ISSN-2582-6204

दिल से

अनमोल लोगों से रिश्ता रखता हूँ…

और आज कई बार बिना मुस्कुराये
ही शाम हो जाती है.

कितने दूर निकल गए
रिश्तों को निभाते निभाते,

खुद को खो दिया हम ने
अपनों को पाते पाते.

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