उत्तर प्रदेश

Kanpur में इंसानियत शर्मसार: चाची ने चार मासूम भाई-बहनों को हीटर से दागा, घाव देखकर कांप उठी पुलिस

उत्तर प्रदेश के Kanpur से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। महाराजपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में चार मासूम भाई-बहनों के साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि माता-पिता की मौत के बाद चाचा-चाची के साथ रह रहे बच्चों को बेरहमी से पीटा जाता था और यहां तक कि हीटर से दागा भी जाता था।

घटना का खुलासा तब हुआ जब 14 वर्षीय किशोर ने गुरुवार शाम यूपी 112 पर फोन कर मदद मांगी। कांपती आवाज में बच्चे ने कहा— “हैलो पुलिस… जल्दी आओ, हमारी बहन को चाची हीटर से जला रही है…”। यह कॉल सुनते ही कंट्रोल रूम सतर्क हो गया और तत्काल पीआरवी टीम को मौके के लिए रवाना किया गया।


बच्चों के शरीर पर घाव देखकर सन्न रह गई पुलिस टीम

सूचना मिलते ही पीआरवी स्टाफ अमरदीप और सुमित कुमार सिंह गांव पहुंचे। वहां पहुंचने पर उन्होंने देखा कि 14 वर्षीय किशोर के साथ उसका 11 वर्षीय भाई, चार साल का छोटा भाई और नौ साल की बहन मौजूद थे। पुलिसकर्मियों ने जैसे ही बच्चों से बात करनी शुरू की, सभी बच्चे रोने लगे।

बच्चों ने पुलिस को अपने शरीर पर चोटों के निशान दिखाए। किसी की पीठ पर बेल्ट के निशान थे तो किसी के हाथ, हथेली, सिर और जांघों पर जलने और चोट के घाव दिखाई दिए। पुलिसकर्मियों के मुताबिक बच्चों की हालत देखकर वे भी भावुक हो गए।

बच्चों ने आरोप लगाया कि खाना मांगने पर चाची उन्हें बेल्ट से पीटती थी। कई बार हीटर गर्म करके शरीर पर लगाया जाता था। बच्चों ने यह भी कहा कि उन्हें समय पर खाना नहीं दिया जाता और छोटी-छोटी बातों पर प्रताड़ित किया जाता है।


माता-पिता की मौत के बाद चाचा-चाची के साथ रह रहे थे बच्चे

जानकारी के अनुसार चारों भाई-बहनों के माता-पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। इसके बाद से बच्चे अपने चाचा-चाची के साथ रह रहे थे। पड़ोसियों का कहना है कि कई बार बच्चों के रोने और चीखने की आवाजें आती थीं, लेकिन परिवार के झगड़े में पड़ने के डर से कोई खुलकर विरोध नहीं कर पाता था।

ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि बच्चे पहले भी कई बार मारपीट की शिकायत कर चुके थे। हालांकि किसी ने यह नहीं सोचा था कि मामला इतना गंभीर हो सकता है।


ग्रामीणों ने भी बच्चों के आरोपों को बताया सही

पुलिस के गांव पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने बच्चों के आरोपों की पुष्टि करते हुए कहा कि बच्चों के साथ अक्सर सख्ती और मारपीट की जाती थी।

कुछ लोगों ने बताया कि कई बार बच्चों को भूखा भी रखा जाता था। पड़ोसियों के मुताबिक बच्चे अक्सर डरे-सहमे रहते थे और किसी से खुलकर बात नहीं करते थे।

ग्रामीणों ने कहा कि परिवार में विवाद और झगड़े के डर से लोग चुप रहते थे, लेकिन बच्चों की हालत देखकर अब पूरा गांव स्तब्ध है।


चाची ने दी सफाई, कहा- बच्चे स्कूल नहीं जाते और चोरी करते हैं

जब पुलिस ने बच्चों की चाची को बुलाकर पूछताछ की तो उसने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया। महिला का कहना था कि बच्चे स्कूल नहीं जाते और उन्होंने दुकान से चोरी की थी, जिसके कारण उन्हें डांटा और पीटा गया।

हालांकि पुलिसकर्मियों ने महिला को कड़ी फटकार लगाई। पुलिस ने साफ कहा कि बच्चों के साथ इस तरह की हिंसा किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती। पुलिसकर्मियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दोबारा ऐसी शिकायत मिली तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


भूखे बच्चों के लिए पुलिसकर्मी खुद लेकर आए खाना और राशन

घटना का सबसे भावुक पहलू तब सामने आया जब पुलिसकर्मियों को पता चला कि बच्चे भूखे हैं। इसके बाद पीआरवी स्टाफ खुद पास की दुकान पर गया और वहां से खाने-पीने का सामान तथा राशन खरीदकर बच्चों को दिया।

बच्चों को खाना मिलता देख वहां मौजूद कई ग्रामीण भी भावुक हो गए। पुलिसकर्मियों ने बच्चों को समझाया और भरोसा दिलाया कि अब उनके साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा।

इस दौरान कई लोगों ने यूपी 112 की टीम की संवेदनशीलता और तत्परता की सराहना भी की।


थाना प्रभारी पहुंचे मौके पर, शुरू हुई जांच

मामले की जानकारी मिलने के बाद देर शाम महाराजपुर थाना प्रभारी राजेश सिंह भी गांव पहुंचे। उन्होंने बच्चों और ग्रामीणों से पूरे मामले की जानकारी ली।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। जरूरत पड़ने पर बाल कल्याण समिति और संबंधित विभागों की मदद भी ली जाएगी।


डीसीपी पूर्वी ने दी कार्रवाई की चेतावनी

मामले को लेकर Satyajit Gupta, डीसीपी पूर्वी ने बताया कि बच्चों के साथ मारपीट की सूचना मिलने पर पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची थी। उन्होंने कहा कि थाना प्रभारी मामले की जांच कर रहे हैं और अगर दोबारा ऐसी शिकायत सामने आती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करने के लिए पुलिस लगातार निगरानी रखेगी।


बढ़ते बाल उत्पीड़न के मामलों ने बढ़ाई चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के साथ हिंसा और मानसिक प्रताड़ना के मामले समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। खासकर अनाथ या कमजोर पारिवारिक स्थिति में रहने वाले बच्चों को अतिरिक्त सुरक्षा और देखभाल की जरूरत होती है।

बाल अधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक कई बार बच्चे डर, शर्म या दबाव की वजह से अपनी पीड़ा किसी से साझा नहीं कर पाते। ऐसे मामलों में पड़ोसियों, शिक्षकों और समाज की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि वे समय रहते बच्चों की मदद करें।


कानपुर के महाराजपुर से सामने आया यह मामला केवल घरेलू हिंसा नहीं बल्कि मासूम बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ा बेहद संवेदनशील मुद्दा बन गया है। पुलिस की तत्परता से बच्चों की पीड़ा सामने आ सकी, लेकिन यह घटना समाज के सामने कई गंभीर सवाल भी छोड़ गई है। बच्चों के शरीर पर मिले घाव केवल शारीरिक चोट नहीं, बल्कि उस दर्द की कहानी हैं जिसे वे लंबे समय से चुपचाप सह रहे थे।

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