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एंग्री यंग मैन CM Yogi Adityanath: Ajay Singh Bisht से Nath सम्‍प्रदाय के महंत, फिर No. 1 मुख्यमंत्री का सफर..

Yogi Adityanathदेश में फायर ब्रांड नेता और हिंदुत्व का बड़ा चेहरा माने जाने वाले योगी आदित्यनाथ ने सामान्य परिवार में जन्म लेने के बाद देश की सियासत में बड़ा मुकाम हासिल करने में कामयाबी हासिल की है। 1972 में आज ही के दिन पैदा होने वाले योगी की गिनती आज भाजपा के कद्दावर नेताओं में की जाती है।

सांसद के बाद उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने पर योगी को अपनी प्रशासकीय क्षमता दिखानी थी और इस मोर्चे पर योगी पूरी तरह खरे उतरे। उत्तर प्रदेश की कमान संभालते ही योगी ने कड़े फैसले लेने शुरू कर दिए और इसी का नतीजा था कि उनके कार्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त रही।

यूपी सहित देश के कई राज्‍यों में प्रचार की कमान संभालकर वे भाजपा प्रत्‍याशियों की जीत सुनिश्चित कर गेम चेंजर बनते रहे हैं. मुख्‍यमंत्री Yogi Adityanath के हिन्दुव के मुद्दे पर किसी को शक नहीं है.

योगी न केवल जनप्रिय फैसले ले रहे हैं बल्कि विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष की बखिया उधेड़ने में कोई कसर भी बाकी नहीं छोड़ रहे हैं। इसका सबूत उन्होंने हाल में हुए विधानसभा सत्र में भी दिया था। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि योगी आदित्यनाथ ने सामान्य परिवार से उठकर सियासी मैदान में इतनी बड़ी कामयाबी कैसे हासिल की।

Yogi Adityanath के आने से गोरखपुर सीट राज्य की hot सीट बन गई है. ऐसे में हर कोई ये जानना चाहता है कि कैसे योगी आदित्‍यनाथ के उत्तराखंड के पहाड़ों से निकलकर नाथ सम्‍प्रदाय के सबसे बड़े पीठ के महंत बने और फिर यूपी का मुख्‍यमंत्री बनने तक का सियासी सफर उन्होंने तय किया.

योगी ने मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहली पारी के दौरान अवैध निर्माणों, अतिक्रमण और अपराधियों की संपत्ति पर जमकर बुलडोजर चलवाए। मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद समेत कई बाहुबली भी योगी सरकार के निशाने पर रहे जिनकी संपत्ति रातों-रात बुलडोजर से ढहा दी गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमेशा डबल इंजन की सरकार के जरिए यूपी के विकास पर जोर दिया है। 2017 से 2022 की अवधि के दौरान डबल इंजन की सरकार की वजह से यूपी का खूब विकास हुआ।

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने 42 साल की उम्र में लगातार पांच बार सांसद बनने का रिकॉर्ड बनाया. वे हिन्‍दू कार्ड खेलने में माहिर होने के साथ ही नाथ सम्‍प्रदाय के सबसे बड़े गोरक्षपीठ के महंत भी हैं.

गढ़वाल जिले के पंचूर गांव में गढ़वाली राजपूत परिवार में  Yogi Adityanath

Ajay Singh Bisht का जन्‍म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचूर गांव में गढ़वाली राजपूत परिवार में हुआ. इनके पिता का नाम आनन्‍द सिंह बिष्‍ट और माता का नाम सावित्री देवी है. सात भाई-बहनों में वे पांचवें स्थान पर आते हैं.

Ajay Singh Bisht ने श्रीनगर के गढ़वाल विश्‍वविद्यालय श्रीनगर से गणित से बीएससी की. साल 1993 में वे गणित में एमएससी की पढ़ाई के दौरान गोरखपुर आए.

देश की सियासत में उस समय राम मंदिर आंदोलन की जबर्दस्त गूंज थी और योगी भी इस आंदोलन से जुड़ गए थे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक कार्यक्रम के दौरान अजय सिंह बिष्ट की मुलाकात गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ से हुई। महंत अवैद्यनाथ से इस मुलाकात ने अजय सिंह बिष्ट के दिलो दिमाग पर गहरा असर डाला और उन्होंने महंत अवैद्यनाथ से गुरु दीक्षा लेने का फैसला कर लिया।

उनके मन में क्‍या चल रहा था, ये उनके घरवालों को भी नहीं पता रहा है. उन्‍होंने ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ से ‘सन्‍यासी’ बनने की इच्‍छा प्रकट की और 22 साल की उम्र में वे सांसारिक मोह-माया छोड़कर योगी बन गए.

