राहुल गांधी द्वारा अध्यादेश की प्रति फाड़े जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई: Ghulam Nabi Azad
Ghulam Nabi Azad ने कहा कि राहुल गांधी प्राथमिक कारण थे जिनकी वजह से उन्होंने एवं कई अन्य ने कांग्रेस को छोड़ा. उन्होंने दावा किया कि देश की सबसे पुरानी पार्टी में रहने के लिए ‘रीढ़विहीन’ होने की जरूरत है. उन्होंने दावा किया कि अब न ही कांग्रेस संसदीय पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी के हाथ में और न ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हाथ में है कि वे चाहकर भी पार्टी में उनकी वापसी करा दें.
Ghulam Nabi Azad ने जोर देकर कहा कि अगर राहुल गांधी भी उन्हें पार्टी में वापस आने को कहेंगे तो यह ‘देर से उठाया गया अपर्याप्त’ कदम होगा. कांग्रेस से अलग होने और अपनी डमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) गठित करने वाले आजाद ने कहा कि आज कल राजनीति में कोई भी ‘अछूत’ नहीं है और सरकार बनाने के लिए किसी भी दल के साथ जा सकते हैं. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से गठबंधन करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया.
Ghulam Nabi Azad ने कहा कि अगर राहुल गांधी ने 2013 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश को नहीं फाड़ा होता तो उन्हें आज (संसद सदस्य से) अयोग्य नहीं ठहराया जाता. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी द्वारा अध्यादेश की प्रति फाड़े जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई क्योंकि तत्कालीन केंद्रीय मंत्रिमंडल ‘कमजोर’ था.
Ghulam Nabi Azad अपनी नई किताब ‘आजाद : एन ऑटोबायोग्राफी’ के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे. उनकी इस किताब का पूर्व केंद्रीय मंत्री और जम्मू-कश्मीर के पूर्व सद्र-ए-रियासत डॉ.कर्ण सिंह ने लोकार्पण किया. आजाद ने कहा, ‘ट्विटर के जरिये काम करने वाले नेताओं के मुकाबले वह 2000 प्रतिशत अधिक कांग्रेसी हैं.’ जब आजाद से पूछा गया कि क्या राहुल गांधी कांग्रेस छोड़ने के कारण थे, उन्होंने कहा, ‘हां, मेरे लिए ही नहीं बल्कि कम से कम कुछ दर्जन युवा और पुराने नेताओं के लिए. अगर आप कांग्रेस में रहना चाहते हैं तो रीढ़विहीन होना पड़ेगा.’
Ghulam Nabi Azad ने कहा कि जब शीर्ष नेतृत्व किसी जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने जा रहा है तो नेताओं को साथ जाने पर मजबूर नहीं किया जाना चाहिए जैसे अब हो रहा है. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्रियों का हवाला दिया जब वे किसी जांच आयोग या जांच एजेंसी के सामने जाते थे तो नेता उनके साथ स्वेच्छा से जाते थे न कि व्हिप जारी किया जाता था जैसा कि आज हो रहा है.
