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Ukraine Russia War: Ukraine के बड़े शहर तबाह, मिग-31 से दागा गया हाइपरसोनिक मिसाइल

Ukraine Russia War: रूस और यूक्रेन जंग का आज 26वां दिन है. इस दौरान रूस ने लगभग यूक्रेन के सभी बड़े शहरों को तबाह कर दिया है. रूसी सेना ने  इपरसोनिक और क्रूज मिसाइलों से यूक्रेनी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. वहीं दूसरी तरफ रूस द्वारा लगातार हो रहे आक्रमण में घायल हो रहे या मारे जा रहे लोगों को देख राष्ट्रपति जेलेंस्की पुतिन के साथ बातचीत कर कोई समाधान निकालने तैयार हो गए हैं.

यूक्रेन के क्रेमिना शहर में रूसी टैंक ने ओपन फायर कर दिया, जिसमें केयर होम में रह रहे 56 बुजुर्गों की मौत हो गई है. ये जानकारी लुहांस्क क्षेत्र के अध्यक्ष ने दी है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने रविवार को कहा कि 19 मार्च की मध्यरात्रि तक यूक्रेन में कम से कम 902 नागरिक मारे गए हैं और 1,459 घायल हुए हैं.

ओएचसीएचआर ने कहा कि अधिकांश हताहत विस्फोटक हथियारों जैसे भारी तोपखाने और कई-लॉन्च रॉकेट सिस्टम, मिसाइल और हवाई हमलों की वजह से हुए. हालांकि माना जा रहा है कि वास्तविक टोल काफी अधिक है क्योंकि ओएचसीएचआर, जिसकी देश में एक बड़ी निगरानी टीम है जो अभी तक मारियुपोल सहित कई बुरी तरह से प्रभावित शहरों से हताहतों की रिपोर्ट प्राप्त करने या सत्यापित करने में सक्षम नहीं हो सकी है.

 यूक्रेन के अधिकारियों ने रविवार को कहा कि रूसी सेना ने बंदरगाह शहर मारियुपोल में एक कला स्कूल पर बमबारी की है, जिसमें कम से कम 400 लोगों ने शरण ली हुई थी. एक हफ्ते के अंदर यह दूसरा मौका है जब रूस ने ऐसी इमारत को निशाना बनाया गया, जहां आम नागरिकों ने शरण ले रखी थी. इससे पहले रूसी सैनिकों ने बुधवार को मारियुपोल में एक थिएटर पर भी बमबारी की थी. माना जा रहा है कि उसके भीतर करीब 1300 लोग थे.

रूस की सेना ने पहली बार यूक्रेन पर अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल दागी है। यह महाविनाशक मिसाइल इतनी खतरनाक है कि अभी तक किसी भी देश के पास इसका तोड़ नहीं है। यह मिसाइल परमाणु बम गिराने में भी सक्षम है। रूस ने इस हमले को लेकर एलान किया है कि उसने यूक्रेन में हाइपरसोनिक मिसाइल किंझल का इस्तेमाल करके पश्चिमी देशों की ओर से दिए गए हथियारों के गोदाम को तबाह कर दिया है। इस मिसाइल से यूक्रेन के डेलिअटयन गांव में हमला किया गया, जो पहाड़ों से घिरा हुआ है।

माना जा रहा है कि इस मिसाइल को मिग-31 सुपरसोनिक विमान से दागा गया, जिसे रूस ने कालिनग्राद के चाकलोवस्क नौसैन्य अड्डे पर तैनात कर रखा है। कालिग्राद पोलैंड और लिथुआनिया की सीमा के पास स्थित रूसी शहर है जहां उसका एक विशाल सैन्य अड्डा भी मौजूद है। यह मिसाइल आवाज से 10 गुना ज्यादा गति से उड़ान भरने में सक्षम हैं और परमाणु बम गिराने की ताकत रखती हैं।

इतनी ज्यादा गति की वजह से यह दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का मौका नहीं देती है और उसे तबाह करके रख देती है। किंझल हाइपरसोनिक मिसाइल करीब 2000 किमी तक मार कर सकती है। किंझल मिसाइल परंपरागत विस्फोटक के अलावा 500 किलोटन के परमाणु बम भी ले जा सकती है। यह परमाणु बम हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 33 गुना ज्यादा शक्तिशाली हो सकते हैं।

इस हमले के बाद रूस और यूक्रेन-दोनों की ओर से रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की आशंका जताई जाने लगी है। किंझल के इस्तेमाल को लेकर जानकारी देते हुए रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि यूक्रेन अपने ही लोगों पर रसायनिक हथियारों का इस्तेमाल करने की तैयारी में है और इल्जाम रूस पर लगाया जाएगा। रूस ने दावा किया कि अमेरिका इस काम में यूक्रेन का समर्थन कर रहा है। जवाब में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने रूस के इल्जामों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कहा कि रूस के इल्जाम सफेद झूठ हैं।

दरअसल, स्टाकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति शोध संस्थान यानी सीपरी हर साल दुनिया भर में हथियारों के बारे में रिपोर्ट तैयार करती है। सीपरी के मुताबिक 2021 की शुरुआत में दुनिया भर में कुल 13,080 परमाणु हथियार मौजूद थे। इनमें से 3,825 परमाणु हथियार सेनाओं के पास हैं और 2,000 हथियार हाई अलर्ट की स्थिति में रखे गए हैं, यानी कभी भी इनका उपयोग किया जा सकता है।

इनके अलावा अमेरिका और रूस के पास रासायनिक हथियारों का सबसे बड़ा जखीरा है। अमेरिका के आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के मुताबिक, साल 1997 में रासायनिक हथियारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में आठ देशों ने जानकारी दी कि उनके पास कितने ऐसे हथियार हैं।

यह देश थे- अल्बानिया, भारत, इराक, लीबिया, सीरिया, अमेरिका, रूस और एक अज्ञात देश, जिसका नाम कभी बाहर नहीं आया। अमेरिका के अलावा सभी देशों ने अपने घोषित जखीरे को नष्ट कर दिया है। हालांकि, अघोषित तौर पर कई देशों ने अपने रासायनिक हथियार नष्ट नहीं किए। अंतरराष्ट्रीय नियमों के हिसाब से रासायनिक और जैविक हथियारों का इस्तोमल प्रतिबंधित है।

साल 1925 में तय हुए जेनेवा प्रोटोकाल में तय किया गया था कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय सैन्य गतिरोध या युद्ध में रासायनिक या जैविक हथियारों का इस् तेमाल नहीं किया जाएगा, लेकिन इस्तेमाल होता रहा है।

News-Desk

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