सूर्य का हमारे जीवन पर प्रभाव और अन्य ग्रहों से युति का फल
सूर्य जगतपिता है,इसी की शक्ति से समस्त ग्रह चलायमान है,यह आत्मा कारक और पितृ कारक है,पुत्र राज्य सम्मान पद
Read more...सूर्य जगतपिता है,इसी की शक्ति से समस्त ग्रह चलायमान है,यह आत्मा कारक और पितृ कारक है,पुत्र राज्य सम्मान पद
Read more...आपके बेडरूम में और आपके पूरे घर में हिंसक जानवरों की तस्वीर नहीं होनी चाहिए और किसी युद्ध की तस्वीर भी नहीं होनी चाहिए। ऐसा होने पर आपके घर में लक्ष्मी नहीं आती ये वास्तु के अनुसार सही नही है।
Read more...कुंडली में शुक्र का प्रबल प्रभाव कुंडली धारक को शारीरिक रूप से सुंदर और आकर्षक बना देता है तथा उसकी इस सुंदरता और आकर्षण से सम्मोहित होकर लोग उसकी ओर खिंचे चले आते हैं तथा विशेष रूप से विपरीत लिंग के लोग। शुक्र के प्रबल प्रभाव वाले जातक शेष सभी ग्रहों के जातकों की अपेक्षा अधिक सुंदर होते हैं।
Read more...जब भी सूर्य का गोचर वृषभ, मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ राशि में रहेगा, यह महीने आपके लिए शुभकारी रहेंगे, इस नाते किसी भी तरह के महत्वपूर्ण कार्य आप इन महीनों में कर सकते हैं ।
Read more...हर व्यक्ति अपने जीवन में शांति और सुख-समृद्धि की चाहत रखता हैं। इसे पाने के लिए व्यक्ति हर संभव
Read more...शनि की दशा को दूर करने के लिये यह व्रत किया जाता है। इस दिन शनि स्त्रोत का पाठ भी विशेष लाभदायक सिद्ध होता है। मान्यता है कि यह व्रत करने से पुत्र की प्राप्ति होती है।
Read more...कई बार ऐसी ग्रह स्थितियों का निर्माण हो जाता है कि अपेक्षानुसार हमें शुभ व शुद्ध मुहूर्त नहीं मिल पाता है। ऐसी परिस्थिति में मन दुविधाग्रस्त हो किंतर्व्यविमूढ़ हो जाता है।
Read more...सूर्य पूजा मनुष्य को बुद्धिमान और विद्वान बनाती है। सूर्य पूजा करने वाले की अध्यात्म क्षेत्र में रुचि बढ़ती है और उसका आचरण पवित्र एवं शुध्द होता है।
Read more...ऐसा कहा जाता है कि लाटू देवता वांण से लेकर हेमकुंड तक अपनी बहन नंदा देवी की अगवानी करते हैं लेकिन आपके मन में ये सवाल उठ रहा होगा की आखिर क्यों इस मंदिर में भक्तो का प्रवेश वर्जित है।
Read more...पंचांग शब्द पाँच अंगो से मिलकर बना हैं जिसमे निम्न पाँच अंग होते हैं तिथि,वार,नक्षत्र,योग व करण |किसी भी कार्य करने हेतु उपयुक्त समय ज्ञात करना इन्ही पांचों अंगो पर निर्भर करता हैं जिसे मुहूर्त निकालना कहाँ जाता हैं |
Read more...शनि यदि कुंडली में लग्न अथवा चन्द्रमा से 1, 4, 7 अथवा 10वें घर में तुला, मकर अथवा कुंभ राशि में स्थित है तो यह शश योग बनता है। अथार्त शश योग तब बनता है
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