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 चैत्र नवरात्र-2019

चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2019) इस बार 6 अप्रैल से शुरू हो रही हैं जो 14 अप्रैल तक चलेगी।  अप्रेल को ही राम नवमी  मनाई जाएगी। राम नवमी का अभिजित मुहूर्त 11:56 से 12:47 तक रहेगा। भगवान विष्णु ने सभी युग में अधर्म का नाश करके धर्म की स्थापना की है और इन्हीं अवतारों में से एक अवतार उन्होंने भगवान श्रीराम के रूप में लिया था। जिस दिन भगवान राम ने राजा दशरथ के घर व माता कौशल्या की कोख में जन्म लिया था, वह दिन चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी का दिन था। जिसके बाद से इस तिथि को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है। यूं तो साल में चार पर नवरात्रि आती है, मगर चैत्र और शारदीय नवरात्र का अधिक महत्व है। चैत्र के नवरात्र इस बार 6 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं। इन नौ दिनों में पूरे विधि-विधान से मां शक्ति के नौ रूपों  मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। 6 अप्रैल से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्रि 14 अप्रैल को राम नवमी के त्योहार के साथ सम्पन्न होंगे।  चैत्र नवरात्र से हिंदू नववर्ष का प्रारंभ माना जाता है और पंचांग की गणना की जाती है। पुराणों के अनुसार चैत्र नवरात्रि से पहले मां दुर्गा अवतरित हुई थीं। ब्रह्म पुराण के अनुसार, देवी ने ब्रह्माजी को सृष्टि निर्माण करने के लिए कहा। चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप में अवतार लिया था। श्रीराम का जन्म भी चैत्र नवरात्र में ही हुआ था।

 ज्योत‌िष की दृष्ट‌ि से भी चैत्र नवरात्र का महत्व है क्योंक‌ि इसके दौरान सूर्य का राश‌ि परिवत्रन होता है। कहा जाता है कि नवरात्र में देवी और नवग्रहों की पूजा से पूरे साल ग्रहों की स्थ‌ित‌ि अनुकूल रहती है। पंडितों का मानना है कि चैत्र नवरात्र के दिनों में मां स्‍वयं धरती पर आती हैं, इसल‌िए मां की पूजा से इच्छ‌ित फल की प्राप्त‌ि ‌होती है।

  चैत्र नवरात्र-2019 की तिथियां

पहला नवरात्र 6 अप्रैल शनिवार को : घट स्थापन व मां शैलपुत्री पूजा,  मां ब्रह्मचारिणी पूजा

दूसरा नवरात्र 7 अप्रैल रविवार को :  मां चंद्रघंटा पूजा

तीसरा नवरात्र 8 अप्रैल सोमवार को :  मां कुष्मांडा पूजा

चौथा नवरात्र 9 अप्रैल मंगलवार को :  मां स्कंदमाता पूजा 

पांचवां नवरात्र 10 अप्रैल बुधवार को : पंचमी तिथि सरस्वती आह्वाहन 

छष्ठ नवरात्र 11 अप्रैल वीरवार को:  मां कात्यायनी पूजा

सातवां नवरात्र 12 अप्रैल शनिवार को:  मां कालरात्रि पूजा 

नवमी 14 अप्रैल रविवार को : मां महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी, महानवमी

नवरात्र वह समय है, जब दोनों रितुओं का मिलन होता है। इस संधि काल मे ब्रह्मांड से असीम शक्तियां ऊर्जा के रूप में हम तक पहुँचती हैं। मुख्य रूप से हम दो नवरात्रों के विषय में जानते हैं – चैत्र नवरात्र एवं आश्विन नवरात्र। चैत्र नवरात्रि गर्मियों के मौसम की शुरूआत करता है और प्रकृति माँ एक प्रमुख जलवायु परिवर्तन से गुजरती है। यह लोकप्रिय धारणा है कि चैत्र नवरात्री के दौरान एक उपवास का पालन करने से शरीर आगामी गर्मियों के मौसम के लिए तैयार होता है। नवरात्रि में माँ भगवती के सभी नौ रूपों की उपासना की जाती है। इस समय आध्यात्मिक ऊर्जा ग्रहण करने के लिए लोग विशिष्ट अनुष्ठान करते हैं। इस अनुष्ठान में देवी के रूपों की साधना की जाती है।हिंदू पुराण और ग्रंथों के अनुसार, चैत्र नवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण नवरात्रि है जिसमें देवी शक्ति की पूजा की जाती थी, रामायण के अनुसार भी भगवान राम ने चैत्र के महीने में देवी दुर्गा की उपासना कर रावण का वध कर विजय प्राप्त की थी। इसी कारणवश चैत्र नवरात्रि पूरे भारत में, खासकर उत्तरी राज्यों में धूमधाम के साथ मनाई जाती है। यह हिंदू त्यौहार हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बहुत लोकप्रिय है। महाराष्ट्र राज्य में यह “गुड़ी पड़वा” के साथ शुरू होती है, जबकि आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिणी राज्यों में, यह उत्सव “उगादी” से शुरू होता है।

