संपादकीय विशेष

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Muzaffarnagar: सर्दी से ठिठुरे लोग अलाव पर हाथ सेंक कर ठंड से कर रहे हैं बचाव

Muzaffarnagar – कोहरे के चलते रद्द की गई ट्रेन-कोहरे के कारण विजिबिलिटी में कमी आने की वजह से सहारनपुर से दिल्ली जाने वाली ट्रेन संख्या ०४४०३ को रद्द कर दिया गया है। स्टेशन सुपरिंटेंडेंट विपिन त्यागी ने बताया कि दृश्यता काफी कम है। इसलिए सहारनपुर से सुबह ४.४० बजे चलकर पुरानी दिल्ली जाने वाली ०४४०३ एक्सप्रेस को रद्द किया गया है।

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Muzaffarnagar: सर्दी का सितम जारी,कड़ाके की ठंड के कारण बाजार भी सूने पड़े

Muzaffarnagar News-घना कोहरा होने के कारण यातायात भी काफी प्रभावित हो रहा है। दूरदराज से आने-जाने के लिए देर शाम में यात्रियों को बस आदि की सुविधा नहीं मिल पा रही है। सुबह के समय संचालित होने वाली मुजफ्फरनगर परिवहन निगम की बस एवं प्राइवेट बसों के चालक एवं परिचालकों को बड़ी सावधानी पूर्वक बसों का संचालन करना पड़ रहा हैं।

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Muzaffarnagar: हम नहीं लोग कह रहे है…प्रेमपुरी के गांधी पार्क का पुननिर्माण- क्षेत्रीय जनता में रोष

Muzaffarnagar: बताया जाता है कि पुनर्निर्माण करने वाले ठेकेदारों की और से थानाभवन व शामली की लेबर को कार्य स्थल पर छोड़ा गया है, जिसने पहले ही दिन बाउंडज्डी व रेलिंग को बिस्मार करने का काम शुरू कर दिया है। गांधी पार्क के पुर्ननिर्माण को लेकर क्षेत्रीय जनता में जहां रोष फैलने लगा है

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Muzaffarnagar: सर्दी का घने कोहरे व ठंडी हवाओं ने बढाया सितम-हल्का रहा धूप का असर, ठंड से लोग कंपकंपाएं

Muzaffarnagar: सुबह के समय छाए घने कोहरे के कारण वाहन चालकों को भी दिक्कतें हुई। हाइवे पर तो स्थिति इतनी खराब थी कि वाहन चलने के बजाय रेंगने पर मजबूर हो गए, सामने से आ रहे अन्य वाहनों का भी पता नहीं चल पा रहा था जिस कारण उन्हें वाहनों की लाइट जलाकर चलना पडा। दोपहर के समय धूप में भी गर्माहट कम ही रही, हालांकि लोगांे को धूप में राहत मिली लेकिन शाम होते ही एक बार फिर ठंड का असर बढ गया।

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Muzaffarnagar: हम नहीं लोग कह रहे है….बार संघ के चुनाव पर मंदी की मार

लोगों में चर्चा है कि पहले Muzaffarnagar सिविल बार संघ के चुनाव दिसम्बर में और जिला बार संघ के चुनाव मार्च-अप्रैल में होते थे। सिविल बार संघ के चुनाव सामान्य थे, 21-22 दिसम्बर को मतदान के साथ सम्पन्न हो जाते थे। सिविल बार में यद्यपि वकील भाईयों की संख्या जिला बार संघ के मुकाबले काफी कम है, फिर भी यहां के वकीलों का उत्साह और राजनीति का रुझान देखते ही बनता था।

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Muzaffarnagar: रातो में बढने लगी सर्दी, खेत में पाले की सफेद चादर भी आई नजर

