मुजफ्फरनगरः प्रियंका का हमला, कहा-सरकार ने किया बॉर्डर पर बेटों को भेजने वाले किसानों का अपमान
आपके गन्ने के भुगतान से ज्यादा उनके हवाईजहाज की कीमत है उनके पास उन्हे खरीदने के लिए पैसे है लेकिन किसान के गन्ना भुगतान के पैसे नहीं है। ये स्थिति आज देश की है। भुगतान का 14 दिनों में वादा हुआ था
लेकिन पिछले चार सालों में कोई दाम गन्ने का नहीं बढा। 20 हजार करोड की स्कीम बन रही है कि जो देश की राजधानी इंडिया गेट और उसके आसपास की इमारते है उनके सौन्दर्यकरण के लिए 20 हजार करोड की स्कीम तो बन गयी है लेकिन भुगतान के 15 हजार करोड उपलब्ध नहीं है।
डीजल 2018 में 60 मिलता था आज कहीं 80 तो कहीं 90में मिल रहा है। बिजली बिल बढ रहे हे, गैस सिलेंडरों की कीमत बढ रही है लेकिन गन्ने का दाम नहीं मिल रहा है।
बिजनौर जाने पर कुछ किसानां ने मुझे पर्चिया दिखाई जिन पर जीरो-जीरो लिखा था। भाजपा सरकार में पिछले साल डीजल पर जो टैक्स लगाया उससे साढे तीन लाख करोड रूपये कमाये मैं पूछती हूं कि कहां गये वे रूपये। 2014 से अब तक मोदी सरकार ने पैट्रोल डीजल पर टैक्स बढाकर 21लाख 50 हजार करोड़ रूपये कमाये आखिर वो पैसा कहां गया? जिसका हक है जो दिनरात इस देश के लिए काम करता है जो पसीने व खून से इस देश को सींचता है उनको क्यों नहीं मिला
ये पैसा उन्होंने सवाल किये कि ये किसानों को क्यों नहीं मिला ये पैसा और रोजगार नौजवानां को क्यों नहीं मिला? जब वहीं किसान प्रताडित होकर अपनी समस्या लेकर प्रधानमंत्री के पास आया तो उनकी बात क्यों नहीं सुनी गयी। जब पूरा देश तडप रहा है तो आप देखेंगे एक दो अरबपतियों ने हजारों करोड रूपये कमाया है और किसान अपने हक के लिए आंदेलन कर रहा है कोई सुनने को तैयार नहीं है। तीन कानूनों को आप जानते ही होगे। पहला कानून प्राईवेट मंडिया लगेगी और सरकारी मंडियों में जो टैक्स लिया जाता है वो प्राइवेट मंडियों में नहीं लिया जायेगा
इसका मतलब सरकारी मंडिया बंद हो जायेगी और आप जानते है कि सरकारी मंडियों से न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलता है। प्राईवेट मंडिया के खुलने से और उनके मजबूत बनाने से क्या होगा। बड़े-बडे खरबपतियों की मनमानी होगी। जब खरीदना चाहते है तभी खरीदेंगे जब बेचना चाहते है तभी बेचेंगे। दूसरे कानून में लिखा है कि कान्ट्रेक्ट फार्मिग होगी इसका मतलब यह है कि बड़े बडे अरबपति आपके साथ एक सौदा कर सकते है कि देखिये आप दस लोग है आप हमारे लिए गन्ना उगाईये
तो हम आपको इसके लिए 500 रूप्ये देंगे। लेकिन जब आप उसको उगायेंगे तो अगर उस खरबपति का मन हो तो वो आपसे कह सकता है कि न मैं आपको रूपये दूंगा और न ही गन्ना चाहता हूं । उसको कहने की अनुमति है क्योंकि इस कानून के तहत कोई सुनवाई नहीं है आप अदालत में जाना चाहेंगे
तो आप अपने हक के लिए लड नहीं सकते केवल एसडीएम के यहां आपकी सुनवाई होगी ऐसा इस कानून में लिखा है। आप देख सकते है कि एक तरफ आप और आपकी छोटी खेती और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री के खरबपति मित्र आप ही बताईये किसकी सुनवाई होगी। ये नये कानूनों के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म होगा, सरकारी मंडिया खत्म होगी और आपके हक खत्म होंगे। जिस तरह से दो तीन मित्रों को पूरे देश को बेचा जा रहा है उस तरह आपको और आपकी जमीन को और आपकी कमाई को ये अपने खरबपति मित्रों को बेच देंगे। मैं जानती हूं आप कितना संघर्ष कर रहे है।
हमारे पीएम पुरानी कहानियों के अहंकारी राजा की तरह हो रहे है। उनको समझ नहीं आ रहा है जो जवान देश की सीमा को सुरक्षित रखता है वह जवान किसान का बेटा है उस जवान का आदर करना चाहिए, किसान का आदर करना चाहिए और जो महीनो से संघर्ष करता आ रहा है वहीं देशवासी जिसने पीएम को सत्ता दी और प्रधानमंत्री बनाया उन्हे समझ मे ंनहीं आ रहा है कि उनकी सुनवाई होनी चाहिए, बातचीत होनी चाहिए
वे कहते है कि कानून आपके लिए यानि किसानों के लिए बना है तो क्या वो बता सकते है किस किसान से बात कर ये कानून बनाया ओर देश का किसान चाह रहा है कि पीएम जी यह कानून नहीं चाहिए तो कानून वापस क्यों नहीं हो रहे है और कानून रद्द क्यों नहीं कर पा रहे है। जिसको सत्ता मिलती है दो तरह के नेता होते है कुछ ऐसे होते है जो सत्ता देने वालो के ही भूल जाते है जब राजा अहंकार में आ जाता है तो देश की जनता उसे सबक सिखाती है।
अहंकारी सरकार अपनी माया से निकले और इन्हे समझ में आये कि इनका धर्म क्या है? भाजपा सरकार ने छोटा व्यापारी की कमर तोडी, किसान की कमर तोडी, गरीब उनको मदद नहीं की और अपने पूंजीपतियों मित्रों की ही मदद की। तो हमको नहीं लगता है कि वे आपके लिए कोई काम करेगा

