सोए देश को जगाना होगा..
दिल में जो कोई दर्द है,
तब तो दर्द को दिल में पाले रखिए।
देखना किसी दिन दुनिया को बहाने के काम आएगा।
हमारे लहू का हर एक कतरा,
अब शायद देश के काम आएगा ॥
जल रही दिल में जो ज्वालायें,
उन्हे आज और हवा दे दो ।
बनकर आजाद और भगत सिंह,
गद्दारों को सजा दे दो ॥
मातृभूमि हमें बुला रही है,
हमें समर में आना होगा ।
फिर भारत माँ मिलकर,
दुष्टों से मुक्त कराना होगा ॥
अंधेरे में भटक रहे है,
अन्तर्मन के तम को मिटाकर,
फिर उजियारा लाना होगा ।
भारत माता बुला रही है,
हमें दौड़कर आना होगा ॥
हमें इतिहास बदलना है,
नया भविष्य अब गढ़ना होगा ।
भारत भूमि के सब गद्दारों से,
हमें समर में लड़ना होगा ॥
वन्देमातरम फिर से गूंजे,
भारत की इन फिजाओं में।
इंकलाब फिर लाना होगा,
भारत की सभी दिशाओं में॥
जीवन का संघर्ष चल रहा,
विजय मौत की ही होगी ।
मरना ही है लड़ के मरें हम,
क्रांति की लौ दिल में जलानी होगी ॥
संघर्ष बड़ा है, कठिन समय है ।
सोए! देश को जगाना होगा॥
मौत भी आए राष्ट्र राह में,
दुष्टों का दलन हमें करना होगा ।
भारत माता पुकार रही है,
गद्दारों से अब लड़ना होगा।
गद्दारों से लड़ना होगा ॥
वन्देमातरम …
वन्दे मातृभूमि …


रचनाकार:
मूलतः शांत स्वभाव के दिखने वाले श्री ओम प्रकाश गुप्ता (सम्पर्क: 9907192095) एक प्रखर राष्ट्रवादी ,विद्रोही रचनाकार लेखक एवं समाज सेवक है जो समसामयिक विषयों पर अपनी तल्ख रचनाओं एवं टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं|
