Muzaffarnagar News: एक दिवसीय योग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन
Muzaffarnagar News:मुजफ्फरनगर। भारतीय योग संस्थान के तत्वावधान में आर्य अकैडमी इंटरनेशनल स्कूल ए टू जेड रोड मुजफ्फरनगर में एक दिवसीय योग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य संस्थान की सभी योग कक्षाओं में एकरूपता और साधना को उत्तम बनाना रहा।
सर्वप्रथम जिला प्रधान राज सिंह पुंडीर ने भारतीय योग संस्थान की पुस्तक शिक्षक संहिता के अनुसार साप्ताहिक आसन और प्राणायाम कराने के सही क्रम को विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि संस्थान के अनुसार पद्मासन, गहरा लंबा स्वास, ओम ध्वनि और गायत्री मंत्र ५ मिनट आसन ३० मिनट ,प्राणायाम १० मिनट, ध्यान १० मिनट और प्रार्थना वह शांति पाठ ५ मिनट प्रतिदिन की साधना में होने चाहिए। प्रत्येक आगे झुकने वाले आसन का पूरक आसन अवश्य कराना चाहिए ताकि हमारी रीड में कोई दोष नहीं आए।
भारतीय योग संस्थान के प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य ने योग शिक्षक के दायित्व के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि भारतीय योग संस्थान विश्व में एक अद्वितीय संस्था है जो जन-जन को सर्वात्तम जीवन यापन करना सिखाती है। उनके जीवन से दुख सदा सर्वदा के लिए कैसे चला जाए और मैं अपने जीवन काल में ही ऐसा सुख प्राप्त कर लें जो क्षणभंगुर न हो।
अपने जीवन के हर कार्य क्षेत्र में जय प्राप्त करें और अपने जीवन को धन्य बनाते हुए अपने मोहल्ले, प्रांत, देश एवं विश्व का कल्याण भी कर पाए। इसके लिए संस्थान ने योग को माध्यम चुना है । ऐसे संस्थान का शिक्षक होना कितने गौरव की बात है जैसे ही मैं शिक्षक बनता हूं मेरे ऊपर कुछ उत्तरदायित्व आ जाते हैं।
इन उत्तरदायित्व को निभाने के लिए बहुत से शिक्षकों ने यह इच्छा प्रकट की है कि आसान प्राणायाम एवं ध्यान के कुछ ऐसे आवश्यक सूत्र दिए जाएं जो एक कुशाग्र योग शिक्षक को योग केंद्र सुंदर रूप से चलाने में सहायक बने और वह अपने इस कार्य को सुचारु रुप से निभा पाए। इसी कड़ी में केंद्र प्रमुख व योग शिक्षकों के लिए आवश्यक है कि वह अपने योग केंद्र से कार्यकर्ताओं शिक्षकों गृहस्थ सन्यासियों का निर्माण करें जिससे अधिक केंद्र खोलने में सहायता मिलेगी और भारत को पुनः गौरव प्राप्त होगा। जिओ और जीवन दो का सिद्धांत सार्थक होगा । जितना समय साधना के लिए निर्धारित है उससे अधिक आसन ने कराएं ।
आसनों की संख्या कम परंतु हर आसन में रुकने का समय बढ़ाना ज्यादा लाभप्रद है। साधक एवं शिक्षकों का व्यवहार संस्थान के अनुकूल हो। भाषा संतुलित हो शब्द ब्रह्म हैं इसका निरादर ने हो। खड़े होकर तथा आंखें खोलकर योगाभ्यास कराएं। स्वयं नहा धोकर स्वच्छ सफेद वस्त्र पहनकर आएं साधकों को भी ऐसी प्रेरणा दें।
हो सके तो आसन पर सफेद सूती धुला हुआ वस्त्र बिछाए। इसके नीचे कंबल या गरम कपड़ा हो । योग शिक्षक योग केंद्र में समय से पूर्व आकर अपना अभ्यास अवश्य कर लें। संस्थान के प्रति निष्ठावान होना तथा साधकों को भी इस ओर प्रेरित करने से साधना बलवती होती है। साधना का आधार श्रद्धा और विश्वास है।
इस अवसर पर जिला मंत्री योगेश्वर दयाल ने ईश्वर भक्ति का एक सुंदर भजन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के संयोजक विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती सोनिका आर्य ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर सुघोष आर्य ,सत्यवीर आर्य, इंजीनियर रणवीर सिंह, सुशील त्यागी ,राजवीर सिंह बालियान ,चंद्रमोहन ,कुंवर पाल बालियान आदि का विशेष सहयोग रहा।
जिला संगठन मंत्री डॉक्टर अमित कुमार क्षेत्रीय प्रधान राज मोहन गुप्ता, राजीव कुमार ,क्षेत्रीय मंत्री रामकुमार राठी, यज्ञ दत्त आर्य, डॉक्टर जीत सिंह तोमर, रविंदर तोमर ,छवि तोमर, नीरज बंसल, योगेश कुमार आदि काफी संख्या में योग शिक्षक कार्यकर्ता एवं अधिकारी उपस्थित रहे। अंत में प्रसाद वितरण एवं शांति पाठ के बाद कार्यक्रम का समापन किया गया ।

