भारतीय योग संस्थान के तत्वावधान में योग शिविर का समापन
मुजफ्फरनगर। भारतीय योग संस्थान के तत्वावधान में ग्रीन लैंड माडर्न जू०हाई स्कूल मुजफ्फर नगर में संचालित निःशुल्क योग साधना केंद्र में चल रहे सात दिवसीय ध्यान योग शिविर का समापन हो गया।
योगाचार्य सुरेन्द्र पाल सिंह आर्य ने कहा कि ध्यान को परिभाषित नहीं किया जा सकता,ध्यान अनुभूति की चीज है।यह चित्त की निर्विकार अवस्था है,यानी जब मन शांत होता है तब ध्यान लगता है।मन की तीन अवस्थाओ चेतन, अवचेतन तथा अचेतन को मिलाकर चित्त बनता है।
जब मन के तीनों स्तरों पर उनके कार्यकलाप रूक जाते हैं तभी मन शांत होता हैऔर तभी साधक ध्यान की गहराई में जाने लगता है।उन्होंने बताया कि ध्यान वह अवस्था है जब हम शरीर और मन को पार कर आत्मा के उस स्तर पर पहुंच जाते हैं
जो शुद्ध,चेतन है ,जो परम आनंद की अनुभूति करवाता है ।जो सांसारिक सुखो से भिन्न है,अकथनीय है व अवर्णनीय है ।यही अवस्था अपने आत्मस्वरूप में स्थित होना कहलाती है।
ध्यान अंदर की यात्रा है । यह बाहर से अंदर जाने की कला है ।उन्होंने बताया कि यह आत्म अनुसंधान की वह तकनीक है जिसके जरिए हम अपने अस्तित्व की उस गहराई में उतर जाते है
जहाँ वास है जीवन स्रोत का, जहाँ वास है शांति का और जहाँ वास है आनंद का। योग शिक्षक यज्ञ दत्त आर्य ने कहा कि ध्यान के नियमित अभ्यास से चिंता,भय ,तनाव, अवसाद व माईग्रेन जैसे घातक रोगों का निवारण होता है।तन व मन दोनों शांत व स्वस्थ बनते हैं। क्षेत्रीय प्रधान राजसिह पुण्डीर ने कहा कि ध्यान के लिए तीन बातें आवश्यक है ।
स्थिरता,निरन्तरता व समय बद्धता।बहिरंग साधना को अंतरंग साधना में बदलना ही ध्यान है और यही मनुष्य जीवन का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए ।
इस अवसर पर सत्यवीर सिंह पंवार,केंद्र प्रमुख श्रीमती रजनी मलिक ,राजीव रघुवंशी,राजपाल,कुलदीप अरोरा,मुनेश मान,अनिता चौधरी,रीतू मलिक, अंजलि,पूजा,सुमन,बेबी सैनी,सविता ,नीलम राठी आदि साधक एवं साधिकाओं ने भाग लिया।
