क्रिसमस और नव वर्ष के जश्न में शराब पीने के लिए अब Excise Department से लेनी होगी परमिशन, जानें क्या है पूरा नियम
हर साल क्रिसमस और नव वर्ष के अवसर पर लोग जश्न मनाते हैं, विशेष रूप से विवाह और अन्य समारोहों में जहां शराब का सेवन एक आम बात है। रेस्टोरेंट्स, होटलों, शादी के हॉल और पार्टी वेंयूस पर शराब पीने की परंपरा अब तक हर वर्ष धूमधाम से जारी रहती है। लेकिन अब इस पर एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है, जिसके तहत क्रिसमस और नव वर्ष जैसे समारोहों में शराब परोसने के लिए आयोजकों को आबकारी विभाग/Excise Department से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है।
आबकारी विभाग से परमिशन क्यों जरूरी?
उत्तर प्रदेश की आबकारी (बार लाइसेंसों की स्वीकृति) नियमावली, 2020 के अनुसार, अब क्लबों, सोसाइटी क्लब, रिसॉर्ट्स, फार्म हाउस, मैरेज हॉल, कम्यूनिटी सेंटर, होटलों और रेस्टोरेंट्स जैसे आयोजन स्थलों पर शराब परोसने के लिए एक अस्थायी लाइसेंस (एफ०एल०-11) प्राप्त करना जरूरी होगा। बिना इस परमिशन के शराब की परोसी पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है, जिसके तहत जुर्माना और सजा का प्रावधान है।
कौन प्राप्त करेगा यह लाइसेंस?
यह लाइसेंस आयोजकों को दिया जाएगा जो अपने समारोहों में शराब का सेवन कराना चाहते हैं। आयोजन स्थल जैसे शादी के हॉल, पार्टी प्लॉट, होटल और रिसॉर्ट्स में इस नियम का पालन करना होगा। आयोजकों को आबकारी विभाग की वेबसाइट पर लॉगिन करके आवश्यक जानकारी भरनी होगी और निर्धारित शुल्क अदा करना होगा। इसके बाद उन्हें अस्थायी बार लाइसेंस (एफ०एल०-11) प्राप्त होगा, जो केवल उस विशेष आयोजन के लिए वैध रहेगा।
आबकारी अधिनियम का उल्लंघन करने पर क्या होगा?
यदि कोई व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करता है और बिना परमिशन के शराब परोसता है, तो उसे सजा हो सकती है। उत्तर प्रदेश के संयुक्त प्रान्त आबकारी अधिनियम, 1910 की धारा 63 के तहत ऐसा व्यक्ति छह महीने तक की सजा काट सकता है और उसे जुर्माना भी अदा करना पड़ सकता है। जुर्माने की राशि उस शराब की मात्रा के दस गुने तक हो सकती है, जो बिना लाइसेंस के परोसी गई थी, या फिर पांच हजार रुपये, जो भी ज्यादा हो।
एफ०एल०-11 लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया
एफ०एल०-11 लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आयोजकों को कुछ आसान कदमों का पालन करना होगा। सबसे पहले उन्हें यूपी सरकार की आबकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर लॉगिन करना होगा। वहां पर निर्धारित सूचना भरनी होगी, जैसे आयोजन का स्थान, समय, और अनुमानित लोगों की संख्या। इसके बाद संबंधित शुल्क का भुगतान किया जाएगा, जिसके बाद लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद, आयोजक अपने समारोह में शराब का सेवन करवा सकते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि लाइसेंस की वैधता केवल उस विशेष आयोजन तक ही सीमित है।
क्या यह नियम विवाह आयोजनों पर भी लागू होगा?
हां, यह नियम विवाह समारोहों पर भी लागू होगा। यदि किसी विवाह में शराब परोसी जाएगी, तो आयोजकों को इस नियम का पालन करना होगा और एफ०एल०-11 लाइसेंस प्राप्त करना होगा। कई बार यह देखा गया है कि शादी के आयोजनों में शराब का सेवन होता है, लेकिन बिना किसी सरकारी अनुमति के। अब इस नए नियम के तहत, आयोजकों को पहले से अनुमति प्राप्त करनी होगी, ताकि किसी भी कानूनी परेशानी से बचा जा सके।
आबकारी विभाग के इस कदम से क्या होगा प्रभाव?
इस कदम से सरकार का मुख्य उद्देश्य शराब के सेवन को नियंत्रित करना है और यह सुनिश्चित करना है कि यह केवल वैध रूप से और निर्धारित नियमों के तहत ही किया जाए। इससे न केवल शराब के अवैध कारोबार पर अंकुश लगेगा, बल्कि यह सुनिश्चित होगा कि शराब का सेवन केवल उपयुक्त और सुरक्षित परिस्थितियों में ही हो। इस कदम से यह भी उम्मीद की जा रही है कि शराब के सेवन से जुड़ी असुरक्षा की घटनाओं में कमी आएगी, खासकर जब लोग समारोहों में शराब पीते हुए अनुशासनहीनता करते हैं।
शराब के सेवन पर नियंत्रण जरूरी क्यों है?
शराब के सेवन पर नियंत्रण इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि यह न केवल कानून व्यवस्था को प्रभावित करता है, बल्कि कई बार असामाजिक घटनाओं का कारण भी बनता है। शराब पीने के बाद लोग अक्सर गाड़ी चलाते हैं, जिसके कारण दुर्घटनाएं होती हैं। इसके अलावा, सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने से भी कई बार माहौल खराब होता है और शांति व्यवस्था पर असर पड़ता है। इस आदेश का उद्देश्य ऐसे मामलों को रोकना और लोगों को जिम्मेदारी से शराब सेवन की आदत डालना है।
इस कदम के खिलाफ प्रतिक्रियाएं
जहां एक तरफ सरकार ने इस कदम को लागू किया है, वहीं कुछ लोग इस पर सवाल भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह के कदम से आयोजनकर्ताओं को अतिरिक्त शुल्क और लाइसेंस की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा, जो उनके लिए एक अतिरिक्त बोझ हो सकता है। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि यह कदम विवाह जैसे पारंपरिक आयोजनों पर असर डाल सकता है, क्योंकि कई बार लोग शादी के आयोजनों में शराब का सेवन करना पसंद करते हैं। इसके बावजूद, सरकार का कहना है कि यह कदम शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी है।
मुजफ्फरनगर और पूरे उत्तर प्रदेश में अब यह तय हो चुका है कि क्रिसमस और नव वर्ष जैसे खास अवसरों पर शराब परोसने के लिए आबकारी विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए आयोजकों को एफ०एल०-11 लाइसेंस प्राप्त करना होगा, और बिना इस परमिशन के शराब परोसना कानूनी अपराध माना जाएगा। यह कदम कानून व्यवस्था को बनाए रखने और शराब के सेवन को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।
आबकारी विभाग के नियमों का पालन करना सभी आयोजकों के लिए जरूरी है, ताकि वे किसी भी कानूनी मुश्किल से बच सकें और अपने आयोजन को सुरक्षित और आनंदमय बना सकें।