महंत अवैद्यनाथ का राजनीतिक उत्तराधिकारी बनने के बाद योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के चुनावी अखाड़े में पहली बार 1998 में उतरे और पहला चुनाव जीतकर 26 साल की उम्र में सबसे युवा सांसद बन गए। इसके बाद उन्होंने 2017 तक लगातार पांच बार लोकसभा में गोरखपुर संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व किया।

Yogi Adityanath – संन्यासी 

  • बड़े महाराज के नाम से लोगों के बीच विख्‍यात महंत अवेद्यनाथ ने युवावस्‍था में सन्‍यासी बनने की Ajay Singh Bisht की इच्‍छा को पहली बार तो खारिज कर दिया. उन्‍होंने मन की बात घरवालों को बताने की बात कही और वापस जाने को कहा. जब दोबारा अजय सिंह बिष्‍ट उनके पास आए
  • तो उन्‍हें विश्‍वास हो गया कि गोरक्षपीठ के उत्‍तराधिकारी बनकर इस पीठ को आगे ले जाने का कार्य इनके अलावा और कोई नहीं कर सकता है. 15 फरवरी 1994 को गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान ही उन्‍होंने ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ से दीक्षा लेकर योगी बन गए. इस बीच Ajay Singh Bisht के पिता और परिवार के लोग उन्‍हें मनाकर वापस ले जाने के लिए आए, लेकिन वे घर वापस नहीं लौटने और हिन्‍दुत्‍व की रक्षा का जो संकल्‍प उठाया था, उससे पीछे नहीं हटे.
  • Yogi Adityanath का नाम Ajay Singh Bisht से योगी आदित्‍यनाथ हो गया. साल 1996 के लोकसभा चुनाव में महंत अवेद्यनाथ के चुनाव का संचालन किया. वर्ष 1998 में गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ ने इन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित कर लोकसभा प्रत्याशी घोषित कर दिया. यहीं से 26 साल के उम्र में लोकसभा चुनाव जीतकर इनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई. इन्‍हेंं सबसे कम उम्र का सांसद होने का गौरव भी प्राप्‍त हुआ.

गोरक्षनाथ मंदिर के उत्तराधिकारी Yogi Adityanath

Yogi Adityanath ने जब गुरु गोरक्षनाथ मंदिर के उत्तराधिकारी के रूप में कार्यभार ग्रहण किया तो उनके ऊपर महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अंतर्गत संचालित होने वाले स्कूल-कालेजों और गोरक्षपीठ के प्रबंधन की जिम्मेदारी रही है. इसके साथ ही उनके ऊपर गुरु गोरक्षनाथ चिकित्सालय और आमजन की पीड़ा का भी समाधान करने की जिम्‍मेदारी रही है.

Yogi Adityanathइसके साथ ही Yogi Adityanath की ख्याति भी बढ़ती चली गई. 10 फरवरी 1999 में महराजगंज जिले के थाना कोतवाली स्थित पचरुखिया कांड ने इन्हें और चर्चा में ला दिया. यहीं से योगी और विवादों का चोली दामन का साथ हो गया.

इसके बाद भी उनके ऊपर मुस्लिम विरोधी होने के साथ सांम्प्रदायिक भाषण देने का आरोप लगता रहा. गोरखपुर में हुए दंगे कर्फ्यू के दौरान उन्‍हें जेल भी जाना पड़ा. योगी आदित्‍यनाथ धर्मांतरण के खिलाफ और घर वापसी के लिए काफी चर्चा में रहे. लेकिन, इन सब बातों से वे कभी विचलित नहीं हुए.

 

हिन्दू युवा वाहिनी से प्रत्याशियों की घोषणा-Yogi Adityanath

इसी दौर में उन्होंने हिन्दू युवा वाहिनी और बजरंग दल जैसे संगठनों को मजबूती प्रदान कर हिन्दुत्व और विकास का नारा बुलंद किया. वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव एवं वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भाजपा शीर्ष नेतृत्व में चल रही उथल-पुथल और पार्टी की गिरती साख को लेकर बगावती तेवर भी दिखाए. 

