शुद्ध पेयजल को तरसे 24 गांवों के लोग: पेयजल योजनाएं यहां वर्षों से अधर में लटकी
मुजफ्फरनगर। गांवों में चल रही पेयजल योजनाएं यहां वर्षों से अधर में लटकी है। 24 गांवों में चल रही 91.13 करोड़ की योजनाएं सात साल से बीच में ही पड़ी है। इन गांवों के लोग शुद्ध पेयजल का इंतजार कर रहे है।
आठ साल से चल रही योजनाओं की प्रशासनिक अधिकारी और सांसद, विधायक भी मॉनिटरिंग नहीं कर रहे हैं।प्रदूषण नियंत्रण विभाग की जांच में कई गांवों के पानी को जहरीला पाया गया था। इस पानी को पीने योग्य नहीं मानकर ऐसे सभी गांवों में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना में पानी की टंकी लगाने को मंजूरी मिली थी। वर्ष 2012 में योजना स्वीकृत हुई और टेंडर छोड़ दिए गए।
विभाग के अफसरों के कारण नतीजा यह हुआ कि जिन परियोजनाओं को दो साल में पूरा हो जाना चाहिए था, ये आठ साल में भी पूरी नहीं हो पाई। इन गांवों में अभी भी बुढ़ाना तहसील का रियावली नंगला, कसेरवा, रसूलपुर जाटान, बसधाड़ा सदर तहसील का बसेड़ा, पीनना, नूनाखेडा, बलवाखेडी, कुल्हेडी शामिल हैं।
खतौली तहसील का हुसैनपुर बोपाडा, मंसूरपुर, चंदसीना और जानसठ तहसील का मोरना, भोपा, संभलहेडा, महलकी, जौली, तिसंग हैं। नागर इकाई के तहत जसोई, सरवट, खुड्डा, सांझक, दधेडूखुर्द, खाईखेडी में टंकी बनाई जा रही है।
इन 24 परियोजनाओं की लागत 91 करोड़ 13 लाख है। केवल चार योजनाओं में ही 90 प्रतिशत काम पूरा बताया जा रहा है। बड़ी बात यह है कि टंकी से ग्रामीणों को एक बूंद भी पानी की नसीब नहीं हो रही है।
डीएम और सीडीओ स्तर पर योजनाओं की मॉनिटरिंग ही नहीं हो रही है। जिले के सांसद और विधायकों को भी जल निगम के कार्यों की देखरेख के लिए फुर्सत नहीं है।