Muzaffarnagar-ठंड से लोग कंपकंपाने लगे हैं। हवा की रफ्तार करीब १२ किमी प्रति घंटा रही थी। इसके बाद रात के समय सर्दी का सितम जारी रहा। जिले का न्यूनतम तापमान चार डिग्री तक लुढ़क जाने के कारण लोगों को ठंडक का अहसास हुआ। इससे पहले आठ दिसंबर की रात का न्यूनतम तापमान ५.३ डिग्री रिकॉर्ड किया गया था। सुबह किसान खेत में पहुंचे तो पाले की सफेद चादर भी नजर आई।

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Muzaffarnagar: हम नहीं लोग कह रहे है…दलित वोटों को लेकर बसपाईयों के हवाई दावे शुरू

Muzaffarnagar द∂तार पर न तो रौनक है और न ही कार्यकर्ता, हालत इतनी खराब रही कि मीडिया कर्मियो ंको पानी के लिए भी कोई पूछने वाला नहीं था। नेतागण एक दूसरे के गले में माला डालकर खुद की वाह-वाही लूटने में लगे थे। आने वाले दिनों में कुछ स्थिति सुधर जाये तो कहा नहीं जा सकता। अभी तक तो बसपा का ग्राफ नीचे ही नजर आ रहा है।

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Muzaffarnagar: हम नहीं लोग कह रहे है…भाजपाई रणनीति के चक्रव्यूह में फंसकर भी बड़े काम किये अंजु अग्रवाल ने

उनका कार्यकाल 11 दिसम्बर की रात्रि 12 बजे खत्म हो जाता है, ऐसे में Muzaffarnagar बोर्ड की बैठक बुलाना तो दूर कोई प्रशासनिक कार्य भी वे संचालित नहीं कर सकती, लेकिन इसके विपरीत चेयरमैन समर्थकों का तर्क है कि बोर्ड की पहली बैठक 8 जनवरी को बुलाई गई थी, इसलिए 7 जनवरी की रात्रि तक उनका कार्यकाल कायम है।

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Muzaffarnagar: हम नहीं लोग कह रहे है…CBSE रीजनल ऑफिसर के आगमन के समय मीडिया को जानबूझकर दूर रखा गया

Muzaffarnagar-इस सारे प्रकरण पर नगर के जागरूक अभिभावक शीघ्र ही सीबीएसई (CBSE) के मुख्यालय को अपना प्रतिवेदन भेजने जा रहे है। नगर के गली मौहल्लों और चौराहों पर चर्चा है कि रीजनल ऑफिसर की बढ़िया खातिरदारी कर उन्हें कीमती तोहफे देकर देहरादून के लिए रूखसत किया गया।

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Muzaffarnagar: हम नहीं लोग कह रहे है…दीपावली मेले के नाम पर सर्दियों में नुमाईश

लोग कहते है कि इस बार दीपावली बनाम Muzaffarnagar नुमाईश में कोई भी सांस्कृतिक प्रतियोगिता नहीं हुई और न ही नेताओं को दावत पानी पर बुलाया गया, बस नुमाईश का बाजा खूब बजा। आम जनता में चर्चा है कि ‘बड़े आका’ ने पूरी तैयारी इस हिसाब से तैयार करा दी थी कि पंखा भी न हिल सके और नेताओं का डंक दबा रहे।

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Khatauli: हम नहीं लोग कह रहे है…तोते क्यूं उड़े भाजपाइयों के? हार में Media की दूरी ने भी अपना अहम रोल निभाया

भाजपा के कर्णधारों ने मीडिया की नाराजगी दूर करने की जरूरत नहीं समझी और न पत्रकारों के दौरे कराये गये और न जिले में आने वाले बड़े नेताओं की प्रेसवार्ता ही करायी गई। Khatauli संगठन में मीडिया का काम देखने वाले लोग प्रेसवार्ता की रसीद कटवाने और पत्रकारों के जलपान पर पैसा खर्च करने से बचते रहे, जबकि संगठन के गलियारों में चर्चा है कि इसके लिए उन्हें मोटा माल पहले ही दे दिया गया था।

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