उत्तर प्रदेशसंपादकीय विशेष

नागरिकों को पहली आवश्यकता पेयजल की आपूर्ति और सीवरेज व्यवस्था सही ढ़ंग से संचालित करना-योगी आदित्यनाथ 

मुजफ्फरनगर। देश में बढ़ते नगरीकरण के कारण बड़े शहरों व छोटे-छोटे नगरों की बसावटों में आवासीय एवं जनसंख्या की वृद्धि हो रही है। बसावटों की वृद्धि के कारण शहरी क्षेत्र बढ़ते जा रहे हैं।

शहरी क्षेत्र बढ़ने से जो नागरिक बुनियादी सुविधायें पूर्व से थी उनकों विस्तारित करना जरूरी हो गया है। शहरों के नागरिकों को पहली आवश्यकता पेयजल की आपूर्ति और सीवरेज व्यवस्था सही ढ़ंग से संचालित करना है। उसके साथ ही उस क्षेत्र के मार्ग निर्माण, वर्षा व घरेलू जल निकासी, शहरी पथ एवं शहरी यातायात चौराहे, हरित स्थल पार्क आदि के कार्य नगर निकायों को कराना पड़ता है।

बड़े एवं छोटे शहरों की इन्हीं बुनियादी सुविधायें देने के उद्देश्य से भारत सरकार ने अमृत (अटल मिशन फार रिजूवेशन एण्ड अर्बन ट्रांसफार्मेशन) योजना आरम्भ की है। जिसे प्रदेश के मुख्य मंत्री श्री योगी आदित्यनाथ  ने प्रदेश में लागू करते हुए नगरों के विकास कार्य आरम्भ कर दिये हैं।

इस योजना के अन्तर्गत छोटे शहरों में सीवरेज एवं पेयजल की आपूर्ति की परियोजनाओं की लागत का ५० प्रतिशत व्यय भारत सरकार द्वारा वहन किया जाता है। बड़े शहरों में भारत सरकार द्वारा परियोजनाओं की लागत का ३३.३३ प्रतिशत धनराशि तथा शेष ६७.६७ प्रतिशत धनराशि राज्य सरकार व नगरीय निकायों द्वारा वहन किया जा रहा है। नगरों के विकास के लिए नागरिकों को अच्छी सुविधा देने के लिए प्रदेश सरकार योजनायें लागू कर नगरीय क्षेत्रों का विकास कर रही है।

अमृत योजना के अन्तर्गत उ०प्र० सरकार ने ६० नगर निकायों का चयन कर वहां आवश्यक बुनियादी नागरिक सुविधाआें उपलब्ध कराने का कार्य करा रही है। वर्ष २०१५-१६ से २०१९-२० तक की मिशन अवधि ०५ वर्ष के लिए भारत सरकार ने केन्द्रांश ४९२२.४६ करोड़ रूपये के सापेक्ष रू० ११४२१.८७ करोड़ रूपये का कुल परिव्यय आवंटित किया गया है।

प्रदेश सरकार भारत सरकार की इस धनराशि तथा राज्य व नगर निकाय की अंश धनराशि से सम्बन्धित नगर निकायों में विकास कार्य तेजी से करा रही है। इस योजना के तहत चयनित नगर निकायों में आवागमन की क्षमता निर्माण के कार्य कराये जा रहे हैं। जिनमें गलियां, मार्ग आदि का सुधार/निर्माण कराते हुए नगरवासियों को सुविधा दी गयी है।

जिन क्षेत्रों में जलापूर्ति का अभाव था, इन क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाकर घरों में जलापूर्ति की सुविधा दी जा रही है। बस्तियां बढ़ने के कारण जिन क्षेत्रों में सीवरेज की व्यवस्था नहीं थी उन क्षेत्रों में सीवर लाइन बिछाकर सीवरेज की व्यवस्था की जा रही है।

जलभराव व वर्षा जल निकासी, नालियों/नालों का निर्माण व जीर्णाद्धार कराया जा रहा है। शहरी निवासियों के आवागमन, वाहनों की बढोत्तरी होने से चौराहों आदि के चौड़ीकरण का कार्य स्वच्छता के लिए कूड़ादान की व्यवस्था, पार्कों एवं हरित स्थलों का निर्माण, जीर्णाद्धार आदि कार्य कराते हुए नगरों को स्वच्छ तथा नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया करायी जा रही हैं।

प्रदेश में अमृत योजना के तहत वित्तीय वर्ष २०१९-२० में पेयजल की १४ परियोजना एवं १३ सीवरेज की परियोजनायें, कुल २७ परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई जिसमें कार्य आरम्भ हो गये हैं।

योजना के प्रारम्भ से अब तक इस कार्यक्रम में पेयजल की १६३ एवं सीवरेज ९६ परियोजना कुल २५९ परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृत प्राप्त हो चुकी है, जिसमें से २४३ परियोजनाएं निर्माणाधीन है।

इन २४३ परियोजनाओं में पेयजल की ४४ नग एवं सीवरेज की १६ नग परियोजनाएॅ पूर्ण कर जनोपयोगी बनाया गया है। अब तक पेयजल के १०९४२३८ प्रस्तावित गृह संयोजन में से ५४२८४७ गृह संयोजन व सीवरेज के ९६९४८७ निजी गृह संयोजन में से ४५१६९१ गृह संयोजन दिये जा चुके हैं।

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