 

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        पं0 विष्णु शर्मा

कोई एक मनोकामना पूर्ति हेतु नवरात्र में करें उपाय

विष्णुलोक के संस्थापक ज्योतिषविद्‌ पंडित विष्णु शर्मा और संचालक विनय पंडितने बताया कि नवरात्र के नौ दिन तक प्रतिदिन आम की छोटी छोटी लकडियों पर कपूर एवं गाय के घी से अग्नि चेतन करके * ऊँ दुं दुर्गाये नमः स्वाहा इस मंत्र के साथ 108 गुग्गल की आहुति दें और हवन के बाद कहें हे मातेश्वरी हमारी अमुक मनोकामना पूर्ण करना और हमारे घर में सुख, ऐश्वर्य प्रदान करना ।

आय बढोत्तरी हेतु –
नवरात्र के प्रथम दिन देवी का ध्यान करके 05 नींबू काटकर अपने घर या व्यापार स्थल पर रख दें इसके साथ एक मुट्ठी पीली सरसों तथा एक मुट्ठी काली मिर्च भी रख दें। अगले दिन उक्त सभी सामग्री घर या व्यवसाय स्थल से दूर कहीं निर्जन स्थान में दबा आये। इस उपाय को करने से आय में बढोत्तरी होगी तथा घर या व्यापार में किसी भी प्रकार का जादू टौना और किसी भी बन्धन से मुक्त रहेगा।

राहूकाल में कोई भी शुभ कार्य नहीं- नवरात्र 06 अप्रैल 2019 से प्रारम्म होकर 14 अप्रैल 2019 तक रहेंगे।06 अप्रैल 2019 को घट (कलश) स्थापना दोपहर 11:37 से 12:24 के बीच कर लिया जाये तो शुम व श्रेष्ठ रहेगा। क्योंकि 06 अप्रैल 2019 को प्रातः 09 बजे से 10:30 बजे तक राहूकाल रहेगा। राहूकाल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। नवरात्र के दिनों में मां भगवती दुर्गा नौदिन के लिए पृथ्वी पर विचरण करती है। इन नौ दिनों में जो व्यक्ति मां भगवती का अपनेघर में आहवान करके उसकी पूजा, अर्चना करता है, उसके परिवार में सुख, ऐश्वर्य काअपार भण्डार रहता है। अपनी कुल परम्परा के अनुसार नवरात्रों के अन्तिम दिन कन्यापूजन भी करना चाहिए। कन्याओं का पूजन करके उन्हें भोजन कराना चाहिए। कन्या 03वर्ष से 10 वर्ष तक की आयु की होनी चाहिए।

 

 घट स्थापनाMaxresdefault |

धर्मशास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है. धारणा है कि कलश के मुख में विष्णुजी का निवास, कंठ में रुद्र और मूल में ब्रह्मा स्थित होती हैं. साथ ही ये भी मान्यता है कि कलश के मध्य में दैवीय मातृशक्तियां निवास करती हैं. इसलिए नवरात्र के शुभ दिनों में घट स्थापना की जाती है.शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन अभिजीत मुहूर्त में 6 बजकर 9 मिनट से लेकर 10 बजकर 19 मिनट के बीच घट स्थापना करना बेहद शुभ होगा।एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां भगवती का विग्रह स्थापित करके उसकीनौ दिन तक नित्य पूजा की जाती है। मां भगवती दुर्गा के साधक को चाहिए कि वह नित्य दुर्गा सप्तशती का पाठ करें, दुर्गा चालीसा पढे और दुर्गा जी के नवार्ण मंत्र ऊँ  ऐं हीं क्लीं चामुण्डायै विच्चें“| इस मंत्र की स्फटिक माला से एक माला प्रतिदिन करें।

कौन हैं देवी शैलपुत्री

देवी शैल पुत्री का वर्णन हमें ब्रह्म पुराण में मिलता है. पुराण के अनुसार चैत्र प्रतिपदा के प्रथम सूर्योदय पर ब्रह्मा ने संसार की रचना की थी. माना जाता है कि इसी दिन श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ था.नवरात्र की प्रथम देवी शैलुपुत्री मानव मन पर अपनी सत्ता रखती हैं. उनका चंद्रमा पर भी आधिप्तय माना जाता है. शैलपुत्री पार्वती का ही रूप हैं. पर्वतराज हिमालय के घर में जन्म लेने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है.

