Ukraine युद्ध की जड़ में शीतयुद्ध की मानसिकता और ताकत की राजनीति: Chinese diplomat
Chinese diplomat ने कहा है कि NATO को अपने दावे पर अड़िग रहना चाहिए जिसमें उसने वादा किया है कि वह पूर्व दिशा की ओर विस्तार नहीं करेगा. चीन के उप विदेशमंत्री ली युचेंग ने शनिवार को दिए भाषण में यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई के जवाब में पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर सख्त पाबंदियों की आलोचना करते हुए कहा कि Ukraine युद्ध की जड़ में ‘‘ शीतयुद्ध की मानसिकता और ताकत की राजनीति’’ है.
क्रेमलिन (रूसी सरकार का मुख्यालय) के रुख का समर्थन करते हुए Chinese diplomat ने कहा कि ‘‘अगर नाटो का विस्तार और होगा तो यह मॉस्को के करीब पहुंच जाएगा जहां से मिसाइल पांच से सात मिनट में क्रेमलिन को निशाना बना सकते हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रमुख देश को खासतौर पर परमाणु संपन्न देश को हाशिये पर धकेलने का भयानक परिणाम होगा जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता.’’
उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बार-बार दोहराए गए रुख का समर्थन करते हुए कहा कि नाटो को विघठित करना चाहिए था और ‘‘वॉरसा संधि के साथ इतिहास में भेजना चाहिए था.’’ चीनी राजनयिक ने कहा, ‘‘हालांकि, नाटो को विखंडित करने के बजाय मजबूत और विस्तार किया गया है और इसने युगोस्लाविया, इराक, सीरिया और अफगानिस्तान देशों में सैन्य हस्तक्षेप किया.’’
उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी इस रास्ते के नतीजों का अनुमान लगा सकता है. Ukraine संकट कड़ी चेतावनी है.’’ युचेंग ने कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से बातचीत में Ukraineके पक्षों को ‘‘राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाने और चल रहे संवाद और वार्ता को जारी रखने’ का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि यूक्रेन और नाटो को भी रूस से संवाद करना चाहिए ताकि यूक्रेन संकट का समाधान किया जा सके और रूस और Ukraine दोनों की सुरक्षा चिंताओं को दूर किया जा सके.
रूस ने अपने सैकड़ों टैंक खो दिए हैं, कई जले हुए या सड़कों के किनारे छोड़ दिए गए हैं, और इसकी मृत्यु दर हाल के सालों में देश के पिछले सैन्य अभियानों की तुलना में आगे बढ़ती प्रतीत हो रही है. युद्ध शुरू हुए तीन सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी, कीव में आसानी से सरकार बदलने के पुतिन के प्रारंभिक उद्देश्य गायब हो गया है. हालांकि रूस की सेना की स्थिति अब भी मजबूत है.
सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि मजबूत सैन्य ताकत और शहरों को तबाह करने वाले हथियारों के भंडार के साथ, रूसी सेनाएं अपने राष्ट्रपति की योजना के अनुसार लड़ सकती हैं, चाहे वह बातचीत से समझौता का हो या विनाश का. यूक्रेन के लोगों के दृढ़ संकल्पों के बावजूद, रूस की सेना के नुकसान और क्रेमलिन नेताओं की सभी त्रुटियों के बावजूद, इस युद्ध के जल्द समाप्त होने के कोई संकेत नहीं हैं.
अगर पुतिन अपने पड़ोसी पर नियंत्रण करने में विफल भी रहते हैं, तो भी वह उसके शहरों और लोगों पर दंडात्मक हमले जारी रख सकते हैं. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि रूसी सेनाएं बड़े शहरों को घेर रही हैं और इस तरह की दयनीय स्थिति पैदा करना चाहती हैं कि यूक्रेन के नागरिकों को उनका सहयोग करना पड़े. हालांकि, जेलेंस्की ने शनिवार को चेताया कि ये रणनीति सफल नहीं होगी और यदि रूस युद्ध को समाप्त नहीं करता है तो उसे लंबे समय तक नुकसान उठाना पड़ेगा. यूक्रेन के राष्ट्रपति ने क्रेमलिन (रूस के राष्ट्रपति कार्यालय) पर जानबूझकर ‘‘मानवीय संकट’’ पैदा करने का आरोप लगाया.
जेलेंस्की ने राष्ट्र के नाम अपने वीडियो संदेश में कहा, ‘‘यह पूरी तरह से सोची-समझी चाल है. बस अपने लिए सकून की बात है कि मॉस्को के उस स्टेडियम में 14,000 लाशें हैं और हजारों घायल लोग हैं. ये वो कीमत है जो रूस को अब तक युद्ध में चुकानी पड़ी है.’’ वीडियो कीव स्थित राष्ट्रपति कार्यालय के सामने रिकॉर्ड किया गया था.










