रसोई का बजट गड़बड़ा गया: महंगाई की मार ने बिगाडा थाली का स्वाद
मुजफ्फरनगर। कोविड में महंगाई की मार ने आमजन की थाली का स्वाद कड़वा कर दिया है। पिछले वर्ष से तेलों और दालों के दामों में उछाल के सामने मध्यम वर्ग के लोग खासे परेशान हैं। घरेलू खाद्य तेल के दाम १८० रुपये लीटर तक पहुंच गए हैं। निरंतर बढ़ रही महंगाई के सामने लोगों को बजट बिगड़ गया है। कोरोना कर्फ्यू में आमदनी कम और खर्च ज्यादा होने से लोग आजिज आ गए हैं।
शहर के अग्रसेन विहार निवासी गृहिणी सुशीला कहती हैं महंगाई से रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। देशी तेल, पीली सरसों, डालडा घी और रिफाइंड के दामों में पिछले साल से लगातार वृद्धि होती जा रही है। सरकार पूंजीपतियों और बड़े स्टाकिस्टों पर कोई लगाम लगाने में नाकाम रही है। हर वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे है।
पहले सरकार गैस सिलिंडरों की सब्सिडी को शून्य के बराबर पर ले आई है।कोर्ट रोड उत्तरी सिविल लाइन निवासी सुनीता कहती है दालों के दामों में इजाफा होना शुरू हो गया है। जिससे किचन की थाली का स्वाद बिगड़ना स्वाभाविक है।
जो दाल पहले एक किलो मंगाई जाती थी, अब आधा किलो मंगाना शुरू कर दिया है। नवीन कूकड़ा मंडी के खुदरा व्यापारी डिंपल गर्ग, अरविंद कुमार, अंशुल गोयल आदि बताते है कोरोना कर्फ्यू के शोर से पहले ही दालों के दामों में बढ़ोतरी होने की वजह समझ नहीं आती।
बड़े व्यापारी माल रोक लेते हैं और बाजार में खाद्य पदार्थों के दामों में आग लग जाती है। इस बार नई सरसों के सीजन में भी तेलों के दाम में भारी बढ़ोतरी रही।
इस ओर सरकार का कोई ध्यान नहीं रहा। महंगाई की मार सीधे आम उपभोक्ताओं पर पड़ती है। तेल और घी के दामों में लगातार हो रहे उछाल पर अंकुश लगना चाहिए।

