Diabetes: दिल पर भारी पड़ सकती है मधुमेह की बीमारी
भारत के पांच महा रोगों में एक नाम मधुमेह (Diabetes) का भी आता है। यह जानलेवा बीमारी कई अन्य बीमारियों के स्रोत भी है जैसे मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति अन्य व्यक्तियों की तुलना में शीघ्र और ज्यादा हृदय रोग , नेत्र हीनता, किडनी रोगी,बी. पी., लगातार संक्रमण और यौन समस्याओं के शिकार हो जाता है.
अगर कोई व्यक्ति मधुमेह (Diabetes) से पीड़ित नहीं है लेकिन वह मोटा है तो भी खुश होने की जरूरत नहीं है क्योंकि पटना हेल्थ केयर के डॉ वेद प्रकाश के अनुसार वह भी कभी न कभी मधुमेह (Diabetes) से पीड़ित हो सकता है मधुमेह के हर रोगी के गुर्दे पर इस रोग का 15 – 20 वर्ष बाद असर हो जाता है एवं गुर्दे काम करना बंद कर देते हैं। शुरू के 5 वर्षों में रोगी के पेशाब में प्रोटीन के जांच से पता चलता है तो ऐसे प्रोटीन को माइक्रोएल्बुमिन कहते है।
इसके मूत्र में आने की क्रिया को माइक्रोएल्बुमिनुरिया कहते हैं ।अगर ऐसी अवस्था में रोगी अपने ब्लड शुगर को नियंत्रण कर के रख ले तो बीमारी यहीं पर समाप्त होकर रह जाएगी और पेशाब में प्रोटीन का आना बंद हो जाएगा ।अगर इसे ऐसे ही रहने दिया जाए तो और अधिक मात्रा में प्रोटीन पेशाब में आना शुरू हो जाता है और अंत में गुर्दे काम करना बंद कर देती है।
मधुमेह (diabetes symptoms) और हृदय रोग
दिल के दौरे का सबसे बड़ा कारण है डायबिटीज (Diabetes) यानी मधुमेह के गंभीर रोगी दिल के दौरे पड़ने से मर जाते हैं और उन्हें दर्द तक नहीं होता है. इसे खामोश दिल का दौरा कहते हैं 50% मधुमेह रोगियों में अक्सर उच्च रक्तचाप होता है ऐसे में शरीर को इंसुलिन दिया जाता है पर मोटे शरीर वाले रोगियों में इंसुलिन का वह असर जिसके द्वारा रक्त में चर्बी वर्षा के लिस्ट रोल को नियंत्रित करने में रखा जाता है वह समाप्त हो जाता है ऐसे में कोलेस्ट्रोल एवं ट्रांस गिलसराइड्स का स्तर बढ़ जाता है
यह कोलेस्ट्रॉल रक्त नालियों में जो हृदय चक्र तक पहुंचाती है जमा हो जाता है एवं खून का बहना बंद हो जाता है। जिससे आगे चलकर के दिल का दौरा पड़ सकता है दिल का दौरा पड़ने के चार प्रमुख कारण है ।
- पहला चर्बी का अधिक होना एवं वजन अधिक होना
- दूसरा मधुमेह
- तीसरा उच्च रक्तचाप
- चौथा धूम्रपान
मधुमेह (Diabetes) के रोगी के लिए धूम्रपान करना काफी खतरनाक बात है रोगी के हाथ एवं टांग की रखी जाती है चर्बी की वजह से खून का बंद हो जाता है इससे पैरों में दर्द होने लगता है ।धूम्रपान करने वालों को एन्जाइना तथा दिल का दौरा अधिक होता है। मधुमेह और आंखें—आंखों पर मधुमेह का असर मधुमेह की अवधि पर निर्माण पर निर्भर करता है ।
अगर (Diabetes) रोग की अवधि लंबी हो तो रोग का असर गहरा होता है इससे आंखों की रोशनी कम हो जाती है अगर मधुमेह की अवधि 15 वर्ष से अधिक है एवं रोगी धूम्रपान आदि के शिकार है तो उसकी आंखों का रोग का असर पड़ता है सिर दर्द आंखों की खुजली पानी आना दर्द होना चश्मे का नंबर निरंतर बढ़ते जाना है काले धब्बे दिखाई देना आंखों से दो दो चीज दिखाई देना एवं आंखों के सामने पर्दे का आंखों पर मधुमेह के लक्षण है इसके अलावा मोतियाबिंद और यहां तक नेत्रहीन हो सकता है।
मधुमेह (Diabetes) और स्नायु रोग
मधुमेह (Diabetes ) का स्नायु तंत्र पर भीअसर गहरा पड़ता है । कभी-कभी यही इतनी कमजोर हो जाती है कि चलना मुश्किल हो जाता है सिढ़िया चढ़ना भी बहुत मुश्किल लगता है एवं गिरने का डर रहता है लिखने का टाइप करने में कठिनाई महसूस होती है मधुमेह नियंत्रण में ना हो तो रोग में नपुंसकता के शिकार भी हो सकते हैं मधुमेंह एक वंशानुगत बीमारी है जो कभी जड़ से खत्म नहीं होती परहेज और रहन-सहन को नियंत्रित करके इस बीमारी को नियंत्रण रखा जा सकता है
अक्सर ऐसा पाया गया है कि यदि बीमारी मां एवं बाप से किसी एक को हो वह बच्चे को भी होगी इसलिए इस रोग को नियंत्रण रखने के लिए इंसुलिन एवं खानपान से परहेज के साथ-साथ व्यायाम भी बहुत जरूरी है।व्यायाम मधुमेह में व्यायाम का काफी महत्व है लेकिन रोगी को व्यायाम से पूर्व डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए
ह्रदय की स्थिति देखकर इ.सी. जी. के आधार पर ही किसी प्रशिक्षित गुरु द्वारा ही व्यायाम करना चाहिए उन्हें भारी वजन नहीं उठाना चाहिए ।व्यायाम से चर्बी में सुधार होता है तथा रक्तचाप नियंत्रण रहता है इस रोग में पैरों की विशेष देखभाल की जरूरत होती है। प्रतिदिन तेज चलने से पैरों में रक्त संचार ठीक रहता है
इसके अलावा पैरों में उचित सुरक्षा एवं से जूते पहनने की आदत अपने आप को गंभीर होने से बचा सकते हैं पैरों को अधिक ठंड एवं गर्मी से बचाना चाहिए भारत में मधुमेह के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है पहले यह बीमारी शहरों तक किस समिति लेकिन गलत आदतों के नकल के कारण ग्रामीणों ने भी इसे अपनी तरफ खींच लिया है।

