फर्जी कस्टम-CBI अधिकारी बनकर 5 लाख की ठगी, शाहपुर Muzaffarnagar पुलिस ने महिला समेत दो साइबर ठग दबोचे
Muzaffarnagar के थाना शाहपुर क्षेत्र में सामने आए एक गंभीर साइबर ठगी मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए महिला समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों पर आरोप है कि इन्होंने खुद को कस्टम और सीबीआई अधिकारी बताकर एक युवती और उसके परिवार को ब्लैकमेल किया तथा करीब पांच लाख रुपये की अवैध वसूली की।
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने तीन डेबिट कार्ड, तीन मोबाइल फोन, एक फर्जी पहचान पत्र, फर्जी सर्च वारंट की प्रति, बैंक पासबुक, चेकबुक और 2,00,760 रुपये नकद बरामद किए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब आरोपियों के नेटवर्क और अन्य संभावित पीड़ितों की भी जांच कर रही है।
व्हाट्सएप के जरिए संपर्क बनाकर शुरू की गई ठगी की साजिश
पीड़िता इकरा पुत्री हारून, निवासी हुजूरनगर थाना शाहपुर, ने 4 अप्रैल को पुलिस को लिखित शिकायत देकर बताया कि उसकी बातचीत डव्श्र ऐप के माध्यम से व्हाट्सएप पर हिदायतुल्लाह खान नाम के व्यक्ति से शुरू हुई थी। शुरुआती बातचीत के बाद आरोपी ने खुद को सरकारी एजेंसी से जुड़ा बताकर विश्वास हासिल किया।
धीरे-धीरे बातचीत का दायरा बढ़ाते हुए आरोपियों ने खुद को कस्टम अधिकारी और सीबीआई अधिकारी बताना शुरू किया और जांच कार्रवाई का भय दिखाकर युवती और उसके परिवार को मानसिक दबाव में ले लिया।
फर्जी आईडी और सर्च वारंट भेजकर बनाया दबाव का माहौल
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पीड़िता को डराने के लिए फर्जी सीबीआई अधिकारी की पहचान पत्र की फोटो और नकली सर्च वारंट की प्रतियां भेजीं। इन दस्तावेजों के जरिए यह विश्वास दिलाया गया कि उनके खिलाफ जांच चल रही है और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए तुरंत धनराशि जमा करनी होगी।
डर और भ्रम की स्थिति में पीड़िता से अलग-अलग खातों में कई किश्तों में लगभग पांच लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।
विश्वास जीतने के लिए ‘बहन’ बनाकर रचा गया जाल
प्रारंभिक पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से पहले पीड़िता से संपर्क स्थापित किया और उसे विश्वास में लेने के लिए ‘बहन’ जैसा संबंध बनाया। इसके बाद आरोपी मंसूर अहमद ने पीड़िता से लगातार बातचीत कर भरोसा मजबूत किया।
इसके बाद ‘गिफ्ट भेजने’ का बहाना बनाकर एक नया चरण शुरू किया गया, जिसमें अलग-अलग नंबरों से कॉल कर फर्जी अधिकारियों का रूप धारण किया गया और डराकर धनराशि वसूली गई।
मुखबिर की सूचना पर हजूरनगर मार्ग से हुई गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना शाहपुर पुलिस और सर्विलांस टीम की संयुक्त इकाइयों का गठन किया गया था। जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर 19 अप्रैल को हजूरनगर मार्ग से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस कार्रवाई के दौरान बरामद दस्तावेजों और नकदी से इस ठगी गिरोह की गतिविधियों के ठोस प्रमाण सामने आए हैं।
दिल्ली और बिजनौर से जुड़े हैं आरोपी
गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान रोजी पुत्री मोहम्मद मकसूद निवासी हजरत निजामुद्दीन सराय काले खां दिल्ली तथा मंसूर अहमद पुत्र मनव्वर अली निवासी शेखपुरा तुर्क, पोस्ट जीतपुर पलड़ी, जिला बिजनौर के रूप में हुई है। वर्तमान में आरोपी दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र में रह रहे थे।
पुलिस अब इनके संपर्कों और अन्य संभावित सहयोगियों की तलाश में जुटी हुई है।
अन्य लोगों से भी इसी तरह ठगी करने की स्वीकारोक्ति
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने इसी तरीके से अन्य लोगों को भी निशाना बनाया है। फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर ऑनलाइन ठगी करने का यह उनका तयशुदा तरीका था।
पुलिस अब इस संभावना की जांच कर रही है कि यह गिरोह बड़े स्तर पर सक्रिय साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई पूरी कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन और पुलिस उपमहानिरीक्षक सहारनपुर रेंज के निर्देशन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के पर्यवेक्षण में संपन्न हुई। पुलिस अधीक्षक देहात अक्षय संजय महाडीक, क्षेत्राधिकारी बुढाना गजेन्द्र पाल तथा थाना शाहपुर प्रभारी गजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने गिरफ्तारी को अंजाम दिया।
इस कार्रवाई को जनपद में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
गिरफ्तारी करने वाली टीम में शामिल रहे कई पुलिसकर्मी
अभियुक्तों की गिरफ्तारी में उपनिरीक्षक विशाल यादव, अभिषेक चौधरी, हेड कांस्टेबल विकास सिरोही, कांस्टेबल रवि शंकर कुमार, मोहम्मद अलीम, शिवम यादव, सोमवीर सिंह, रवि शंकर तथा महिला कांस्टेबल सुनीता की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुलिस टीम की सक्रियता से मामले का खुलासा अपेक्षाकृत कम समय में संभव हो सका।
ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों पर पुलिस की विशेष नजर
हाल के समय में फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर ऑनलाइन ठगी के मामलों में तेजी देखी जा रही है। ऐसे मामलों में अपराधी डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर लोगों को डराकर आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।
पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल, संदेश या सरकारी अधिकारी बताकर की जाने वाली मांगों पर तुरंत भरोसा न करें और संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

