संपादकीय विशेष

शमी वृक्ष का महत्व

“शमी शमयते पापम् शमी शत्रुविनाशिनी ।अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी ॥
करिष्यमाणयात्राया यथाकालम् सुखम् मया ।तत्रनिर्विघ्नकर्त्रीत्वं भव श्रीरामपूजिता ॥”

हे शमी, आप पापों का क्षय करने वाले और दुश्मनों को पराजित करने वाले हैंआप अर्जुन का धनुष धारण करने वाले हैं और श्री राम को प्रिय हैंजिस तरह श्री राम ने आपकी पूजा करी मैं भी करता हूँमेरी विजय के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं से दूर कर के उसे सुखमय बना दीजिये

शमी जो खेजड़ी या सांगरी नाम से भी जाना जाता है मूलतः रेगिस्तान में पाया जाने वाला वृक्ष है जो थार के मरुस्थल एवं अन्य स्थानों पर भी पाया जाता है… अंग्रेजी में यह प्रोसोपिस सिनेरेरिया नाम से जाना जाता है.विजयादशमी या दशहरे के दिन शमी के वृक्ष की पूजा करने की प्रथा है… कहा जाता है ये भगवान श्री राम का प्रिय वृक्ष था और लंका पर आक्रमण से पहले उन्होंने शमी वृक्ष की पूजा कर के उससे विजयी होने का आशीर्वाद प्राप्त करा था|

आज भी कई जगहों पर लोग रावण दहन के बाद घर लौटते समय शमी के पत्ते स्वर्ण के प्रतीक के रूप में एक दूसरे को बाँटते हैं और उनके कार्यों में सफलता मिलने कि कामना करते हैं…शमी वृक्ष का वर्णन महाभारत काल में भी मिलता है… अपने १२ साल के वनवास के बाद एक साल के अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अपने सारे अस्त्र इसी पेड़ पर छुपाये थे जिसमें अर्जुन का गांडीव धनुष भी था… कुरुक्षेत्र में कौरवों के साथ युद्ध के लिये जाने से पहले भी पांडवों ने शमी के वृक्ष की पूजा करी थी और उससे शक्ति और विजय की कामना करी थी… तब से ही ये माना जाने लगा जो भी इस वृक्ष कि पूजा करता है उसे शक्ति और विजय मिलती है|

एक और कथा के अनुसार कवि कालिदास ने शमी के वृक्ष के नीचे बैठ कर तपस्या कर के ही ज्ञान कि प्राप्ति करी थी. शमी वृक्ष की लकड़ी यज्ञ की समिधा के लिए पवित्र मानी जाती है… शनिवार को शमी की समिधा का विशेष महत्त्व है… शनि देव को शान्त रखने के लिये भी शमी की पूजा करी जाती है… शमी को गणेश जी का भी प्रिय वृक्ष माना जाता है और इसकी पत्तियाँ गणेश जी की पूजा में भी चढ़ाई जाती हैं…
बिहार और झारखण्ड समेत आसपास के कई राज्यों में भी इस वृक्ष को पूजा जाता है और इसे लगभग हर घर के दरवाज़े के दाहिनी ओर लगा देखा जा सकता है… किसी भी काम पर जाने से पहले इसके दर्शन को शुभ माना जाता है…

दशहरा के दिन शम्मी का पौधा खरीद कर घर लाये तथा उसकी सेवा करे और शनिवार को शाम में सरसो तेल का दीपक शम्मी के पौधे के नीचे जलायें,तो कभी जीवन में धन की कमी नहीं
होगी,तथा हर छेत्र में सफलता मिलेगी|

दशहरा के दिन माता के मंदिर में लाल कपड़ा या लाल चुनरी अर्पित करें या मंदिर के बाहर बैठे निर्धन को दान करें तथा मंदिर में प्रकाश दान करें तो जीवन में कभी धन का अभाव नहीं रहेगा ||

News-Desk

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