आधुनिक भारत में बुनियादी मानवाधिकारों को समझने पर श्रीराम कॉलेज ऑफ लॉ, Muzaffarnagar में आयोजित हुआ सेमिनार
Muzaffarnagar आज का दिन मानवता के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर लेकर आया, जब ‘अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस’ के अवसर पर श्रीराम कॉलेज ऑफ लॉ, मुजफ्फरनगर के प्रांगण में एक भव्य सेमिनार का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम का विषय था – ’’आधुनिक भारत में बुनियादी मानवाधिकारों को समझना’’, जो मानवता, समाज और नागरिक अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने का एक प्रयास था। यह सेमिनार न केवल छात्रों के लिए बल्कि समाज के सभी वर्गों के लिए एक प्रेरणादायक अनुभव रहा।
सेमिनार की शुरुआत और स्वागत समारोह
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन से किया गया, जिसमें महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. श्रीमति पूनम शर्मा, प्रवक्ताओं और विद्यार्थियों ने मिलकर भाग लिया। अतिथियों को पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया और उनके सम्मान में सभा का वातावरण और भी गरिमामय हो गया। उद्घाटन समारोह में महाविद्यालय की प्रवक्ता आंचल अग्रवाल ने सबसे पहले मंच पर आकर सभी को सम्बोधित किया। उन्होंने बताया कि मनुष्य का जन्म एक शिशु के रूप में होता है, लेकिन जन्म के साथ ही उसे गरिमामय जीवन जीने का अधिकार प्राकृतिक रूप से प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने 10 दिसम्बर 1948 को ‘मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा’ की थी, जो आज के दिन को महत्वपूर्ण बनाती है।
मुख्य अतिथि का संबोधन
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय न्यायमूर्ति वीरेन्द्र कुमार, पूर्व न्यायाधीश, इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ बैंच उपस्थित रहे। उन्होंने अपने उद्घाटन भाषण में कहा, “सभ्य समाज में मानवाधिकार व्यक्तित्व के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये अधिकार व्यक्ति को वह स्वतंत्रता और सम्मान प्रदान करते हैं, जो उसे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में सक्षम बनाते हैं।” उनके अनुसार, मानवाधिकार हर व्यक्ति के जीवन में मूलभूत आवश्यकता है, और इनके बिना एक व्यक्ति का जीवन अधूरा है।
छात्रों की भागीदारी और विचार
सेमिनार में महाविद्यालय के एलएलबी, बीएएलएलबी, और बीकॉमएलएलबी के विद्यार्थियों ने भी अपनी भागीदारी दिखाई। छात्रों ने मानवाधिकारों के विषय में अपने विचार प्रस्तुत किए, जिनमें छात्रा वंश त्यागी, अरीबा आमिर, अक्षिता वर्णवाल, ह्रदया कटारिया, श्रेया राजपूत, अकबर रेहान, हुरैन खान, मेघा, मुस्कान वशिष्ट, सानिया शमशेर, गुलफ्शा शामिल थे। छात्रों ने अपने-अपने भाषणों के माध्यम से यह बताया कि मानवाधिकार सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रह सकते, बल्कि इनका समाज में सही तरीके से पालन होना आवश्यक है।
डॉ. एस.सी. कुलश्रेष्ठ का प्रेरणादायक भाषण
सेमिनार के अध्यक्ष डॉ. एस.सी. कुलश्रेष्ठ, चेयरमैन, श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज, मुजफ्फरनगर ने अपने संबोधन में कहा, “मानव अधिकारों को समझने की पहली आवश्यकता स्वयं हमारे लिए है। हम, एक राष्ट्र के नागरिक के रूप में, उन अधिकारों के प्रति जागरूक रहें, जिनके हम अधिकारी हैं। यही समझ हमें अपने अधिकारों का सही तरीके से उपयोग करने और किसी भी प्रकार के शोषण के खिलाफ लड़ने में सहायता करेगी।”
डॉ. कुलश्रेष्ठ ने बताया कि मानवाधिकार केवल अधिकारों की ही बात नहीं करते, बल्कि ये हमारे कर्तव्यों की भी ओर इंगीत करते हैं। हमें अपने अधिकारों का प्रयोग समाज के अन्य व्यक्तियों की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए करना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि डॉ. रविन्द्र प्रताप सिंह का योगदान
विशिष्ट अतिथि डॉ. रविन्द्र प्रताप सिंह, डायरेक्टर रिसर्च व प्राचार्य चौ. हरचंद सिंह महाविद्यालय, खुर्जा ने अपने विचारों में कहा कि मानवाधिकारों की चर्चा में कर्तव्यों का भी समावेश होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अधिकारों का उपयोग तभी सही है, जब उन्हें दूसरों की स्वतंत्रता और गरिमा का सम्मान करते हुए किया जाए। उनके अनुसार, एक जिम्मेदार नागरिक ही समाज में परिवर्तन और प्रगति ला सकता है।
सेमिनार का संचालन और आयोजन की सफलता
महाविद्यालय की प्रवक्ता आंचल अग्रवाल ने कार्यक्रम का संचालन किया और इसे सफल बनाने में अपनी पूरी मेहनत लगाई। उन्होंने प्रत्येक भागीदार का धन्यवाद किया और सेमिनार के उद्देश्यों को विस्तार से समझाया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के प्रवक्तागण संजीव कुमार, सोनिया गौड़, राममनू प्रताप सिंह, आकांक्षा त्यागी, डॉ. हीना गुप्ता, अमितोस कुमार, मिनी सिंघल, रितु धीमान, विनय तिवारी, प्रीति चौधरी, और त्रिलोकचन्द का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
सामाजिक प्रभाव और महत्त्व
इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में मानवाधिकारों के महत्व को समझने और उसे बढ़ावा देने के लिए बेहद जरूरी हैं। ये सेमिनार न केवल छात्रों के लिए एक पाठशाला साबित हुए बल्कि समाज के हर तबके के लिए एक प्रेरणा बनकर सामने आए। यही कारण है कि इस तरह के सेमिनारों का आयोजन नियमित रूप से किया जाना चाहिए ताकि मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता और शिक्षा का स्तर बढ़ सके।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. श्रीमति पूनम शर्मा ने आए हुए समस्त अतिथियों और उपस्थित छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम मानवता के मूल्यों को जीवित रखने में मदद करते हैं और यह हमें याद दिलाते हैं कि हमारे अधिकार केवल हमारे लिए नहीं बल्कि समाज के समग्र विकास के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
इस अवसर पर सभी ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे मानवाधिकारों के प्रति जागरूक रहेंगे और उनके उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाएंगे।

