Muzaffarnagar: सावधानी की बदलते मौसम में जरूरत, खान पीन इत्यादि का विशेष ध्यान रखे
मुजफ्फरनगर।(Muzaffarnagar News) फरवरी माह आधा बीत चुका है और मौसम में ठंडक भी कम पडने लगी है। वहीं तेज धूप से मौसम में गर्माहट बदल रही है। इसी के साथ सुबह शाम की ठंड अभी बरकरार है। मौसम में बदलाव के कारण बीमारी भी पांव पसार रहे है। मौसम में धीरे-धीरे परिवर्तन शुरू हो गया है।
धूप निकलने से अधिकतम तापमान 25.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। वहीं तेज हवा चलने से सुबह-शाम की सर्दी अभी भी बनी हुई है। बदलते मौसम में पूरी तरह एहतियात बरतनी जरूरी है। मौसम साफ रहने और धूप निकलने से गर्मी की आहट शुरू हो गई है। दिन में तेज धूप निकलने से गर्मी के आगमन जैसा एहसास होने लगता है।
ऐसे हालात में गर्म कपड़ों से दूरी बना रहे लोग बीमारी की गिरफ्त में फंस रहे हैं। बदलते मौसम में पूरी तरह एहतियात बरतनी जरूरी है। धूप निकलने से इस मौसम में तापमान पहली बार २५.४ डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। सुबह-शाम और रात में सर्दी के चलते न्यूनतम तापमान ७.५ डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
मौसम में थोड़ा परिवर्तन आने से बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा प्रभाव भी कम हुआ है। चाइल्ड स्पेशलिस्टका कहना है कि इस समय बच्चों के साथ-साथ बड़ों के लिए एहतियात जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सुबह शाम की ठंड से बचे, गर्म कपड़े पहनें, गर्म पानी पिएं, बासी भोजन खाने से बचे, सड़े कटे सब्जी फलों से दूर रहें, ठंडी चीजों का इस्तेमाल का न करें, सर्दी-जुकाम होने पर चिकित्सक की सलाह लें, मुंह पर मास्क लगाकर निकलें, ठंडे पानी में न नहाएं।
साथ ही मौसम में आये बदलाव को नजरअंदाज न करे। और मौसम में बदलाव के कारण जरा सी भी लापरवाही बीमारी के न्यौता दे सकती है इसलिए मौसम में बदलाव पर खान पीन इत्यादि का विशेष ध्यान रखे।
फाल्गुन मास की शिवरात्रि का महत्व विशेष
हिंदू कैलेंडर के अनुसार वर्ष में १२ मास शिवरात्रि आती है परंतु फाल्गुन मास में पडने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है, फाल्गुन मास में महाशिवरात्रि होने के कारण संपूर्ण माह ही शिव उपासना के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है, महामंडलेश्वर संजीव शंकर जी महाराज ने कहा कि जीवन में बस शिव की कृपा हो जाए तो जीवन कैसे भी व्यतीत हुआ हो परंतु मृत्यु सुखद हो जाती है।
मृत्यु सुखद से अभिप्राय अकाल मृत्यु या दुखदाई मृत्यु ने हो।भगवान शिव की उपासना सबसे सरल है, भगवान शिव साधारण जल से प्रसन्न होने वाले देवता हैं इनकी उपासना में मस्तक पर त्रिपुंड धारण करना, गले में रुद्राक्ष धारण करना और मुख में शिव नाम कल्याण कारक है। भगवान शिव की पूजा एवं कृपा प्राप्ति के लिए आडंबर की आवश्यकता नहीं है।
संपन्न और सुविधाओं से रहित दोनों ही प्रकार के शिव भक्तों को शिव की उपासना का समान रूप से फल प्राप्त होता है। संजीव शंकर ने बताया कि महामृत्युंजय मंत्र, पंचाक्षर मंत्र (घ् नमः शिवाय), शिव पुराण का श्रवण, शिव मंदिर के दर्शन, बहुत अधिक हो सके तो दूध- दही-शहद-घी-गंगाजल,सरसों के तेल, गन्ने का रस इत्यादि से अभिषेक, फलों के रस के साथ-साथ केले का भोग भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, नित्य प्रति शिव परिवार गणेश,कार्तिकेय, पार्वती, सहित भगवान शिव का दर्शन सुख साधन उन्नति के लिए आवश्यक है।

