UP Election 2022: कुशीनगर की पडरौना सीट से कांग्रेस प्रत्याशी ने दिया इस्तीफा
UP Election 2022: आरपीएन सिंह के कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जाने के बाद पडरौना (330) सीट से कांग्रेस प्रत्याशी मनीष जायसवाल और पूर्व जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया. आरपीएन सिंह कांग्रेस के कद्दावर नेता थे और झारखंड कांग्रेस के प्रभारी थे.
कांग्रेस प्रत्याशी रहे मनीष जायसवाल ने कहा कि हमारे नेता आरपीएन सिंह हैं. जब वह कांग्रेस में नही रहेंगे तो हम उनके सम्मान में कांग्रेस पार्टी छोड़ रहे हैं. कांग्रेस उम्मीदवार बनने के बाद इस्तीफा देने के सवाल पर कहा कि नेता के सम्मान में यह किया हूं. बीजेपी के सिंबल पर चुनाव लड़ने के सवाल पर कहा कि यह शीर्ष नेतृत्व तय करेगा कि चुनाव कौन लड़ेगा.
32 सालों तक मैंने एक पार्टी में रहा ईमानदारी से, लगन से मेहनत की। परन्तु जिस पार्टी में इतने साल रहा अब वो पार्टी रह नहीं गई ना वो सोच रह गई जहां मैंने शुरूआत की थी: भाजपा में शामिल होने के बाद आर.पी.एन. सिंह #BJP #Congress pic.twitter.com/KcUkPIDhB9
— News & Features Network (@mzn_news) January 25, 2022
पूर्व जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने कहा कि जहां हमारे नेता आरपीएन सिंह का सम्मान नहीं वहां हम कैसे रह सकते हैं. जबसे अजय लल्लू प्रदेश अध्यक्ष बने हैं कुशीनगर पार्टी कार्यालय पर आए तक नहीं हैं. आपको बता दें कि मनीष जायसवाल पडरौना और राजकुमार सिंह खड्डा विधानसभा क्षेत्र से टिकट के दावेदार हो सकते हैं.
कुंवर रतनजीत प्रताप नारायण सिंह
कुंवर रतनजीत प्रताप नारायण सिंह (RPN Singh) औबीसी जाति से आते हैं. मूलतः यह कुर्मी जाति के हैं. यूपी की राजीनीति में इनकी जाति का एक बड़ा तबका निवास करता है. कल आरपीएन सिंह ने खुद यह बात बताई थी कि पूर्वांचल के सभी विधानसभा क्षेत्र में इस बिरादरी के 10 से 15 हजार वोट हैं. इतने वोट होने के बाद इस जाति का कोई नेता इस पूर्वांचल से नहीं है.
कहीं न कहीं आज जब आरपीएन बीजेपी से जुड़े हैं तो वह इसी वोट के सहारे अपनी राजीनीतिक नैया पार करने के जुगत में हैं. पिता सीपीएन सिंह की हत्या के बाद आरपीएन सिंह राजनीति में आए. उसके बाद वह 1996 , 2002 और 2007 में लगातार तीन बार पडरौना विधानसभा सीट से कांग्रेस पार्टी से विधायक रहे.
स्वामी प्रसाद मौर्य को हराकर सांसद बने
आरपीएन सिंह 2009 में पहली बार लोकसभा का चुनाव लडे और तत्कालीन बीएसपी सरकार के दिग्गज नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को हराकर सांसद बने. 2011 की कांग्रेस सरकार में केंद्रीय पेट्रोलियम एवम प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री रहे.
2012 में केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग और कॉरपोरेट मामलों के राज्यमंत्री रहे. 2013 से 2014 तक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री रहे. उसके बाद 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव भाजपा के कैंडिडेट से हार गए थे. आरपीएन सिंह कांग्रेस संगठन में भी बड़े पदों पर रहे.
