ने बताया कि वे मुख्यतः हाईवे के किनारे ढाबों और गैरेजों में नकली यूरिया की सप्लाई करते थे। इस नकली यूरिया को असली के भाव में बेचकर वे लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे थे। गिरफ्तार किए गए सभी अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि वे नकली यूरिया के इस गोरखधंधे में लंबे समय से सक्रिय थे।
नकली यूरिया फैक्ट्री का नेटवर्क और पुलिस की बड़ी कार्रवाई
पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि नकली यूरिया तैयार करने के लिए उन्होंने टाटा और आयशर जैसी कंपनियों की पैकिंग में बाल्टियों को भरने और लेबल लगाने का तरीका इजाद किया था। इसके बाद ये गिरोह अपने नकली उत्पादों को असली के रूप में दिखाकर बेचता था। इस मामले में पुलिस ने धारा 319(2), 318(4), 317(2), 338, 336(3), और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है और सभी अभियुक्तों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस टीम का प्रयास और प्रशंसा
इस बड़ी सफलता के लिए पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने पुलिस टीम की तारीफ की है। इस गिरफ्तारी में थानाध्यक्ष अक्षय शर्मा, उ.नि. ज्ञानेन्द्र सिंह, अखिल चौधरी, प्र.उ.नि. आशीष खोखर और एसओजी टीम के कई अन्य अधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जनता की सुरक्षा में पुलिस का अहम कदम
मुजफ्फरनगर के इस नकली यूरिया रैकेट का भंडाफोड़ पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता है। नकली उत्पादों के माध्यम से वाहन मालिकों को गुमराह करने वाले इस गिरोह के खिलाफ कार्रवाई से जनता में सुरक्षा की भावना और मजबूत हुई है। नकली उत्पाद न केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी करते हैं बल्कि वाहनों के प्रदर्शन और उनके जीवनकाल पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
उम्मीद है कि पुलिस की इस कार्रवाई के बाद नकली उत्पादों के इस कारोबार पर रोक लगेगी, और भविष्य में ऐसे गिरोहों पर पुलिस की कड़ी नजर रहेगी।