क्यों होती है पहले दिन इनकी पूजा

कथा है कि देवी पार्वती शिव से विवाह के पश्चात हर साल नौ दिन अपने मायके यानी पृथ्वी पर आती थीं. नवरात्र के पहले दिन पर्वतराज अपनी पुत्री का स्वागत करके उनकी पूजा करते थे इसलिए नवरात्र के पहले दिन मां के शैलपुत्री रुप की पूजा की जाती है.घट स्थापना नवरात्रि के पहले दिन सबसे आवश्यक है, जो ब्रह्मांड का प्रतीक है और इसे पवित्र स्थान पर रखा जाता है, घर की शुद्धि और खुशाली के लिए।

 अखण्ड ज्योति

नवरात्रि ज्योति घर और परिवार में शांति का प्रतीक है। इसलिए, यह जरूरी है कि आप नवरात्रि पूजा शुरू करने से पहले देसी घी का दीपक जलतें हैं। यह आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में मदद करता है और भक्तों में मानसिक संतोष बढ़ाता है।

जौ की बुवाई

नवरात्रि में घर में जौ की बुवाई करते है। ऐसी मान्यता है की जौ इस सृष्टी की पहली फसल थी इसीलिए इसे हवन में भी चढ़ाया जाता है। वसंत ऋतू में आने वाली पहली फसल भी जौ ही है जिसे देवी माँ को चैत्र नवरात्रि के दौरान अर्पण करते है।

नव दिवस भोग 

प्रत्येक दिन एक देवी का प्रतिनिधित्व किया जाता है और प्रत्येक देवी को कुछ भेंट करने के साथ भोग चढ़ाया जाता है। सभी नौ दिन देवी के लिए 9 प्रकार भोग निम्न अनुसार हैं:

  • 1 दिन: केले
  • 2 दिन: देसी घी (गाय के दूध से बने)
  • 3 दिन: नमकीन मक्खन
  • 4 दिन: मिश्री
  • 5 दिन: खीर या दूध
  • 6 दिन: माल पोआ
  • 7 दिन: शहद
  • 8 दिन: गुड़ या नारियल
  • 9 दिन: धान का हलवा

दुर्गा सप्तशती

दुर्गा सप्तशती शांति, समृद्धि, धन और शांति का प्रतीक है, और नवरात्रि के 9 दिनों के दौरान दुर्गा सप्तशती के पाठ को करना, सबसे अधिक शुभ कार्य माना जाता है।

नौ दिनों के लिए नौ रंग

शुभकामना के लिए और प्रसंता के लिए, नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान लोग नौ अलग-अलग रंग पहनते हैं:

  • 1 दिन: हरा
  • 2 दिन: नीला
  • 3 दिन: लाल
  • 4 दिन: नारंगी
  • 5 दिन: पीला
  • 6 दिन: नीला
  • 7 दिन: बैंगनी रंग
  • 8 दिन: गुलाबी
  • 9 दिन: सुनहरा रंग

 कन्या पूजन

कन्या पूजन माँ दुर्गा की प्रतिनिधियों (कन्या) की प्रशंसा करके, उन्हें विदा करने की विधि है। उन्हें फूल, इलायची, फल, सुपारी, मिठाई, श्रृंगार की वस्तुएं, कपड़े, घर का भोजन (खासकर: जैसे की हलवा, काले चने और पूरी) प्रस्तुत करने की प्रथा है।

अनुष्ठान के कुछ विशेष नियम

बहुत सारे भक्त निचे दिए गए अनुष्ठानों का पालन करते हैं:

  • प्रार्थना और उपवास चैत्र नवरात्रि समारोह का प्रतीक है। त्योहार के आरंभ होने से पहले, अपने घर में देवी का स्वागत करने के लिए घर की साफ सफाई करते हैं।
  • सात्विक जीवन व्यतीत करते हैं। भूमि शयन करते हैं। सात्त्विक आहार करते हैं।
  • उपवास करते वक्त सात्विक भोजन जैसे कि आलू, कुट्टू का आटा, दही, फल, आदि खाते हैं।
  • नवरात्रि के दौरान, भोजन में सख्त समय का अनुशासन बनाए रखते हैं और अपने व्यवहार की निगरानी भी करते हैं, जैसे की-

             अस्वास्थ्यकर खाना (Junk Food) नहीं खाते।              सत्संग करते हैं।           ज्ञान सूत्र से जुड़ते हैं।            ध्यान करते हैं।  चमड़े का प्रयोग नहीं करते हैं।

              क्रोध से बचे रहते हैं।  कम से कम 2 घंटे का मौन रहते हैं।  अनुष्ठान समापन पर क्षमा प्रार्थना का विधान है तथा विसर्जन करते हैं।

 

 

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