आएगी दाम में कमी: Refined palm oil पर आयात शुल्क घटकर 12.5% हुआ
खाद्य तेलों की ऊंची कीमतों से चिंतित, सरकार ने Refined palm oil पर मूल सीमा शुल्क को 17.5 प्रतिशत से घटाकर अगले साल मार्च तक के लिए 12.5 प्रतिशत कर दिया है। इस कटौती का मकसद घरेलू आपूर्ति को बढ़ाना और घरेलू खुदरा बाजारों में कीमतों को कमी लाना है।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार, मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) में कमी के साथ, Refined palm oil और रिफाइंड पामोलिन दोनों पर प्रभावी शुल्क दरें (सामाजिक कल्याण उपकर सहित) 19.25 प्रतिशत से घटकर 13.75 प्रतिशत रह जाएगी।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने सोमवार देर शाम एक अधिसूचना जारी की। इसमें 31 मार्च, 2022 तक Refined palm oil और इसके अन्य तेलों पर बुनियादी सीमा शुल्क को 17.5 प्रतिशत से घटाकर 12.5 प्रतिशत करने की बात कही गयी है। नई दरें मंगलवार से प्रभावी हो गई है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को मूंगफली तेल का औसत खुदरा भाव 181.48 रुपये प्रति किलो, सरसों का तेल 187.43 रुपये प्रति किलो, वनस्पति 138.5 रुपये प्रति किलो, सोयाबीन तेल 150.78 रुपये प्रति किलो, सूरजमुखी तेल 163.18 रुपये प्रति किलो और पाम तेल का खुदरा भाव सोमवार को 129.94 रुपये प्रति किलोग्राम रहा।
शुल्क कटौती के बारे में एसईए के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने मंगलवार को कहा, ‘‘पामोलीन (रिफाइंड पाम) पर आयात शुल्क को 19.25 प्रतिशत से घटाकर 13.75 प्रतिशत करने की घोषणा की गयी है। लेकिन सीपीओ पर आयात शुल्क कम नहीं किया गया है। ऐसे में अब सीपीओ की ही दर पर रिफाइंड पामोलीन का आयात बढ़ने की संभावना है। सीपीओ हमारी रिफाइनरियों के लिए कच्चा माल है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारे आत्मनिर्भरता के सिद्धांत के विपरीत है और देश में रोजगार सृजन और मूल्य संवर्धन को नुकसान पहुंचा सकता है।’’ हालांकि, चतुर्वेदी ने कहा कि उम्मीद की बात यह है कि इस कटौती की अंतिम तारीख 31 मार्च है।
एसईए के कार्यकारी निदेशक बी वी मेहता मानते हैं कि रिफाइंड पाम तेल के आयात में वृद्धि होगी क्योंकि कच्चे पाम तेल (सीपीओ) के साथ शुल्क अंतर अब घटकर केवल 5.5 प्रतिशत रह गया है। वर्तमान में सीपीओ पर प्रभावी शुल्क 8.25 प्रतिशत है।