इसके साथ ही वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में तवज्जो नहीं मिलने पर हिन्दू युवा वाहिनी से प्रत्याशियों की घोषणा तक करने का ऐलान कर दिया. इससे भाजपा खेमे सहित राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई. अंततः शीर्ष नेतत्व ने योगी आदित्यनाथ को तवज्जो दिया और पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित पूर्वांचल में अपनी साख बचाए रखने का मन बनाया. इसका भाजपा को फायदा भी मिला और योगी आदित्‍यनाथ का कद भी दिन प्रतिदिन बढ़ता गया

 बिजली, पानी, सड़क, रोजगार के मुद्दे पर उन्‍होंने यूपी के लोगों का दिल जीतने का काम किया है. वे लगातार गोरक्षपीठ, योग, धर्म और आध्‍यात्‍म पर पुस्‍तकें भी लिखते रहते हैं.

Yogi Adityanath ने आतंकवाद, नक्सलवाद और देश विरोधी तत्वों से निबटने के लिए भी खुलकर भाषण दिए और अपने तरीके से इसके खात्में का ऐलान तक करते रहे. साल 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में लगातार जीत हासिल कर अपनी धमक दिखाई और पूर्वांचल ही नहीं पूरे देश 42 वर्ष की उम्र में लगातार पांच बार सांसद होने का रिकार्ड भी बनाया.

पूर्वी उत्तर प्रदेश में सांसद से अधिक उग्र हिन्दुत्व के पैरोकार योगी आदित्यनाथ अपनी सक्रियता के बूते चुनाव जीतते आए हैं. शायद ही कोई सांसद रात के ग्यारह बजे सभा कर लौटे और पुनः पौने तीन बजे जग जाए. योगी अपने योग के लिए ऐसा ही करते हैं. 

Yogi AdityanathYogi Adityanath की  दिनचर्या:

Yogi Adityanath की सुबह तीन बजे शुरू होने वाली दिनचर्या रात तक चलती है. इसमें सुबह के योग, पूजा-पाठ, गो-सेवा, जनता दरबार, के बाद क्षेत्र का भ्रमण कर लोगों में हिन्दुव का ज्वार उभारना भी शामिल है.

योगी विश्व प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर के महंत हैं. पूर्वांचल गवाह है कि गोरक्षपीठ के महंत योगी आदित्‍यनाथ जितना उग्र तेवर पहले किसी महंत में नहीं रहा है. योगी हिन्दू बनाम मुस्लिम कार्ड खेलने में माहिर हैं.

दूसरे लोकसभा चुनाव में योगी सपा प्रत्याशी जमुना निषाद से जहां हारते-हारते जीते. जीत का अंतर महज सात हजार वोटों का था. इसके बाद तो उन्होंने ताबड़तोड़ जीत हासिल कर अपनी ताकत का एहसास कराया.

2014 के लोकसभा चुनाव में ताबड़तोड़ रैलियां कर उन्‍होंने स्‍टार प्रचारक की भूमिका का निर्वहन किया और गोरखपुर से चुनाव जीतकर अपनी हनक भी कायम रखी. साल 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने 19 मार्च 2017 को उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली.

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में Yogi Adityanath ने गोरखपुर-बस्‍ती मंडल की सभी लोकसभा सीटों पर भाजपा के प्रत्‍याशियों को जीत का सेहरा बांधने में अहम भूमिका निभाई. अब वे 2022 के विधानसभा चुनाव में पहली बार गोरखपुर शहर विधानसभा सीट से लड़ रहे हैं. वे जनसभाओं में विपक्ष पर लगातार हमलावर हैं.

(इंटरनेट और अन्य मीडिया स्रोतों पर आधारित)

Dr. Sanjay Kumar Agarwal

डॉ. एस.के. अग्रवाल न्यूज नेटवर्क के मैनेजिंग एडिटर हैं। वह मीडिया योजना, समाचार प्रचार और समन्वय सहित समग्र प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। उन्हें मीडिया, पत्रकारिता और इवेंट-मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में लगभग 3.5 दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव है। वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों, चैनलों और पत्रिकाओं से जुड़े हुए हैं। संपर्क ई.मेल- [email protected]

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