UPTET 2026 में हाईटेक नकल गिरोह पर बड़ा प्रहार: AI और बायोमीट्रिक ने खोला राज, दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दे रहे 3 सॉल्वर गिरफ्तार
News-Desk
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AI तकनीक, UPTET 2026, अलीगढ़ न्यूज़, उत्तर प्रदेश, परीक्षा सुरक्षा, बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन, यूपीटीईटी, शिक्षक पात्रता परीक्षा, शिक्षा समाचार, सॉल्वर गैंगअलीगढ़। शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET 2026) के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पुलिस ने दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे तीन फर्जी परीक्षार्थियों (सॉल्वर) को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 4 जुलाई को क्वार्सी थाना क्षेत्र में की गई। पुलिस के अनुसार, आरोपियों की पहचान बायोमीट्रिक सत्यापन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित पहचान प्रणाली की मदद से की गई।
मामले के सामने आने के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच और तेज कर दी गई है। पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि गिरफ्तार आरोपी किसी बड़े सॉल्वर गिरोह या संगठित नेटवर्क का हिस्सा हैं या नहीं।
दो परीक्षा केंद्रों से पकड़े गए तीन फर्जी परीक्षार्थी
पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान उपेंद्र कुमार गौतम पुत्र श्याम सिंह गौतम, निवासी कृष्ण नगर कॉलोनी, मथुरा, तथा शिवम कुमार चौधरी पुत्र जोगिंदर सिंह, निवासी नगला लोक, महावन (मथुरा) को टीकाराम कन्या इंटर कॉलेज, अलीगढ़ से गिरफ्तार किया गया।
वहीं तीसरे आरोपी हेमंत कुमार पुत्र मान सिंह, निवासी रायपुरा जाट, मथुरा, को टीकाराम कन्या महाविद्यालय, अलीगढ़ से हिरासत में लिया गया।
प्रारंभिक जांच में आरोप है कि तीनों दूसरे अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचे थे।
AI और बायोमीट्रिक जांच में खुली पोल
सीओ सिविल लाइन सर्वम सिंह के अनुसार परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान के लिए बायोमीट्रिक सत्यापन और AI आधारित तकनीक का उपयोग किया जा रहा था।
जांच के दौरान जब अभ्यर्थियों के दस्तावेजों और बायोमीट्रिक डेटा का मिलान किया गया तो कई विसंगतियां सामने आईं। सत्यापन में गड़बड़ी मिलने पर परीक्षा ड्यूटी में तैनात अधिकारियों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी।
इसके बाद तीनों संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।
दस्तावेजों की जांच में भी मिली गड़बड़ी
पुलिस के अनुसार, केवल बायोमीट्रिक ही नहीं बल्कि दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान भी कई महत्वपूर्ण अंतर सामने आए।
प्रारंभिक जांच के आधार पर यह आशंका व्यक्त की गई कि आरोपी वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देकर अवैध लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रहे थे।
हालांकि पूरे मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है और पुलिस सभी तथ्यों का सत्यापन कर रही है।
संबंधित धाराओं में दर्ज किया गया मुकदमा
तीनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही परीक्षा से जुड़े अन्य दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
क्या सक्रिय है कोई सॉल्वर गैंग? पुलिस कर रही जांच
इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या गिरफ्तार आरोपी किसी संगठित सॉल्वर गिरोह के लिए काम कर रहे थे।
जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि असली अभ्यर्थियों और आरोपियों के बीच किस प्रकार संपर्क हुआ तथा परीक्षा में बैठने के लिए क्या आर्थिक लेनदेन हुआ था।
यदि जांच में किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो उससे जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
परीक्षा सुरक्षा में तकनीक की बढ़ती भूमिका
हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिरूपण (Impersonation) और सॉल्वर गिरोहों की गतिविधियों को रोकने के लिए बायोमीट्रिक सत्यापन, चेहरा पहचान तकनीक (Face Recognition) और AI आधारित पहचान प्रणाली का उपयोग बढ़ाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी तकनीकों के उपयोग से परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता मजबूत होती है और फर्जी अभ्यर्थियों की पहचान करना पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है।
पारदर्शी परीक्षा प्रणाली बनाए रखने पर जोर
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी दोनों आवश्यक हैं।
ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई होने से न केवल परीक्षा की निष्पक्षता बनी रहती है, बल्कि अन्य अभ्यर्थियों के हितों की भी रक्षा होती है।

